"टिप्पणीकार" नामक चिट्ठा एवं बदलता हिन्दी चिट्ठाजगत

Tippanikar002[सफल चिट्ठाकारी परंपरा] जब टिप्पणीकार नामक चिट्ठा अचानक हिन्दीजगत पर “उतरा” तो शायद किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. इसके दो कारण हैं. एक टिप्पणी के महत्व को अभी तक बहुत कम लोगों ने समझा है. दो, टिप्पणी जैसे तथाकथित गौण विषय पर एक “अनजान” व्यक्ति द्वारा चालू किये गये चिट्ठे को किसी ने अधिक महत्व नहीं दिया. लेकिन मेरी सोच इससे अलग थी.

मैं ने एक दम समझ लिया कि यह किसी बहुत ही अच्छी पकड वाले चिट्ठाकार की अनाम कृति है. दो, इनकी दो तीन प्रविष्ठियों को देखते ही मुझे लगा कि विषय पर इस चिट्ठाकार की असामान्य पकड है. अत: तुरंत ही सारथी पर टिप्पणी पर टिप्पणी-चिट्ठा ? नाम से एक सचित्र लेख मैं ने दिया था. दो हफ्ते में ही यह स्पष्ट हो गया कि यह चिट्ठा एक बौद्धिक स्तर पर चलाया जा रहा है. सटीक विश्लेषण, एवं सबसे महत्वपूर्ण टिप्पणियों को यह चिट्ठा पकड ही लेता है.

उस अनाम चिट्ठाकर को मेरा प्रणाम जिसने टिप्पणी जैसे तथाकथित गौण विषय से एक पूरी विधा का अविष्कार कर दिया. मेरा सुझाव है कि आप अनाम ही रहें, लेकिन अपने टिप्पणी-अवलोकन/अनुसंधान को जारी रखें. जो कुछ करना चाहता है उसके लिये अवसर ही अवसर है. आप उसके अच्छे उदाहरण है.

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5 Responses to “"टिप्पणीकार" नामक चिट्ठा एवं बदलता हिन्दी चिट्ठाजगत”

  1. रवीन्द्र प्रभात Says:

    आपके विचारों की ज़मीन वेहद ज़रखेज़ है, वधाई.

  2. रवि Says:

    टिप्पणीकार को मेरा भी प्रणाम.

  3. Sanjeet Tripathi Says:

    वाकई!!
    टिप्पणीकार जो भी सज्जन हों उनकी तारीफ़ करनी होगी कि वे चुनिंदा टिप्पणियों को तलाश कर पेश करते हैं।

  4. श्रीश शर्मा Says:

    टिप्पणीकार जी के प्रयास के हम भी प्रशंसक हैं। टिप्पणी चर्चा का यह नया प्रयोग अनूठा है।

  5. समीर लाल Says:

    टिप्पणीकार जी के प्रयास साधुवादी है.

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