come-ant कम-आन्ट शीर्षक कविता में यतीश जैन ने चिट्ठाजगत की एक सच्चाई को प्रस्तुत किया है जिसे कई लोग नकारने की कोशिश करते हैं. सवाल यह है कि क्या टिप्पणी-प्रोत्साहन के बिना चिट्ठाकार पूरे उत्साह के साथ आगे जा सकता है? मेरा उत्तर है कि अधिकतर चिट्ठाकार आगे नहीं जा सकते हैं. अत: यह कविता बांचिये, दो चार शब्द में टिप्पणी यहां टिका दें (इस बात के लिये कि हम भी क्या क्या गजब की रचनायें ढूढ कर लाते हैं), लेकिन कल से यतीश के चिट्ठे पर भी पधारने का कष्ट करें. (वे भी आईंदा आपके चिट्ठे पर पधारेंगे, जहां तक मैं समझता हूं!!)
प्रोत्साहन ही
लिखने वाले का
ईधन होता है.
कुछ लोग कहते है
हम अपनी खुशी के लिए
लिखते है,
कोई पढे या न पढे
मैं नही मानता.
यहाँ
इन चिट्ठों पे
कुछ भी तो अपना नही है,
कुछ लोगो से लिया
कुछ अपना मिलाया
कुछ ज़िंदगी ने सिखाया
जो बिखर गया यही पे
कही लेख बनके
सिमट गयी कही पे
कविता बनके.
फिर क्यों न हम
ज्यादा में बटे
एक होके
क्यों न एक हो जाए
सब मिलके
फिर हमारी भी तुम्हारी
तुम्हारी भी हमारी
बस एक कोना अधिकार का ज़रुर हो
जिससे अपनी सी खुशबू आती रहे
फिर सब इकठ्ठा होंगे चीटियों की तरह
रोज़ होगी दावत विचारों की
और मैं
हटा दूंगा
comments की तख्ती
लिख दूंगा
come-ant
इंतजार नही करुंगा
क़तरा-क़तरा
चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: काविता, काव्य-विधा, काव्य-अवलोकन, सारथी, शास्त्री-फिलिप, hindi-poem, hindi-poem-analysis, hind-context,












September 3rd, 2007 at 3:02 pm
टिप्पणी to point out spelling mistakes in hindi and the corrected spellings are most welcome . shudh hindi liknae kae liye yse jaruree hae
September 3rd, 2007 at 5:34 pm
I think yatish is right. Comments plays an important role in motivating the writer. Comments help you boost the moral of a blogger. And we all should try to leave comments whenever we read blogs of fellow bloggers.
September 3rd, 2007 at 5:51 pm
शुक्रिया शास्त्रीजी,
अब थोडा ईधन मिलने लगा है और अपनी गाडी चलने लगी है, चीटियो का आना ऐसे ही जारी रहा तो शीघ्र ही नेट पर मेरी 100 कविताये पूरी हो जायेगी.
September 3rd, 2007 at 9:08 pm
यतीश जी की बात से पूर्ण सहमत हूँ.
September 3rd, 2007 at 11:37 pm
यतीश जी सही कह रहे हैं।