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	<title>Comments on: (केवल वयस्कों के लिये) यौन शिक्षा: वे क्या सिखा रहे हैं ?</title>
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	<link>http://sarathi.info/archives/507</link>
	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>By: ravi</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-8553</link>
		<dc:creator>ravi</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Aug 2010 05:03:08 +0000</pubDate>
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		<description>this work is very good 
yah jankari me hindi me apne mail per chahta hu 
or bilkul saf saf 
yadi ap muze jankari denge to iske liye thankyou 
ravikumarcool01@yahoo.com</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>this work is very good<br />
yah jankari me hindi me apne mail per chahta hu<br />
or bilkul saf saf<br />
yadi ap muze jankari denge to iske liye thankyou<br />
<a href="mailto:ravikumarcool01@yahoo.com">ravikumarcool01@yahoo.com</a></p>
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		<title>By: pradeep kumar</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-8401</link>
		<dc:creator>pradeep kumar</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Apr 2010 06:03:00 +0000</pubDate>
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		<description>mera veerya bahut patla he eski bajah se poordh sex sambandh nahi bna pata hu. aur jaldhi free ho jata hu. jisse mera partner santust nahi ho pata he. agar koi upchar ya salah de den. to aapki mahan krpa hogi. aapka aabhari rahuga. PRADEEP KUMAR</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>mera veerya bahut patla he eski bajah se poordh sex sambandh nahi bna pata hu. aur jaldhi free ho jata hu. jisse mera partner santust nahi ho pata he. agar koi upchar ya salah de den. to aapki mahan krpa hogi. aapka aabhari rahuga. PRADEEP KUMAR</p>
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		<title>By: pradeep kumar</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-8400</link>
		<dc:creator>pradeep kumar</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Apr 2010 06:01:36 +0000</pubDate>
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		<description>mera veerya bahut patla he eski bajah se poordh sex sambandh nahi bna pata hu. aur jaldhi free ho jata hu. jisse mera partner santust nahi ho pata he. agar koi upchar ya salah de den. to aapki mahan krpa hogi. aapka  aabhari rahuga. PRADEEP KUMAR</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>mera veerya bahut patla he eski bajah se poordh sex sambandh nahi bna pata hu. aur jaldhi free ho jata hu. jisse mera partner santust nahi ho pata he. agar koi upchar ya salah de den. to aapki mahan krpa hogi. aapka  aabhari rahuga. PRADEEP KUMAR</p>
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		<title>By: Love</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-7810</link>
		<dc:creator>Love</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Oct 2009 19:48:40 +0000</pubDate>
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		<description>pata nahi but sayad isme se bahut si baato ke upar doubt h....... this is really ridicules.... if it is true.... but really i don&#039;t believe this......</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>pata nahi but sayad isme se bahut si baato ke upar doubt h&#8230;&#8230;. this is really ridicules&#8230;. if it is true&#8230;. but really i don&#8217;t believe this&#8230;&#8230;</p>
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		<title>By: Mohit</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-878</link>
		<dc:creator>Mohit</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Aug 2007 11:05:07 +0000</pubDate>
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		<description>में भारत में यौनं शिक्षा के पुरे पक्ष में हूँ और उसके २ बड़े कारण है  - &quot;Child Abuse&quot; और &quot;ग़लत शिक्षा&quot;, मगर अगर हमारी यौन यह सिखाती है जो शास्त्रीजी ने यहाँ लिखा है तो में इसका विरोध करूंगा.

मेरे हिसाब से जो शिक्षा देनी चाहिए उसके पूर्ण रूप से यौन शिक्षा कहना ग़लत होगा. जैसा की शास्त्रीजी ने अपनी इस विषय पर पहली पोस्ट में बताया है की हमारा सेक्स के प्रति नजरिया पश्चिम से भिन्न से, उसी प्रकार हमारी यौन शिक्षा भी वहाँ से भिन्न होना जरुरी है.

