क्या है कॉपीराईट अधिकार

पिछले दिनों मसिजीवी ने क्‍या मेरे चिट्ठे के रोमन रूप पर मेरा कापीराईट है ? शीर्षक से प्रतिलिपि अधिकार के बारे में कुछ जरूरी जानकारी चाही. उत्तर में टिप्पणिया ऐसे तूफान के समान आईं कि मसिजीवी को कहना पडा कि “मुझे यहॉं यह अनुरोध करना अत्‍यावश्‍यक जान पड़ता है कि स्‍पष्‍ट करूं कि एग्रीगेटरों के बीच किसी किस्‍म के विवाद को जन्‍म देना उद्देश्‍य नहीं है।”

मसिजीवी का उद्धेश्य सिर्फ तकनीकी एव कानूनी जानकारी प्राप्त करना थ, लेकिन इस बीच कई चिट्ठे रातोंरात कुकरमुत्तों के समान उग आये एवं एक गुरिल्ला युद्ध सा छेड दिया. इन कुकरमुत्तों की समस्या का मूल कारण किसी भी तरह के प्रतिलिपि अधिकार का हनन नहीं है बल्कि चिट्ठा जगत में आपसी द्वेष है. आम चिट्ठाकार को इन के चक्करों में पड कर अपना समय न बर्बाद करें बल्कि कापईराईट अधिकारों को ठीक से समझ लें.

कापीराईट या प्रतिलिपि अधिकार: रचनाधर्मिता मनुष्य का स्वभाव है एवं हजारों साल से लोग अपनी रचनाओं के आधार पर रोजीरोटी कमाते रहे हैं. लेकिन टेक्नॉलजी के विकास के साथ एक नई समस्या पैदा हुई. अब किसी भी कृति की नकल करना आसान हो गया एवं लोग इस सुविधा का नाजायज फायदा उठा कर अवैध कमाई करने लगे. इससे रचनाकारों की कमाई कम होने लगी एवं कम होती कमाई के कारण रचनात्मक कार्यों में (चित्रकला, मूर्तिकारी, लेखन, आदि) मे उनकी रुचि एवं समर्पण कम होने लगा. दूसरी ओर कई रचनाकारों ने कानून के दरवाजे खटखटाने शुरू कर दिये कि उनके पेशे की रक्षा की जाये.

इन कारणों से धीरे धीरे कानून ने रचनाकरों की सुरक्षा को कानूनी संरक्षण देना शुरु किया, एवं समय बीतने के साथ इस तरह के नियम कडे होने लगे. आज से पांच शताब्दी पहले छापेमशीन के अविष्कार के साथ नकल करने की प्रवृत्ति बहुत बढ गई क्योंकि बिना मेहनत दूसरे की रचना की हजारों प्रतियां बनाकर रचनाकर की जानकारी बिना हजारों प्रतियां बाजार में लाकर अवैध कमाई करना आसान हो गया. फोटोग्राफी, फॉटो-ऑफसेट, केसेट टेप, वीडियो टेप, सीडी, फॉटोकापी इत्यादि के ईजाद होने के साथ साथ इस तरह की नकल करना बहुत आसान हो गया. जिस चीज को एक रचनाकार सालों में बना पाता था (जैसे कि एक पुस्तक का लेखन) उसे चोरी से एक हफ्ते में छाप कर कर कमाई करने की प्रवृत्ति सारी दुनियां में आम होने लगी. इसके साथ साथ प्रजातंत्रिक देशों में रचनाकार की सुरक्षा के लिये कानून भी कडे होने लगे. कम्यूनिस्ट देशों में इस तरह के कानून कम थे, लेकिन बाजार की शक्तियों के आगे ये भी धीरे धीरे इस तरह की कानूनी संरक्षण देने लगे है.

आज लगभग सारी दुनियां में कॉपीराईट या प्रतिलिपि अधिकार के कानून बन चुके हैं. इनमें से एक है पेटेंट अधिकार जिसके अनुसार किसी व्यक्ति के अविष्कार पर एक निश्चित समय तक उसका हक बनता है. इस अवधि में सिर्फ उसकी कानूनी मंजूरी के साथ ही कोई व्यक्ति उस वस्तु का निर्माण एवं बिक्री कर सकता है. दूसरा है कॉपीराईट या प्रतिलिपि अधिकार. इन नियमों के अनुसार किसी भी रचनात्मक कृति (अविष्कार नहीं) पर एक निश्चित समय तक रचनाकार एवं उसके वारिसों का अधिकार रहता है. अधिकार के दौरान सिर्फ उनकी लिखित कानूनी मंजूरी द्वारा ही लोग उस रचना का उपयोग कर सकते हैं. मेरे अगले लेखों में इस विषय पर प्रकाश डाला जायगा.

