आज लगभग हर सफल व्यक्ति समय की पाबंदी का रोना रोता है. उनका सोचना है कि शायद  समय की कमी के कारण वे पाबंद नहीं रह पाते है. लेकिन यह सोचना गलत है.

Rush असल में  समय का पाबंद न रहना आदत की बात है, अवसर की नहीं. लेकिन इस कारण सारे विश्व में हिन्दुस्तान का अपमान होता है. मैं ने कई देशों में लोगों को यह कहते सुना है कि भारतीय लोग समय के पाबंद नहीं होते.

जीवन में समय की पाबंदी विकसित करने के लिये कई तरीके है, जिन में से एक है अपनी घडी को पांच मिनिट आगे रखना. लाखों लोगों ने इसे अजमाया है एवं इससे उनको बहुत फायदा हुआ है. 1970 से, जब मुझे मेरी पहली घडी मिली थी, यह मेरी आदत है. अपनी घडी हमेशा पांच मिनिट आगे रखता हूं.  इस पांच मिनिट ने हजारों बार मेरी मदद की है. आप भी आज से इसे अजमा कर देखें. इससे कोई फायदा न हुआ तो आप कुछ नहीं खोते. लेकिन यदि फायदा हुआ तो जीवन में आप  एक अच्छी बात और प्राप्त कर लेंगे.

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Comments

9 Comments so far

  1. subodh rai on September 30, 2007 2:26 pm

    जी कह तो आप बिल्कुल दुरुस्त रहे हैं…

  2. समीर लाल on September 30, 2007 4:50 pm

    जी सर, मेरी घड़ी भी ५ मिनट आगे ही रहती है पिछले कई वर्षों से और इसके फायदे तो सुनिश्चित हैं.

  3. श्रीश शर्मा on September 30, 2007 4:59 pm

    जी बहुत बार यह तरीका सुना है, आजमाया भी और सफल भी रहा। लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वहीं आ जाती है घड़ी।

    आपने कहा तो फिर से करके देखते हैं।

  4. sajeev on September 30, 2007 6:31 pm

    ise to sabhi aajmate hain sir koi aur bhi tarika sujhayeye, aap to is kaam me expert hain

  5. Sanjeet Tripathi on September 30, 2007 8:41 pm

    बचपन से ही पिता जी को देखा था रोजाना रेडियो और फ़िर बाद में टी वी से सुन-देखकर घड़ी मिलाते हुए। वही आदत अपनी भी पड़ी हुई है। सो पांच मिनट आगे कर भी लें तो दो चार दिन के बाद फ़िर से टी वी देखकर सही समय मिला ही डालेंगे!

  6. Yatish on October 1, 2007 10:29 pm

    घर की घडी तो मै 10 मिनट आगे रखता हू

  7. Anunad Singh on October 2, 2007 10:37 am

    शास्त्री जी, सचमुच यह तरीका बेजोड़ है। इससे हमेशा ही मदद मिलती है।

    पूर्व निर्दारित समय पर कोई काम न कर पाने का कुसंस्कार भारत के लिये कलंक है; यह समय की बर्बादी का बहुत बड़ा कारण है। इससे मुक्त होने की हम सबको हमेशा कोशिस करनी चाहिये। इसके लिये सबसे सही तरीका है कि इसे माना ही न जाय, यानि जानबूझकर समय पर काम करने की जिद पाली जाय।

  8. amit sharma on October 4, 2007 12:57 pm

    सर मैं तो १० मिनट आगे रखता था, मगर शायद मेरा आलस इस आदत से मज़बूत था :(

  9. प्रशान्त प्रियदर्शी on October 5, 2007 2:44 pm

    मेरा विचार कुछ अलग है, और मैं समय का बहुत ज्यादा पाबंद भी हूं..
    मेरा विचार है की अपनी घड़ी को सही समय पर ही रहने दिया जाये और हमेशा समय के सथ ही चलने का प्रयास करना चाहिये.. ना आगे, ना पीछे..

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