मेरे हिसाब से इस शिक्षा को कई भागो में बाता जाना चाहिए और उम्र के विभिन्न पड़ाव पर इसे सिखाया जाना चाहिए. जैसे की १ आठ साल के बालक को यौन क्रिया, मैथुन आदि से कोई लेना देना नही है इसलिए उसे यह नही बताना ही ठीक है, मगर जब येहि बालक १५  साल का हो तो उसे इन चीजो के बारे में बतलाया जाए लेकिन उसमे भी यह सावधानी रखी जाए की हम उसे सिर्फ़ सेक्स के बारे में नही बल्कि मन, आत्म और शरीर के बारे में बताया जाए.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>में भारत में यौनं शिक्षा के पुरे पक्ष में हूँ और उसके २ बड़े कारण है  &#8211; &#8220;Child Abuse&#8221; और &#8220;ग़लत शिक्षा&#8221;, मगर अगर हमारी यौन यह सिखाती है जो शास्त्रीजी ने यहाँ लिखा है तो में इसका विरोध करूंगा.</p>
<p>मेरे हिसाब से जो शिक्षा देनी चाहिए उसके पूर्ण रूप से यौन शिक्षा कहना ग़लत होगा. जैसा की शास्त्रीजी ने अपनी इस विषय पर पहली पोस्ट में बताया है की हमारा सेक्स के प्रति नजरिया पश्चिम से भिन्न से, उसी प्रकार हमारी यौन शिक्षा भी वहाँ से भिन्न होना जरुरी है.</p>
<p>मेरे हिसाब से इस शिक्षा को कई भागो में बाता जाना चाहिए और उम्र के विभिन्न पड़ाव पर इसे सिखाया जाना चाहिए. जैसे की १ आठ साल के बालक को यौन क्रिया, मैथुन आदि से कोई लेना देना नही है इसलिए उसे यह नही बताना ही ठीक है, मगर जब येहि बालक १५  साल का हो तो उसे इन चीजो के बारे में बतलाया जाए लेकिन उसमे भी यह सावधानी रखी जाए की हम उसे सिर्फ़ सेक्स के बारे में नही बल्कि मन, आत्म और शरीर के बारे में बताया जाए.</p>
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	<item>
		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-863</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Aug 2007 07:34:53 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/507#comment-863</guid>
		<description>@हरिराम जी,

आपने शायद ध्यान नहीं दिया हिन्दुस्तानी यौन अवधारणा पर मेरे लेख आने वाले है. जो कुछ लिखा है वह तो गलत बातों की परीक्षा मात्र है. सही तो अब आयगा, एवं आप उसे जरूर पसंद करेंगे</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@हरिराम जी,</p>
<p>आपने शायद ध्यान नहीं दिया हिन्दुस्तानी यौन अवधारणा पर मेरे लेख आने वाले है. जो कुछ लिखा है वह तो गलत बातों की परीक्षा मात्र है. सही तो अब आयगा, एवं आप उसे जरूर पसंद करेंगे</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: हरिराम</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-862</link>
		<dc:creator>हरिराम</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Aug 2007 07:03:56 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/507#comment-862</guid>
		<description>शास्त्री जी, आपके उन्मुक्त सत्य प्रकाशित करने के आपके ये प्रयास स्तुत्य है। किन्तु &quot;विनाश काले विपरीत बुद्धिः&quot; ही अमेरिकी तथा शेष संसार को शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक बीमारियों की जकड़ में ला रही है। 
लेकिन दूसरी दृष्टि से देखें तो लगता है शायद आप ऐसी भ्रामक, दिग्भ्रान्तक, महाविनाशक शिक्षाओं का अपने ब्लॉग पर परोक्ष प्रचार ही कर रहे हैं। इस लेखन के साथ ही कुछ और सत्य उद्घाटित करना बेहतर होता जिसमें &#039;सेक्स&#039; = &#039;काम&#039; = तीसरा पुरुषार्थ के शुद्ध सात्विक रूप का वर्णन एवं प्रचार हो। सिर्फ मैथुन मात्र &#039;काम&#039; नहीं है। &#039;मथना&#039; = मंथन, चाहे समुद्र मंथन हो या विचार मंथन या ...! &quot;मैथुन&quot; मात्र तो &#039;काम&#039; के एक लाखवें हिस्से से भी कम होगा। अच्छा होगा सेक्स के असली स्वरूप, व्यापक स्वरूप, आध्यात्मिक पक्ष का उद्घाटन कर अपने ब्लॉग पर प्रकाशित करें। क्योंकि &#039;काम&#039; भी सृष्टि का एक अनिवार्य अंग है। यदि यह नहीं तो संसार भी नहीं रहेगा। 
भ्रान्त (भले ही कटु सत्य हो) ज्ञान यदि दिया है तो साथ साथ इसका सही ज्ञान भी तुलनात्मक रूप में देना आवश्यक है।

