जोगलिखी एवं संजय बेंगाणी

Joglikhi [सफल चिट्ठाकारी परंपरा] मैं नयपुराने चिट्ठाकारों से अकसर कहता हूं कि चिट्ठाजगत में जनप्रिय होने एवं सफलता प्राप्त करने के लिये वे हफ्ते में कम से कम पांच बार लिखा करें. अकसर लोग जवाब देते हैं कि यह एक असंभव काम है.

असंभव इसलिये लगता है कि लोग 1000 से 2000 शब्दों के लेख लिखना चाहते है. चिट्ठाजगत पर यह एक बेवकूफी का काम है, क्योंकि इतने बडे लेख पढने का समय बहुत कम लोगों के पास होता है. अनुसंधान बताते हैं कि आदर्श चिट्ठा प्रविष्ठि 200 शब्द या उससे कम लम्बाई की होनी चाहिये. अधिकतम 300 शब्द. लेकिन लोग कहते हैं कि 200 या 300 शब्दों में कुछ भी नहीं किया जा सकता है. यह एक गलत सोच है.

sanjaybengani-48 एक अच्छा चिट्ठाकार 200 शब्दों में बहुत कुछ कर सकता है. अधिकतर सफल चिट्ठाकार ऐसा ही करते हैं. हिन्दी चिट्ठों में इसका एक ताजा उदाहरण है संजय बेंगाणी का जोगलिखी. कम से कम शब्दों में अधिकतम जानकारी. इनका लेख “क्यों-कैसे क्या, बस हो गया…” 200 शब्दों से कम में सटीक लेखन का एक ज्वलंत उदाहरण है.

यदि हम सब इस तरह लिखने लगें तो अधिकतम कुल 1500 शब्दों मे (5 छोटी प्रविष्ठियां, 2 कुछ और बढी प्रविष्ठियां) एक हफ्ते का काम चल जायगा, पाठको को सहूलियत होगी, एवं अधिक पाठक आकर्षित होंगे. एक चित्र और जोड दें तो सोने में सुहागा हो जायगा.

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10 Responses to “जोगलिखी एवं संजय बेंगाणी”

  1. पूनम Says:

    बहुत दुरूस्त सलाह .धन्यवाद

  2. Sanjeet Tripathi Says:

    अच्छी सलाह!!
    जोगलिखी में अक्सर अच्छे मुद्दों पर ही लिखा होता है!

  3. श्रीश शर्मा Says:

    आपसे सहमत हूँ, छोटे लेख अक्सर अधिक पढ़े जाते हैं। एक बड़े लेख को कड़ियों में लिखना बेहतर होता है। इस तरह पाठक लेख को रुचि से पढ़ते भी हैं और अगली कड़ी का इंतजार भी करते हैं।

    ये बात अलग है कि इसके बावजूद मैं खुद जब लिखना बैठता हूँ तो लेख लंबा होता जाता है। लेकिन मेरी तो ये मजबूरी भी है, मैं ज्यादातर टटोरियल लिखता हूँ, इसलिए लम्बा लिखना मजबूरी होती है।

  4. श्रीश शर्मा Says:

    और हाँ संजय भाई की तारीफ करनी पड़ेगी, वे कम शब्दों में ही अपनी बात का मर्म समझा देते हैं। उनकी टैगलाइन “कम शब्दों में खरी बात” एकदम सही है।

  5. Sanjeev Kumar Says:

    चिट्ठाकारो के लिए बहुत उपयोगी जानकारी है…
    धन्यवाद.

  6. Yatish Says:

    सही कह आपने, ज्यादा लम्बे लेख मे मेरी भी रुचि कम होती है,
    लेख मे कम शब्दो मे लिखना ही लेखन कला है

  7. सागर चन्द नाहर Says:

    संजय भाई कम शब्दों में खरी बात कह देते हैं।
    आप पहले छोटी छोटी टिप्प्णीयाँ देने के मामले में भी बहुत मशहूर थे, फिर एक दिन अचानक टिप्प्णीयाँ देना बंद कर दिया।

  8. समीर लाल Says:

    यही तो खासियत है संजय भाई की. इसीलिये तो हमारी पसंदीदा लेखकों की सूची में वो दर्ज हैं. पहले वो भी लंबा लिखने की कोशिश करते थे खास मुद्दों पर. :) फिर संभल गये. आभार आपका, आपने उनके विषय में लिखा.

  9. arvind mishra Says:

    शास्त्री जीं ,फिर कथा कहानी वाले क्या करें?

  10. संजय बेंगाणी Says:

    अपने बारे में जिक्र देख मानवसुलभ प्रसन्नता होती है, धन्यवाद आपका.

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