[एक मूल्यांकन: समीर लाल एवं हिन्दी चिट्ठाजगत] हिन्दी चिट्ठाजगत मे शायद ही कोई व्यक्ति हो जिसने समीर लाल का नाम न सुना हो. जब से मैं हिन्दी चिट्ठाकारी में आया तब से उनके चिट्ठे पर जो लेख आते हैं, वे अन्य चिट्ठाकारों जो टिप्पणियां देते हैं, एवं चिट्ठाजगत में उनके प्रभाव आदि को काफी ध्यान से देखता रहा हूं. उनके ऊपर छ्पे एक लेख को कल मैं ने सारथी पर दिया था. अब यह दूसरा लेख समीर जी के योगदान के बारे में मेरा अपना स्वतंत्र मूल्यांकन है.
परिचय: समीर जी पेशे से भारतीय चार्टड एकाउन्टेन्ट हैं. कनाडा जा कर वहां का समकक्ष सीए बनने उम्र के इस मोड़ पर उन्होंने फिर से पढ़ाई की. अमेरीका से मेनेजमेन्ट एकाऊन्टिग (CMA), प्रोजेक्ट मेनेजमेन्ट (PMP), अनेकों शेयर बाजार के सर्टिफिकेशन, माईक्रोसॉफ्ट से msexcel expert का certification आदि प्राप्त की. पढ़ाई सतत जारी है अभी भी क्योंकि बहुत कुछ कर जाने की इच्छा है.
१५ वर्षों की स्वतः की सीए की प्रेक्टिस करके कानाडा पहुंच पुनः कैरियर शुरु किया. शेयर मार्किट में ट्रेडर के तौर पर और फिर जल्द ही टेक्नालॉजी में पैर जमा कर .NET एवं SQL Server एक्सपर्टाईज हासिल की और वहां के सबसे बड़े बैंक में सलाहकार बतौर कार्यरत हैं. विभिन्न तकनिकी ऑनलाईन एवं प्रिंट में लगातार तकनीकी लेखन एवं एम एस एक्सेल पर अपना अंग्रेजी ब्लॉग. तकनिकी लेखन प्रिन्ट पत्रिकाओं के लिये भी करते हैं, जिसे कहीं और छापने की अनुमति उनको नहीं है.
इन सारी व्यस्तताओं के बाद हिन्दी के प्रति प्रेम चिट्ठाजगत में और कविताओं की दुनिया में उनको खींच लाया. समय कम पड़ने लगा तो अपनी नींद में कटौती कर दी. विगत कुछ वर्षों से ४ घंटे में नींद पूरी करने की आदत डाल ली है और मानसिक आराम के लिये मेडिटेशन का सहारा लेते हैं. नियमित कवि सम्मेलनों में शिरकत करते रहते हैं. अनुभूति, अभिव्यक्ति, हिन्दी नेस्ट, साहित्यकुंज, मुक्तक मोती में प्रकाशित. २००६ में ही तरकश सम्मान और इंडीब्लॉगीज अवार्ड से नवाजे गए.
समीर जी एवं हिन्दी चिट्ठे: ब्लॉग लेखन 2006 मार्च में शुरु किया. लेखन के साथ साथ उन्होंने टिप्पणियों द्वारा दूसरों को प्रोत्साहित करना भी शुरू कर दिया. पहले तो टिप्पणियों की संख्या ५-६ होती थीं, अब तो बढ़ कर ३०-३५ प्रति दिन हो गई हैं. ताज्जुब की बात है कि टिप्पणी करने से पहले वे प्रविष्ठि को पूरी तरह से पढते है. विवादित मुद्दों को छोड़ कर या कुछ ऐसे विषय जिन से वे सैद्धांतिक रुप से वे सहमत नहीं, एवं जो उनके काम के नहीं है (जैसे कामोडिटी , शेयर बजार आदि), वे बाकी सभी विषयों पर पढना एवं टिप्पणी करना पसंद करते हैं.
उनका योगदान मेरी नजर में: समाज मे बीस प्रतिशत लोगों आत्म प्रेरित होते हैं, एवं उनको अन्य लोगों के द्वारा उत्साहवर्धन की जरूरत नहीं होती है. बीस प्रतिशत निराशावादी होते हैं एवं उनको किस भी तरह की प्रेरणा छू नहीं सकती है. बाकी साठ प्रतिशत लोगों को प्रेरणा की बहुत जरूरत होती है. (मैं उन 60% लोगों मे आता हूं).
