टिप्पणी: एक सेमीफायनल चर्चा 001

टिप्पणी एक छोटी सी चीज है, लेकिन टिप्पणी का महत्व छोटा नहीं है. इस कारण हिन्दीजगत के वरिष्ट चिट्ठाकरों नें इस विषय पर बीसियों महत्वपूर्ण लेख लिखे है. इन में से जितने लेख मैं अन्य चिट्ठाकारों के लेख से बटोर सका था, उन सब को टिप्पणी एवं टिप्पणीशास्त्र में जोड दिया है. (यदि कोई और लेख आपकी नजर में हो तो उसे यहां टिप्पणी में जोड दें तो बडा आभार होगा).

टिप्पणी पर मुझे एक सेमीफायनल चर्चा के रूप में निम्न बातें कहनी हैं:

1. लगभग 80% लोग टिप्पणी का बेसब्री से इंतजार करते है. उनको एक छोटी सी भी टिप्पणी मिल जाये तो वे हिन्दी चिट्ठाकरिता में दस गुना बढ सकते है. उनको नजरअंदाज न करें. (100,000 हिट प्रति महीना मिलने के बावजूद मैं आज भी बेसब्री से टिप्पणियों का इंतजार करता हूं, अत: नये नवेले चिट्ठाकरों के बारे में आप अंदाज लगा सकते हैं)

2. अधिकतम 20% चिट्ठाकर ऐसे होंगे जो टिप्पणी के बदले अपने हिट-काउंटर से ही तृप्त हैं. ऐसे लोग यदि टिप्पणी की सुविधा अपने चिट्ठे से हटा दें, या "यहां टिप्पणी अनावश्यक है" का बोर्ड लगा दें तो उनके हिस्से जो फालतू टिप्पणियां गिरती हैं, वे अन्यत्र हिन्दी चिट्ठाकरिता के विकास के लिये काम आ सकती है. हिन्दी चिट्ठाकरिता के विकास जैसे महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिये यह एक छोटा सा त्याग होगा, लेकिन बहुत बडा योगदान होगा. (मुझे टिप्पणियां पसंद है, अत: सारथी पर कभी भी यह बोर्ड नहीं टंगेगा)

3. एक वरिष्ट चिट्ठाकर को टिप्पणी देने से पहिले कम से कम तीन नवप्रसूत चिट्ठाकारों को टिप्पें एवं प्रेरित करें. (यह न केवल मेरा नजरिया है, बल्कि यह मेरी आदत भी है).

4. नये चिट्ठाकरों की क्वालिटी को टोकपीट कर न देखें. बाल की खाल न निकालें. उनको पर्याप्त टिप्पणी देकर बढने का अवसर दें. रोटी पकने पर खाई जाती है, पर आटा गंधते ही रोटी का स्वाद न ढूढे. (मै ऐसा करता हूं एवं इसके अच्छे परिणाम निकले हैं).

5. किसी नये चिट्ठाकर को टिप्पणी देना बंद करने से पहले उनको कम से कम दस से पंद्रह रचनायें प्रस्तुत करने का अवसर दें. (मै ऐसा करता हूं एवं इसके अच्छे परिणाम निकले हैं).

6. याद रखें, हमारा लक्ष्य हिन्दी एवं हिन्दी चिट्ठाकारी को प्रोत्साहन देना है. चंद टिप्पणियों द्वारा दूसरों को प्रोत्साहित करने में हमारा कुछ नहीं जाता, लेकिन हिन्दीजगत को बहुत अधिक फायदा हो सकता है.

इस विषय पर मेरे मुख्य लेख:
टिप्पणी एवं टिप्पणीशास्त्र
टिप्पणी क्यों करें
चिट्ठों पर टिप्पणी न करें!
क्या टिप्पणी दें ?
चिट्ठों का टिप्पणीशास्त्र परिचय
टिप्पणीकारों को पहचाने !!
टिप्पणीकार मित्रों से निवेदन !
हैं पढने वाले बहुत कद्रदान आपके

जिन लेखों ने इस चर्चा को जीवंत बनाया:

