तत्पर हैं सदा देशप्रेम है ऐसा उनका, साथ हमेशा चलता है, आपने चिट्ठे पर विदेशी हिन्दी पाठकों के अनवरत प्रवाह प्राप्त करने के लिये उसे आज ही हिन्दी चिट्ठों की अंग्रेजी दिग्दर्शिका चिट्ठालोक पर पंजीकृत करें!
हर बात के लिये,
स्वकल्याणदास जी.
कि अध्ययन करते हैं
देशी समस्याओं का,
हमेशा
विदेशों में जाकर.
उनका पूरा कुनबा.
तर्क है उनका यह कि,
कर भला अपना,
तो हो भला सबका.
चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: व्यंग, काविता, काव्य, व्यंग-विधा, सारथी, शास्त्री-फिलिप, humour, satire, hindi, poem, hindi, humor,












September 26th, 2007 at 6:29 pm
यई तो दिक्कत है कि ऐसे स्वकल्याणदास ही बहुत ज्यादा है हमारे देश में जबकि कल्याणदास इक्के-दुक्के ही हैं
September 26th, 2007 at 7:51 pm
हमारे सारे नेता और छद्म समाजसेवी इसी स्वकल्याण दास जी के वंशज हैं।
September 26th, 2007 at 8:14 pm
ये कौन से वाले मंत्री जी हैं. सभी तो ऐसे ही हैं.