यदि समाज के 60 प्रतिशत लोगों को समयानुकूल प्रेरणा मिल जाये, एवं यदि किसी नये अभियान पर जाते समय यह बीच बीच में प्रोत्साहन मिलता रहे, तो उन में से बहुत से लोग सामान्य से 10 गुने से लेकर 1000 गुने तक अधिक कार्य कर सकते हैं. अत: प्रोत्साहन देने वाले लोग समाज में एक बहुत बडा रचनात्मक योगदान देते है. मध्यप्रदेश में जब बंधानी लोग मकान पर भारी पटिये चढाते हैं, जब केरल में 100 लोगों द्वारा एक साथ खेने वाले भीमकाय नावों की दौड होती है, तब एक आदमी सिर्फ उनका उत्साह बढाने का काम करता है. वह न तो पटिये को हाथ लगाता है, न पतवार को. लेकिन यदि वह न हो तो न तो पटिया समय चढ पायगी, न नांव प्रतियोगिता जीत सकेगी.
दूसरों की नजर में यह आदमी बेकार ही खडा है. बेकार ही आवाज कर रहा है. बेकार ही ताल और लय मे चीखे जा रहा है. लेकिन उन बंधानी लोगों से जो 500 किलो की पटिया चढाते हैं, या 10 टन की नांव को खेने वाले मल्लाहों से पूछें तो वे बतायेंगे कि इस आदमी की आवाज, उसका ताल, उसका लय, तो उनके लिये जीवन है. समीर लाल जी महज चार घंटे सोकर, समय निकाल कर, हिन्दी चिट्ठाकारों को जो प्रोत्साहित करते हैं, उसका फल कुछ ऐसा ही है. बंधानियों को, मल्लाहों को सिर्फ शारीरिक कार्य करना पडता है. चिट्ठाकार उससे कई आयम ऊपर उठकर मानसिक तल पर कार्य करते है. उनको उनके स्तर पर प्रोत्साहित करना जरूरी है. इस बात को समझ कर समीर जी ने प्रोत्साहन को एक अभियान के रूप में लिया. आम चिट्ठाकरों से पूछें तो पता चलेगा कि उन को इन से कितना अधिक प्रोत्साहन मिला. समीर जी को इस कारण मेरा साधुवाद. जी हां आप ने सही सुना, मैं ने उनके ही एक वाक्य को उन पर फिट किया है. साधुवाद समीर जी, शास्त्री का साधुवाद. उन सैकडों चिट्ठाकारों का अभार भी, जो आपकी टिप्पणियों से प्रेरित हुए.
समीर जी, लोगों को कुछ भी लगता हो, उससे विचलित हुए बिना नये आये लोगों को प्रोत्साहित करते रहें. उन्हें आपके प्रोत्साहन की आवश्यक्ता है . पुराने वृक्षों को सींचने वालों की तो भीड़ है. नई कोपलें आपकी राह तकती हैं, उन्हें बड़ा होने में मदद करें . यही चिट्ठाजगत की हरित क्रांति है जो इसे हरा भरा करेगी.
हिन्दी चिट्ठाजगत में प्रोत्साहन का कार्य और भी कई लोग कर रहे हैं. उन में से कई लोगों (नारद परिवार के सदस्यों से लेकर, मैथिली गुप्त, विपुल जैन आदि तक) ने शुरू के दिनों में मुझे जिस तरह प्रोत्साहित किया उसे मैं कभी नहीं भूल सकता. उन लोगों के बारें में भी लेख तय्यार हो रहा है ताकि हिन्दी चिट्ठाजगत के असली सारथियों को लोग जान सकें – शास्त्री जे सी फिलिप
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September 29th, 2007 at 6:44 am
बहुत ही प्रेरणादायक ,आप का आभार ,समीर का तुलसी होने के लिए .
September 29th, 2007 at 7:00 am
शस्त्रीजी; बहुत अच्छा किया यह परिचय छाप कर. बहुत धन्यवाद.
