रचना सिंह ने कल अपने चिट्ठे सामाजिक अपराधों पर एक मार्मिक कविता आज के ताज़ा समाचार, नापुंसको की बस्ती से पोस्ट की जिसकी आखिरी पंक्तियां है:
“आज के लिये इतना ही
और सुनने की ताकत नहीं”
सवाल यह है कि क्यों समाज के बाकी लोग नपुंसक हैं. इसका उत्तर उन्होंने नहीं दिया है, लेकिन मै उत्तर काव्य रूप में दे रहा हूं:
टिकता है समाज कई खम्बों पर,
सत्य, धर्म, न्याय, सहिष्णुता
आदि जिन में से हैं कुछ.
जब होते हैं सारे स्तंभ
स्थान पर अपने अपने,
तो होता है समाज में
अमन और चैन.
गिरते जाते हैं जब वे
एक एक करके, तो
मिटता जाता है समाज से
अमन, चैन, एवं सुरक्षा.
कहीं और जाने की नहीं है
जरूरत,
कारण इसका जानने के लिये.
जब चुप रहते हैं समाज में,
अधर्म के विरुद्ध,
धर्मप्रिय लोग;
जब मूंह बंद कर लेते हैं
अन्याय के विरुद्ध,
न्यायप्रिय लोग;
जब बोलते नहीं है सामाजिक
बुराईयों के विरुद्ध,
समाज के सज्जन लोग;
तो निमंत्रण है यह
अपराधी तत्वों को,
समाज पर राज करने को.
होता है जिस समाज में
आदर खलनायक का,
नायक के समान,
दैवी विधि है उस समाज की कि
कोई न रोक सकेगा
खलनायकों को उनकी
विकृतियों से.
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September 2nd, 2007 at 12:46 pm
आपने बहुत ही सम्यक विचार किया है। स्थिति बड़ी भयावह है। गलत काम का विरोध करना तो बहुत दूर की बात है, लोग गलत को गलत कहने का साहस नही कर पाते हैं। पर यहाँ तो स्थिति और भी बदतर है – लोग गलत और सही का, वास्तविक नायक और खलनायक का अन्तर भी नही कर पा रहे हैं।
सलमान को कारावास की सजा पर कुछ विचार-शून्य लोगों द्वारा छाती पीटना इसका ताजा उदाहरण है।
September 2nd, 2007 at 1:46 pm
we all have become coward and we have started accepting every thing . we dont fight any more . we justify every wrong by saying the law will take its own course . we glamourize the “wrong” . someone copyies are post we cant call them thief . http://aakashpriya.blogspot.com/
someone writes trash on woman to grab attention we say its freedom of expresion .
some one dies because of social networking but we dont raise our voice . woman are raped we say is because they{ woman } did not follow clothing rules that have been created , they { woman } provoked the man to rape . a lady teacher initiates girls into prostitution and a father rapes a daughter , a baby boy is sodomised and we are sleeping over these issues
September 3rd, 2007 at 9:33 am
अगर कुछ नही किया गया तो आगे का समय बहुत बुरा आने वाला है. कानून की तो आखो पे पट्टी पहले से ही है.