चिट्ठाजगत के विपुल जैन की भाषा बहुत गजब है. वे “चूहा फिराते” हैं, उनके सदस्यों को अपना “धाक” मालूम रहता है, एवं उनके “धडाधड महाराज” आजकल कुछ ज्यादा ही दौड रहे हैं.

CJ29Aug07

आज शाम को संगणक पर बैठा तो पता चला कि जनाब 963 चिट्ठों का पीछा कर रहे हैं (उनकी बोली में “खीच” रहे हैं). यह सभी की उम्मीद से अधिक है. लगता है कि जिस तरह से चिट्ठे एग्रीगेटरों को आगे बढाते हैं उसी तरह यह  एग्रीगेटर चिट्ठों को आगे बढाने लगा है. बधाई हो विपुल ! पहले से इस लिये बधाई दे दी जिससे की 1000 जब हो जाये तो वह हमारी नजर में न पडा और किसी और ने बधाई दे दी तो भी हम कह पायेंगे कि “देखा हम ने पहले कहा था”.

पिछले दिनों मेरी नजर में एक बात और पडी कि धडाधड महाराज की मदद से गूगल में अच्छी धाक जमाई जा सकती है. इसका रहस्य मैं खोलूंगा इसी हफ्ते. इसके साथ एक और बहुत बडा रहस्य भी आपको बतायेंगे — कि सारथी के कितने पन्ने एक महीने में पढे जाते हैं (हिट्स नहीं, पन्ने ! हिट्स तो इस महीने 100,000 को पार कर जायेंगे !!!) – शास्त्री

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Comments

4 Comments so far

  1. मुकेश कुमार on August 29, 2007 9:21 pm

    गूगल में अच्छी धाक जमाई जा सकती है. इसका रहस्य मैं खोलूंगा इसी हफ्ते. इसके साथ एक और बहुत बडा रहस्य भी आपको बतायेंगे — कि सारथी के कितने पन्ने एक महीने में पढे जाते हैं
    हमे इसका इन्तजार रहेगा……………………………..

  2. ghughutibasuti on August 30, 2007 12:38 am

    मैं भी प्रतीक्षा में हूँ ।
    घुघूती बासूती

  3. संजय बेंगाणी on August 30, 2007 10:58 am

    आपके साथ हम भी विपुल भाई को बधाई टिका देते है.

  4. mamta on August 30, 2007 4:40 pm

    पर ये धाक का क्या मतलब है।

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हिन्दी में टंकण के लिये पहले http://quillpad.in/hindi/ पर चले जाईये. टंकण के बाद उसे यहां नकलचिपका लीजिये

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