और फिर इण्टरनेट नैतिक कानूनों के तहत &#039;वयस्क&#039; सामग्री के पृष्ठ में प्रवेश करने के पूर्व एक चेतावनी यथा 18 वर्ष से अधिक आयु होने की प्रमाणपत्र का पृष्ठ प्रकट होना चाहिए, जहाँ पर क्लिक करने के बाद ही उस पृष्ठ में प्रवेश हो सके।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्री जी, आपके उन्मुक्त सत्य प्रकाशित करने के आपके ये प्रयास स्तुत्य है। किन्तु &#8220;विनाश काले विपरीत बुद्धिः&#8221; ही अमेरिकी तथा शेष संसार को शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक बीमारियों की जकड़ में ला रही है।<br />
लेकिन दूसरी दृष्टि से देखें तो लगता है शायद आप ऐसी भ्रामक, दिग्भ्रान्तक, महाविनाशक शिक्षाओं का अपने ब्लॉग पर परोक्ष प्रचार ही कर रहे हैं। इस लेखन के साथ ही कुछ और सत्य उद्घाटित करना बेहतर होता जिसमें &#8216;सेक्स&#8217; = &#8216;काम&#8217; = तीसरा पुरुषार्थ के शुद्ध सात्विक रूप का वर्णन एवं प्रचार हो। सिर्फ मैथुन मात्र &#8216;काम&#8217; नहीं है। &#8216;मथना&#8217; = मंथन, चाहे समुद्र मंथन हो या विचार मंथन या &#8230;! &#8220;मैथुन&#8221; मात्र तो &#8216;काम&#8217; के एक लाखवें हिस्से से भी कम होगा। अच्छा होगा सेक्स के असली स्वरूप, व्यापक स्वरूप, आध्यात्मिक पक्ष का उद्घाटन कर अपने ब्लॉग पर प्रकाशित करें। क्योंकि &#8216;काम&#8217; भी सृष्टि का एक अनिवार्य अंग है। यदि यह नहीं तो संसार भी नहीं रहेगा।<br />
भ्रान्त (भले ही कटु सत्य हो) ज्ञान यदि दिया है तो साथ साथ इसका सही ज्ञान भी तुलनात्मक रूप में देना आवश्यक है।</p>
<p>और फिर इण्टरनेट नैतिक कानूनों के तहत &#8216;वयस्क&#8217; सामग्री के पृष्ठ में प्रवेश करने के पूर्व एक चेतावनी यथा 18 वर्ष से अधिक आयु होने की प्रमाणपत्र का पृष्ठ प्रकट होना चाहिए, जहाँ पर क्लिक करने के बाद ही उस पृष्ठ में प्रवेश हो सके।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: sunita(shanoo)</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-832</link>
		<dc:creator>sunita(shanoo)</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Aug 2007 17:11:56 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत सोचा की न लिखुँ..मगर लिखने को मजबूर हो गई हूँ बुरा मत मानियेगा...

