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एक अनोखा तोहफा चिट्ठाकारों के लिये
September 30, 2007 |
आज शाम को अपने सर्वर का लॉग जांच रहा था तो एक नया जालस्थल दिखा. जाकर देखा तो पता चला कि “चिट्ठाजगत” चुपके से एक और नया एग्रीगेटर तय्यार कर रहा है. उनका हिन्दी एग्रीगेटर है www.Chitthajagat.in लेकिन नया एवं समांतर एग्रीगेटर है www.Chitthajagat.com
यह एग्रीगेटर “चिट्ठाजगत” की समग्री को पूरी तरह से एंग्लो हिन्दी में प्रस्तुत करता है. मेरी नजर में यह समांतर एग्रीगेटर हिन्दी जगत के लिये एक वरदान सिद्ध होगा क्योंकि हमारे संभावित पाठकों में से हमको सिर्फ 20% मिल रहे है. बाकी 80% तक पहुंचने के लिये यह जरूरी था.
हिन्दी बोलनेसमझने वालों की संख्या 60 से 70 करोड है लेकिन उनके बीच संगणक/जाल का प्रचार अभी हो ही रहा है. अत: मेरे मूल्यांकन के अनुसार हिन्दी चिट्ठाकारों को अपनी मेहनत के अनुपात में पाठक नहीं मिल रहे हैं. लेकिन जैसा मैं ने कई बार कहा है, पश्चिमी राज्यों में हिन्दीविद्यार्थीयों की संख्या बहुत अधिक है, संगणक/जाल का प्रसार भी बहुत अधिक है, अत: कम से कम चार गुने और पाठक वहां से आकर्षित किये जा सकते है. चिट्ठाजगत का यह एंग्लो-हिन्दी एग्रीगेटर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है.
दिल थाम कर बैठें. पता नही चिट्ठाजगत के कर्ता इस की घोषणा कब करें, लेकिन इसका असर एक महीने से कम में लगभग हर हिन्दी चिट्ठे पर नये पाठकों के रूप में दिखने लगेगा.
चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: हिन्दी, हिन्दी-जगत, राजभाषा, विश्लेषण, सारथी, शास्त्री-फिलिप, hindi, hindi-world, Hindi-language,
Comments
14 Comments so far








स्वागतम !!
सुस्वागतम. अच्छा प्रयास है. दिल थामे हैं.
yes to promote hind we have to use english and that is the best option
बहुत ही सार्थक प्रयास। पीयूष जी की भोमियो ट्रांसलिट्रेशन सेवा की बदौलत भी हमें सर्च द्वारा काफी पाठक मिलते हैं। उम्मीद है चिट्ठाजगत का यह कदम निश्चय ही हिन्दीजगत की पाठक-सँख्या बढ़ाएगा।
yes to promote hindi we have to use english and that is the best option. and i wish all a sucess tho leave the hypocracy and acccept this fact हिंदी को आगे लाए जाने के लिये इंग्लिश का बहिष्कार ना करके उसका उपयोग करें तो ज़्यादा बेहतर होगा
. its important that hindi is promoted to non hindi
शुभकामनाएं.
ज़रा वहाँ भी टहल आऊँ. फिर बताऊंगा.
शुभकामनाएँ
शुभकामनाए
यह निश्चित ही एक सराहनीय प्रयास है! इससे चिट्ठों के पाठक बढ़ेंगे!!
साधुवाद!
I like to all this. Thanks
तहे दिल से स्वागत है।
स्वागत है नये चिट्ठाजगत का..
आप का ब्लोग और आप का नाम “रोमनीकरन” के बाद कैसा लगेगा ? आईये नीचे दीं तस्वीरो मे देखे ।
http://maeriawaaj.blogspot.com/2007/10/blog-post_07.html