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11 Responses to “क्या है कॉपीराईट अधिकार”

  1. kakesh Says:

    अच्छी जानकरी है. आगे के अंको की प्रतीक्षा है.

  2. masijeevi Says:

    चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए धन्‍यवाद।।

    ये कुकरमुत्‍ते की तरह नए ब्‍लॉगों के उग आने वाले प्रकरण वाला प्रकरण त्रासद होता जा रहा है। कहीं कोई पुराने ब्‍लॉगरों (यानि कौन…रवि रतलामी,आलोक, जीतू, अनूप, जगदीश, मैं…) पर आरोप लगा रहा है कि वे धोड़ाधड़ी से दूसरों की एडसेंस कमाई झटक रहे हैं तो कहीं कुछ और हो रहा है…
    कुछ व्‍यथित तो हैं ही हम।

  3. श्रीश शर्मा Says:

    रुचिकर और जानकारी पूर्ण, अगली कड़ी का इन्तजार है।

  4. संजय बेंगाणी Says:

    जारी रखें

  5. शब्दो नाता है तुमसे मेरा बहुत पुराना Says:

    sir
    कापी राईट का मुद्दा बहुत सीरियस है . और दुसरी बात रोमन ट्रांसलेशन बिना मूल लेखक कि आज्ञा के आज कानूनी रुप से सही हो क्योकि आज ब्लोग एक नया आयाम है । पर इंटरनेशनल ब्लॉगर एसोसिएशन इस पर कानून लेने के प्रावधान मे है। क्रियेटिव कोम्मोंस भी तभी तक वैध है जब तक आप ओरिजनल आर्टिकल से कमाई नहीं कर रहे है ।
    इसके अलावा इस सब से जुड़ा हुआ एक मुदा है Hindi भाषा और Hindi ब्लॉगर के प्रचार प्रसार का । आपने इंग्लिश मे directory बनाई है उसी प्रकार Hindi के प्रचार के लिये अगर रोमन का प्रयोग हो रहा है तो कोई नुकसान नहीं है पर अगर roman aggregator के बाद या Hindi aggregator के बाद ओरिजनल ब्लोग पर जाने की जरुरत ही ना रहे तो ये प्रचार नहीं है अपितु Hindi को कुछ ब्लोग्गेर्स तक सीमित करने का तरीका है ।
    Aggregator का रोल क्या है और क्या वह सच मे Hindi प्रसार मे सहायक इस पर भी कभी आप की कलम से लिखा पढने को मिले तो अवश्य सब लाभान्वित हो गे.

  6. Shastri JC Philip Says:

    @शब्दो नाता है तुमसे मेरा बहुत पुराना

    आपने जो प्रश्न उठाये हैं मैं उनका जवाब एक लेख में दूंगा, लेकिन आपको वह पढ कर खुशी नहीं होगी क्योंकि इस विषय पर आप ने जो कहा है वह विषय की पूर्ण जानकारी पर आधारित नहीं है — शास्त्री जे सी फिलिप

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है

  7. रवीन्द्र प्रभात Says:

    आदरणीय शास्त्री जे सी फिलिप जी,
    अच्छी जानकरी है, क्रम बनाए रखें.

  8. Sanjeev Kumar Says:

    achhi jaankari hai,
    thanx.

  9. आप का ब्लोग और आप का नाम "रोमनीकरन" के बाद कैसा लगेगा ? आईये नीचे दीं तस्वीरो मे देखे । Says:

    आप का ब्लोग और आप का नाम “रोमनीकरन” के बाद कैसा लगेगा ? आईये नीचे दीं तस्वीरो मे देखे ।
    http://maeriawaaj.blogspot.com/2007/10/blog-post_07.html

  10. Shastri JC Philip Says:

    @आप का ब्लोग और आप का नाम “रोमनीकरन” के बाद कैसा लगेगा? आईये नीचे दीं तस्वीरो मे देखे ।

    जनाब “आप का ब्लोग”, आप ने ऊपर जो कडी दी है उसे हम देख आये है. यदि आपको लगता है कि आपने बहुत बडा तीर मार लिया है तो आप गलतफहमी में है. मैं वहां अपना जवाब दे आया हूं जो निम्नलिखित है:

    जनाब Informations And Techniques आप अचानक चिट्ठाजगत में प्रगट होकर अपने विचार रख रहे है. शुक्रिया. उम्मीद है कि पाठकगण आपकी इस अनावश्यक भावुकता से प्रभावित नहीं होंगे.