शास्त्री जी ज्ञान कोई भी हो जरूरी है प्राप्त करना मगर ज्यादा खोल कर लिखना मुझे अच्छा नही लगता...हमारे देश की संकृति तो यही कहती है...अब आप ही बताईये मेरा वो ग्यारह साल का बेटा जब नारद पर अपनी पोस्ट देखता है तो क्या आपकी यह पोस्ट नही देखेगा...क्या मै उसे अभी से ज्ञान दूँ या फ़िर हर समय उस पर नजर रखुँ...मालूम नही क्यों मगर आज मै आपके पक्ष में नही हूँ...आप ज्ञान जो देते है बहुत अच्छा लगता है...मगर इस विषय पर इतना काफ़ी है...बाकी आप समझदार है...कुछ गलत लिखा है तो माफ़ी चाहती हूँ...या फ़िर इतना गहरा मत समझाईये..बात एसे तरिके से हो ताकी बच्चे नही सिर्फ़ बड़े ही समझ पायें...

शानू</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत सोचा की न लिखुँ..मगर लिखने को मजबूर हो गई हूँ बुरा मत मानियेगा&#8230;</p>
<p>शास्त्री जी ज्ञान कोई भी हो जरूरी है प्राप्त करना मगर ज्यादा खोल कर लिखना मुझे अच्छा नही लगता&#8230;हमारे देश की संकृति तो यही कहती है&#8230;अब आप ही बताईये मेरा वो ग्यारह साल का बेटा जब नारद पर अपनी पोस्ट देखता है तो क्या आपकी यह पोस्ट नही देखेगा&#8230;क्या मै उसे अभी से ज्ञान दूँ या फ़िर हर समय उस पर नजर रखुँ&#8230;मालूम नही क्यों मगर आज मै आपके पक्ष में नही हूँ&#8230;आप ज्ञान जो देते है बहुत अच्छा लगता है&#8230;मगर इस विषय पर इतना काफ़ी है&#8230;बाकी आप समझदार है&#8230;कुछ गलत लिखा है तो माफ़ी चाहती हूँ&#8230;या फ़िर इतना गहरा मत समझाईये..बात एसे तरिके से हो ताकी बच्चे नही सिर्फ़ बड़े ही समझ पायें&#8230;</p>
<p>शानू</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: श्रीश शर्मा</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-831</link>
		<dc:creator>श्रीश शर्मा</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Aug 2007 14:19:24 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/507#comment-831</guid>
		<description>रुचिकर, ऐसी शिक्षा देकर क्या हासिल करना चाहते हैं यौन शिक्षा के पक्षधर?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>रुचिकर, ऐसी शिक्षा देकर क्या हासिल करना चाहते हैं यौन शिक्षा के पक्षधर?</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: paramjitbali</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-830</link>
		<dc:creator>paramjitbali</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Aug 2007 07:44:23 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/507#comment-830</guid>
		<description>शास्त्री जी,आप का लेख पढ कर तो ऐसा लगा की यह यौन-शिक्षा यौन रोगो से बचाव के लिए ्नही,बल्कि शिक्षा द्वारा जो नही भी जानते उन्हें और अधिक शिक्षित करने का प्रयास है ।
अगली पोस्ट का इन्तजार है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्री जी,आप का लेख पढ कर तो ऐसा लगा की यह यौन-शिक्षा यौन रोगो से बचाव के लिए ्नही,बल्कि शिक्षा द्वारा जो नही भी जानते उन्हें और अधिक शिक्षित करने का प्रयास है ।<br />
अगली पोस्ट का इन्तजार है।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: हर्षवर्धन</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-829</link>
		<dc:creator>हर्षवर्धन</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Aug 2007 05:03:40 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/507#comment-829</guid>
		<description>हिंदुस्तानी यौन शिक्षा की पुस्तक के बजाए किस सिलेबस से ये उठाया गया है, ये पता चलता तो ज्यादा बेहतर होता। और, ये नाच वाला प्रयोग क्या किसी स्कूल में हुआ है। जानकारी हो तो बताएं</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हिंदुस्तानी यौन शिक्षा की पुस्तक के बजाए किस सिलेबस से ये उठाया गया है, ये पता चलता तो ज्यादा बेहतर होता। और, ये नाच वाला प्रयोग क्या किसी स्कूल में हुआ है। जानकारी हो तो बताएं</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-828</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Aug 2007 04:55:47 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/507#comment-828</guid>
		<description>इस विषय को आगे बढ़ाये. सही लेखमाला.