September 29th, 2007 at 7:11 am
यही चिट्ठा जगत की हरित क्रांति है…धन्यवाद
September 29th, 2007 at 8:13 am
शास्त्री जी ऊपर वाली टिपण्णी गलती से हो गयी है कृपया हटा दे, समीर भाई के बारे में जो आपने लिखा है अक्श्रख्शार सच है, समीर जी को मैंने भी बहुत पढ़ा है, पिछले कुछ दिनों से उनकी लेखनी में गजब सा ठहराव आया है, उनकी कलम का स्थर अब और उंचा हो गया है, मुझे लगता है अब उनको अपने श्रेष्ट लेखों को पुस्ताक्बध कर लेना चाहिए
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मैं आज के हिंद का युवा हूँ,
मुझे आज के हिंद पर नाज़ है,
हिन्दी है मेरे हिंद की धड़कन,
सुनो हिन्दी मेरी आवाज़ है.
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http://www.hindyugm.com
9871123997
सस्नेह -
सजीव सारथी
sajeevsarathie@gmail.com
September 29th, 2007 at 8:15 am
समीर जी का विस्तृत परिचय प्रकाशित करने का धन्यवाद!
September 29th, 2007 at 9:54 am
समीरलालजी के बारे में लिखने के लिए साधूवाद.
September 29th, 2007 at 11:38 am
समीर जी के बारे में आपके द्वार जो भी लिखा गया है वह अक्षरशः सत्य है क्यों कि मैने भी चिट्ठाकारी में अभी अभी लगभग 20-25 दिनों पहले ही कदम रखा है परंतु यहां उनसे जो मार्गदर्शन और सहयोग मिला है वह अवर्णीय है क्यों कि एक नव चिट्ठीकार को अपनी लेखनी पर मिली टिप्पणियां आगे लिखने और अपने को बेहतर करने के लिये कितना प्रोत्साहित करती हैं यह बात शब्दों में नहीं कही जा सकती। और न ही उस खुशी का ही वर्णन किया जा सकता है जो उन टिप्पणियों को पढ कर मिलती है। टिप्पणियों की महत्ता को जितना एक नया चिट्ठाकार समझ सकता है उतना शायद कोई और नहीं। और इस दृष्टि से समीर जी का कार्य वक़ई काबिले तारीफ है।
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September 29th, 2007 at 4:58 pm
समीर जी के बारे में पहले हम भी यही जानते थे कि वे सी.ए और कवि हैं। बाद में धीरे-धीरे मालूम हुआ कि वे तो तकनीकी रुप से भी उच्च शिक्षित हैं। ये काफी कमाल की बात है कि तकनीक और वाणिज्य के विद्वान होने के बावजूद भी वे इतने अच्छे लेखक और संवेदनशील कवि हैं।
समीर जी के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए आभार।
September 30th, 2007 at 6:44 am
बहुत आभार आप सबने यह सम्मान दिया. सदैव आभारी रहूँगा.
September 30th, 2007 at 11:10 am
समीर पर चर्चा करते हुए अक्सर हम उनके व्यक्त रूप अर्थत टिप्पणी सम्राट वाले रूप से इतने अभिभूत हो जाते हैं कि एक अन्य गुण की कम चर्चा कर पाते हैं जो शायद उतना ही, मेरी नजर में तो और ज्यादा अहम है- वह है उनका लोकतांत्रिक होना और सूक्ष्म अवलोकक होना।
अपने विरोध के प्रति उनके मन में जो सममान है वह बहुत कम लोगों में दिखाई देता है। (कुछ में तो बिल्कुल ही नहीं दिखाई देता)
और भई श्रीश ये -तकनीक और वाणिज्य के विद्वान होने के बावजूद
का कया मतलब है भई- क्या इनका संवेदनाशीलता से कोई विरोध ठहरा क्या ?
October 2nd, 2007 at 11:37 am
आपके इस लेख ने हमें समीर जी के बारे में काफी कुछ बता दिया। शुक्रिया आपका।
October 2nd, 2007 at 3:43 pm
इस परिचय को छापने के लिए आभार। धन्यवाद
October 15th, 2007 at 11:07 am
समीर जी आपका ब्लॉग पढ़ कर बहुत अच्छा लग रहा है. कृपया इसी आप अपने विचारौं को हम तक पहुचाया करें