आज शाम को अपने सर्वर का लॉग जांच रहा था तो एक नया जालस्थल दिखा. जाकर देखा तो पता चला कि “चिट्ठाजगत” चुपके से एक और नया एग्रीगेटर तय्यार कर रहा है. उनका हिन्दी एग्रीगेटर है www.Chitthajagat.in लेकिन नया एवं समांतर एग्रीगेटर है www.Chitthajagat.com
यह एग्रीगेटर “चिट्ठाजगत” की समग्री को पूरी तरह से एंग्लो हिन्दी में प्रस्तुत करता है. मेरी नजर में यह समांतर एग्रीगेटर हिन्दी जगत के लिये एक वरदान सिद्ध होगा क्योंकि हमारे संभावित पाठकों में से हमको सिर्फ 20% मिल रहे है. बाकी 80% तक पहुंचने के लिये यह जरूरी था.
हिन्दी बोलनेसमझने वालों की संख्या 60 से 70 करोड है लेकिन उनके बीच संगणक/जाल का प्रचार अभी हो ही रहा है. अत: मेरे मूल्यांकन के अनुसार हिन्दी चिट्ठाकारों को अपनी मेहनत के अनुपात में पाठक नहीं मिल रहे हैं. लेकिन जैसा मैं ने कई बार कहा है, पश्चिमी राज्यों में हिन्दीविद्यार्थीयों की संख्या बहुत अधिक है, संगणक/जाल का प्रसार भी बहुत अधिक है, अत: कम से कम चार गुने और पाठक वहां से आकर्षित किये जा सकते है. चिट्ठाजगत का यह एंग्लो-हिन्दी एग्रीगेटर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है.
दिल थाम कर बैठें. पता नही चिट्ठाजगत के कर्ता इस की घोषणा कब करें, लेकिन इसका असर एक महीने से कम में लगभग हर हिन्दी चिट्ठे पर नये पाठकों के रूप में दिखने लगेगा.
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September 30th, 2007 at 6:24 am
स्वागतम !!
September 30th, 2007 at 6:43 am
सुस्वागतम. अच्छा प्रयास है. दिल थामे हैं.
September 30th, 2007 at 8:57 am
yes to promote hind we have to use english and that is the best option
September 30th, 2007 at 9:02 am
बहुत ही सार्थक प्रयास। पीयूष जी की भोमियो ट्रांसलिट्रेशन सेवा की बदौलत भी हमें सर्च द्वारा काफी पाठक मिलते हैं। उम्मीद है चिट्ठाजगत का यह कदम निश्चय ही हिन्दीजगत की पाठक-सँख्या बढ़ाएगा।
September 30th, 2007 at 9:03 am
yes to promote hindi we have to use english and that is the best option. and i wish all a sucess tho leave the hypocracy and acccept this fact हिंदी को आगे लाए जाने के लिये इंग्लिश का बहिष्कार ना करके उसका उपयोग करें तो ज़्यादा बेहतर होगा
. its important that hindi is promoted to non hindi
September 30th, 2007 at 11:24 am
शुभकामनाएं.
September 30th, 2007 at 11:46 am
ज़रा वहाँ भी टहल आऊँ. फिर बताऊंगा.
September 30th, 2007 at 1:43 pm
शुभकामनाएँ
September 30th, 2007 at 1:49 pm
शुभकामनाए
September 30th, 2007 at 2:32 pm
यह निश्चित ही एक सराहनीय प्रयास है! इससे चिट्ठों के पाठक बढ़ेंगे!!
साधुवाद!
October 1st, 2007 at 7:38 pm
I like to all this. Thanks
October 2nd, 2007 at 11:34 am
तहे दिल से स्वागत है।
October 5th, 2007 at 2:40 pm
स्वागत है नये चिट्ठाजगत का..
October 7th, 2007 at 3:33 pm
आप का ब्लोग और आप का नाम “रोमनीकरन” के बाद कैसा लगेगा ? आईये नीचे दीं तस्वीरो मे देखे ।
http://maeriawaaj.blogspot.com/2007/10/blog-post_07.html
December 16th, 2009 at 1:55 pm
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