भारत में अभी यौन शिक्षा नहीं दी जा रही, मगर एड्स के मामले बढ़ रहे है, बल्कि भयानक होते जा रहे है. ऐसे भी यौन रोगो के फैलाव के लिए सिधे यौन शिक्षा को जिम्मेदार कैसे मान लें. अगर कण्डोम का प्रयोग आता हो तो एड्स से बचा जा सकता है.

यौन शिक्षा का अर्थ व्याभिचार की शिक्षा न हो इस पर सहमत हुआ जा सकता है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस विषय को आगे बढ़ाये. सही लेखमाला.</p>
<p>भारत में अभी यौन शिक्षा नहीं दी जा रही, मगर एड्स के मामले बढ़ रहे है, बल्कि भयानक होते जा रहे है. ऐसे भी यौन रोगो के फैलाव के लिए सिधे यौन शिक्षा को जिम्मेदार कैसे मान लें. अगर कण्डोम का प्रयोग आता हो तो एड्स से बचा जा सकता है.</p>
<p>यौन शिक्षा का अर्थ व्याभिचार की शिक्षा न हो इस पर सहमत हुआ जा सकता है.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: mamta</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-827</link>
		<dc:creator>mamta</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Aug 2007 04:31:20 +0000</pubDate>
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		<description>ऐसे विषयों पर खुल कर बात करने और लिखने की आवशयकता है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ऐसे विषयों पर खुल कर बात करने और लिखने की आवशयकता है।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: नीरज रोहिल्ला</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-826</link>
		<dc:creator>नीरज रोहिल्ला</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Aug 2007 03:34:10 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/507#comment-826</guid>
		<description>शास्त्रीजी,
आपके इस लेख के कुछ विचारबिन्दुओं पर मेरी टिप्पणी इस प्रकार है । 
&quot;अमरीका में 1000 अविवाहित लडकियों पर 1960 मे सिर्फ 21.6 अवैध जन्म होते थे, लेकिन 1990 तक आते आते यह बढ कर 43.8 अवैध जन्म हो गया&quot; ।

अविवाहित लडकियों की संतानों को अवैध करार देना मानवीय दॄष्टि से बिल्कुल अनुचित है । आपको शब्दों को चुनते समय थोडा सावधान रहना चाहिये । Single Mom का Concept अलग है और अवैध संतान बिल्कुल अलग, बल्कि मानवीय दॄष्टिकोण से किसी भी संतान को अवैध कहना जीवन का घोर अपमान है । आपके इस आँकडे का यौन शिक्षा से कोई भी सीधा सम्बन्ध नहीं है । अमेरिकी समाज में Single Mom होने के कारणों में सबसे प्रमुख सम्बन्ध विच्छेद है, यौन शिक्षा नहीं । 

&quot;1960 में अमरीका में इलाज से परे यौन रोग से ग्रस्त एक भी व्यक्ति नहीं था. आज वहां 6.8 करोड लोगों को लाइलाज यौन व्याधियां हैं&quot; । 

अमेरिका की कुल आबादी लगभग ३० करोड है, उनमें से ६.८ करोड लोगों को लाइलाज यौन रोग होने का मतलब से हर पाँच में से (बच्चे बूढे और जवान सभी मिलाकर) लगभग १ लाइलाज यौन रोग से ग्रस्त होंगे । ये आँकडा मेरे गले नहीं उतरता । आप क्या सोचते हैं ?