टिप्पणी करते हैं आप अपने लिए
टिप्पणियों का मनोविज्ञान
Hindi Blog Etiquettes….Commented (upon)
टिप्पणियों का महत्त्व
कृपया टिप्पणी करने दें
टिप्पणीकार्ता का दर्द न जाने कोय
किस्सा-ए-टिप्पणी बटोर : देबाशीष उवाच
टिपें न तो पता कैसे चले कि हम आये थे
प्रोत्साहन ही लिखने वाले का ईधन होता है
ऎसा है हिंदी ब्लॉगित जाति का लिंकित मन
“वाह वाह” या “लिखते रहें” से बेहतर है चुप्‍पी
जो दे उसका भी भला, जो न दे उसका भी भला
हाय टिप्पणी!! काहे टिप्पणी!!
टिप्पणियां जीवन रक्षक दवाएं हैं !!
टिप्पणी न कर पाने के कुछ मासूम बहाने

पृष्ठभूमि समझने में सहायक:
क्या चिट्ठाकारी डायरी लेखन है ?
ऎसा है हिंदी ब्लॉगित जाति लिंकित मन
विरही ब्लॉगर, नाहक दुंद मचाय रे….
ब्लोगिंग के तीन महीने
ब्लोग्स और कमेंट्स …

पहली दौर के कुछ लेख:
कवि: क्यूँ, कैसे और आप
ब्लाग पर टिप्पणी का महत्व
किलकाती टिप्पणियाँ…
अपना ब्लॉग बेचो रे भाई
अपने ब्लाग की टी आर पी कैसे बढ़ायें
सुभाषित वचन-ब्लाग, ब्लागर, ब्लागिंग
पुनि पुनि बोले संत समीरा
तू मेरी पीठ खुजा मैं तेरी पीठ खुजाऊँ
टिप्पणी-निपटान की जल्दी
चिठ्ठे का टी आर पी
रेडीमेड टिप्पणियाँ
हिंदी में चिट्ठाकारी के कारण पर विचार
पीठ खुजाना: पारस्परिक टिप्पणी
टिप्पणियों के जुगाड़
कभी कभी अनहिट, निर्लिंक व टिप्‍पणीशून्‍य भी लिखें

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चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: हिन्दी, हिन्दी-जगत, राजभाषा, विश्लेषण, सारथी, शास्त्री-फिलिप, hindi, hindi-world, Hindi-language,

11 Responses to “टिप्पणी: एक सेमीफायनल चर्चा 001”

  1. समीर लाल Says:

    सही फरमाया आपने. आभार एवं साधुवाद.

  2. sajeev Says:

    bahut achhe sir, bhai tippanniyan to jeevan pran hai bloggar ki

  3. kakesh Says:

    सहमति आपसे.

  4. rachna Says:

    टिप्पणी
    आ जायें तो सांस है वो
    ना आयें तो आस है वो

  5. Sanjeev Kumar Says:

    टिप्पणियों का सिलसिला तो जारी रहना ही चाहिए. इससे ब्लॉगर का उत्साहवर्धन होता है.

  6. Prashant Priyadarshi Says:

    भाई साहब, मैं पिछले नवंबर से ही नवप्रसूत चिट्ठाकारों की श्रेणी में बैठा हुआ हूं, अभी तक बाहर नहीं आ सका हूं… हमें भी तो बाहर निकालिये.. :D

  7. संजय बेंगाणी Says:

    मेरे द्वारा बहुत पहले ही टिप्पणीयों के महत्त्व पर बार बार लिखा गया है. कुछ एक यहाँ देखें :

    कृपया टिप्पणी करने दें
    http://www.tarakash.com/joglikhi/?p=107

    टिप्पणीकार्ता का दर्द न जाने कोय.
    http://www.tarakash.com/joglikhi/?p=144

  8. Sanjeet Tripathi Says:

    सहमत!

    भाई प्रशांत प्रियदर्शी जी, मैने फ़रवरी से चिट्ठा प्रारंभ किया है और अपने आप को अब नवप्रसूत चिट्ठाकार तो नही मान रहा लेकिन आप क्यों माने जा रहे हैं अपने आप को!

  9. mamta Says:

    शत-प्रतिशत सही क्यूंकि टिप्पणी बिन सब सून कहना शायद गलत नही होगा।

  10. श्रीश शर्मा Says:

    टिप्पणी की महिमा तो हमेशा कायम रहेगी। आपके टिप्पणी संबंधी परोपकारी विचारों को जानकर खुशी हुई।

    कभी हमारे संजय भाई को टिप्पणीसम्राट कहा जाता था अब वह बीड़ा समीरलाल जी ने उठा लिया है।

  11. अजित वडनेरकर Says:

    बहुत सुंदर। लेख का दूसरा बिन्दु जबर्दस्त है। इसमें व्यंग्य लेख जैसी धार है और मार है। दो बार पढ़ गया इसे। शुक्रिया..

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