Sep
30
घडी क्यों 5 मिनिट आगे रखें??
September 30, 2007 |
आज लगभग हर सफल व्यक्ति समय की पाबंदी का रोना रोता है. उनका सोचना है कि शायद समय की कमी के कारण वे पाबंद नहीं रह पाते है. लेकिन यह सोचना गलत है. जीवन में समय की पाबंदी विकसित करने के लिये कई तरीके है, जिन में से एक है अपनी घडी को पांच मिनिट आगे रखना. लाखों लोगों ने इसे अजमाया है एवं इससे उनको बहुत फायदा हुआ है. 1970 से, जब मुझे मेरी पहली घडी मिली थी, यह मेरी आदत है. अपनी घडी हमेशा पांच मिनिट आगे रखता हूं. इस पांच मिनिट ने हजारों बार मेरी मदद की है. आप भी आज से इसे अजमा कर देखें. इससे कोई फायदा न हुआ तो आप कुछ नहीं खोते. लेकिन यदि फायदा हुआ तो जीवन में आप एक अच्छी बात और प्राप्त कर लेंगे. आपने चिट्ठे पर विदेशी हिन्दी पाठकों के अनवरत प्रवाह प्राप्त करने के लिये उसे आज ही हिन्दी चिट्ठों की अंग्रेजी दिग्दर्शिका चिट्ठालोक पर पंजीकृत करें!
असल में समय का पाबंद न रहना आदत की बात है, अवसर की नहीं. लेकिन इस कारण सारे विश्व में हिन्दुस्तान का अपमान होता है. मैं ने कई देशों में लोगों को यह कहते सुना है कि भारतीय लोग समय के पाबंद नहीं होते.
चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: व्यक्तित्व-विकास, चुम्बकीय-व्यक्तित्व, आकर्षक-व्यक्तित्व, हिन्दी, विश्लेषण, सारथी, शास्त्री-फिलिप, personality-development, attractive-personality, magnetic-personality, hindi, Hindi-language,
Comments
9 Comments so far








जी कह तो आप बिल्कुल दुरुस्त रहे हैं…
जी सर, मेरी घड़ी भी ५ मिनट आगे ही रहती है पिछले कई वर्षों से और इसके फायदे तो सुनिश्चित हैं.
जी बहुत बार यह तरीका सुना है, आजमाया भी और सफल भी रहा। लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वहीं आ जाती है घड़ी।
आपने कहा तो फिर से करके देखते हैं।
ise to sabhi aajmate hain sir koi aur bhi tarika sujhayeye, aap to is kaam me expert hain
बचपन से ही पिता जी को देखा था रोजाना रेडियो और फ़िर बाद में टी वी से सुन-देखकर घड़ी मिलाते हुए। वही आदत अपनी भी पड़ी हुई है। सो पांच मिनट आगे कर भी लें तो दो चार दिन के बाद फ़िर से टी वी देखकर सही समय मिला ही डालेंगे!
घर की घडी तो मै 10 मिनट आगे रखता हू
शास्त्री जी, सचमुच यह तरीका बेजोड़ है। इससे हमेशा ही मदद मिलती है।
पूर्व निर्दारित समय पर कोई काम न कर पाने का कुसंस्कार भारत के लिये कलंक है; यह समय की बर्बादी का बहुत बड़ा कारण है। इससे मुक्त होने की हम सबको हमेशा कोशिस करनी चाहिये। इसके लिये सबसे सही तरीका है कि इसे माना ही न जाय, यानि जानबूझकर समय पर काम करने की जिद पाली जाय।
सर मैं तो १० मिनट आगे रखता था, मगर शायद मेरा आलस इस आदत से मज़बूत था
…
मेरा विचार कुछ अलग है, और मैं समय का बहुत ज्यादा पाबंद भी हूं..
मेरा विचार है की अपनी घड़ी को सही समय पर ही रहने दिया जाये और हमेशा समय के सथ ही चलने का प्रयास करना चाहिये.. ना आगे, ना पीछे..