एड्स फ़ैलने के अन्य कारण भी हैं । उदाहरण के तौर पर अफ़्रीका के देशों में यौन शिक्षा स्कूलों में नहीं सिखायी जाती है, परन्तु एड्स का संक्रमण वहाँ भी भयानक है । वहाँ पर इसके अन्य कारण है ।

आपकी अगली पोस्ट का इन्तजार रहेगा और उसके बाद मैं एक साथ अपने विचार आपके सामने रखूँगा ।

धन्यवाद ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शास्त्रीजी,<br />
आपके इस लेख के कुछ विचारबिन्दुओं पर मेरी टिप्पणी इस प्रकार है ।<br />
&#8220;अमरीका में 1000 अविवाहित लडकियों पर 1960 मे सिर्फ 21.6 अवैध जन्म होते थे, लेकिन 1990 तक आते आते यह बढ कर 43.8 अवैध जन्म हो गया&#8221; ।</p>
<p>अविवाहित लडकियों की संतानों को अवैध करार देना मानवीय दॄष्टि से बिल्कुल अनुचित है । आपको शब्दों को चुनते समय थोडा सावधान रहना चाहिये । Single Mom का Concept अलग है और अवैध संतान बिल्कुल अलग, बल्कि मानवीय दॄष्टिकोण से किसी भी संतान को अवैध कहना जीवन का घोर अपमान है । आपके इस आँकडे का यौन शिक्षा से कोई भी सीधा सम्बन्ध नहीं है । अमेरिकी समाज में Single Mom होने के कारणों में सबसे प्रमुख सम्बन्ध विच्छेद है, यौन शिक्षा नहीं । </p>
<p>&#8220;1960 में अमरीका में इलाज से परे यौन रोग से ग्रस्त एक भी व्यक्ति नहीं था. आज वहां 6.8 करोड लोगों को लाइलाज यौन व्याधियां हैं&#8221; । </p>
<p>अमेरिका की कुल आबादी लगभग ३० करोड है, उनमें से ६.८ करोड लोगों को लाइलाज यौन रोग होने का मतलब से हर पाँच में से (बच्चे बूढे और जवान सभी मिलाकर) लगभग १ लाइलाज यौन रोग से ग्रस्त होंगे । ये आँकडा मेरे गले नहीं उतरता । आप क्या सोचते हैं ?</p>
<p>एड्स फ़ैलने के अन्य कारण भी हैं । उदाहरण के तौर पर अफ़्रीका के देशों में यौन शिक्षा स्कूलों में नहीं सिखायी जाती है, परन्तु एड्स का संक्रमण वहाँ भी भयानक है । वहाँ पर इसके अन्य कारण है ।</p>
<p>आपकी अगली पोस्ट का इन्तजार रहेगा और उसके बाद मैं एक साथ अपने विचार आपके सामने रखूँगा ।</p>
<p>धन्यवाद ।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: संजय तिवारी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/507/comment-page-1#comment-825</link>
		<dc:creator>संजय तिवारी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Aug 2007 03:25:24 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://sarathi.info/archives/507#comment-825</guid>
		<description>अरे वाह शास्त्री जी, वैज्ञानिक का विश्लेषण जारी रहे. कोई माने न माने संदर्भ सामग्री के रूप में इन तथ्यों का बहुत अच्छा उपयोग होगा. 
काम की बात हिन्दी में. यह नारा कैसा है?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अरे वाह शास्त्री जी, वैज्ञानिक का विश्लेषण जारी रहे. कोई माने न माने संदर्भ सामग्री के रूप में इन तथ्यों का बहुत अच्छा उपयोग होगा.<br />
काम की बात हिन्दी में. यह नारा कैसा है?</p>
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