बैठने की प्रिय जगह

मुन्ने के बापू यदि कमप्यूटर के सामने न बैठें हों तो उनका प्रिय जगह है: टीवी के सामने, सोफे पर, और पैर टीवी तथा सोफे के बीच मे रखी मेज के उपर| वह वहां पर क्या कर रहे होते हैं यह इस पर निर्भर करता है कि टीवी में क्या आ रहा है|

यदि हौकी या क्रिकेट का मैच है और हिन्दुस्तान खेल रही है तो उनकी गोद में टौमी, वही अपना कुत्ता, होगा| जिसे वे प्यार से दहिने हांथ से सहला रहे होंगे और वह अपनी लम्बी जीभ निकाल कर उनके मुंह को बड़े प्रेम से चाट रहा होगा उंह….हूं … | कभी कभी उनका और टौमी का बैलेन्स गड़बड़ा जाता है क्योंकि वे हिन्दुस्तान की टीम को बक-अप करने लगते हैं जैसे हिन्दुस्तान की टीम के पास टेलीपैथी हो और केवल उनकी बात ही सुन रही हो| अरे चुपचाप मैच देखो|

यदि हौकी या क्रिकेट का मैच नहीं आ रहा है तो और मुशकिल| टौमी बांयी तरफ बगल मे नीचे, जिसे वे बांये हाथ से सहला रहे होते हैं तथा दांये हांथ मे रिमोट रहता है जिस पर उनकी उंगलियां ऐसे थिरक रही होती हैं जैसे कोई नृत्यांगना भारत-नाटय्म कर रही हो| क्या मजाल है कि कोई चैनल पर २ या ३ सेकंड से ज्यादा रुकती हों| कहो कि २-३ मिनट तो देखो, प्रोग्राम तो समझने दो, फिर चैनल बदलो| कहेंगे,

‘क्या देखना सब में एक ही बात रहती है, सब मालुम है|’

कभी खबरें आ रहीं हों, सुनने का मन करे: तो उनका सधा सधाया जवाब है

क्या करना है कहीं चोरी कहीं डकैती तो कहीं खून| क्या इसके अलावा कोई और खबर रहती है क्या?

क्या आपको ऐसे रिमोट के बारे मे मालुम है जिसमे कम से कम ३ से लेकर ५ मिनट तक चैनल नहीं बदले जा सकते हों: बस वही लगा देना है| [अनुमति से: बैठने की प्रिय जगह]

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