    आपने बडा एहसान किया कि मेरे एक लेख “एक अनोखा तोहफा चिट्ठाकारों के लिये” के बहाने मेरे ही चिट्ठे को पकड लिया यहां प्रदर्शित करने के लिये. मेरा अनुमान है कि आपने तो यह मुझे बेवकूफ प्रदर्शित करने के लिये किया, लेकिन कान खोल कर सुन लीजिय कि आपके इस करम से मुझे यदि दस और पाठक मिलते हैं, प्रसिद्धि मिलती है, तो मैं तो आपकी नुक्ताचीनी के बाद भी फायदे में रहूंगा.

    मैं जानता हूं कि हिन्दी से रोमनीकरण अपने आप में परफेक्ट नहीं है. लेकिन यह दर्शा कर आपने कोई नया तीर नहीं मारा है. चिट्ठाजगत में जितने भी वरिष्ट चिट्ठाकरों ने अपने चिट्ठे को अन्य लिपियों में दिखाने की सुविधा दी है वे सब जानते हैं कि यह सुविधा परफेक्ट नहीं है. लेकिन वे यह जानते हैं कि खामियों के होते हुए भी यह सुविधा उनको नये पाठक दिलाती है एवं उनका कार्यक्षेत्र और अधिक विस्तृत हो जाता है.

    अत: मेरा सुझाव है कि अनावश्यक लेख लिख कर एक अनावश्यक वादविवाद खडा करके सबका समय जाया करने से अच्छा होगा कि आप चिट्ठाजगत में कुछ काम का कार्य करें.

    आपका उपशीर्षक है “Bloggers Are choosers”. क्या काम की बात कही है. क्या गजब का नारा है. अब इस नारे के अनुसार ही काम कीजिये. उदाहरण के लिये यदि आपका कोई चिट्ठा हो एवं आप उसे रोमन लिपि में नहीं दिखाना चाहते तो फौरन उसकी फीड हटा लीजिये. यदि फीड सारी दुनियां के लिये खोल रखी है तो उसके बाद “तू शौक से अपना काम कर, लेकिन कर मेरे हिसाब से” का नारा बंद करें.

    मुझे मालूम है कि सारथी हिन्दी चिट्ठे को चिट्ठाजगत रोमनीकृत करता है तो कई गलतियां होती है. लेकिन मुझे कोई शिकायत नहीं है क्योंकि मुझे से एक धेला भी लिये बिना वे मेरे चिट्ठे की फीड को दुनियां भर पहुंचाते है. वे तकनीकी जोडतोड करते रहते हैं जिसका फायदा बिना फूटी कौडी खरच किये मुझे मिल रहा है. मैं तो कहूंगा कि हे चिट्ठाजगत के कर्णधारों यदि आप मेरे चिट्ठे को ग्रीक, चीनी, रश्शियन, अरबी, फ्रेंच आदि लिपि में भी दिखा दें तो बडा आभार होगा. ऐसा करने से फ्री फंड में ही सारथी के हिट्स 120,000 प्रति महीने से 200,000 हिटस प्रति महीने हो जायगा. मुझे क्या नुक्सान है. बल्कि मैं तो कहूंगा कि हो सके तो चिट्ठाजगत.कॉम सारथी को नेत्रहीनों के लिये ब्रेल में एवं अन्य किस्म के विकलांगों के लिये दृ्श्य श्रव्य माध्यमों मे भी दिखाने का इंतजाम कर दे तो अच्छा होगा.

    किसी काम से मेरा भला हो रहा हो तो मैं क्यों फिकर करू कि उसका काम अभी परफेक्ट है या नहीं. मुझे पाठक चाहिये. कोई और मेहनत कर रहा है कि मेरी इच्छा पूरी हो. मै क्यों टोकाटाकी करूं. हां जहां तक कापीराईट की बात है, श्रीमान Informations And Techniques यदि आपको तकलीफ है तो अपनी फीड आज ही बंद कर दें. आप की फीड न मिलने के कारण कल ही चिट्ठाजगत.कॉम भट्टा बैठ जायगा !!

    — शास्त्री जे सी फिलिप

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है

  11. Sanjeet Tripathi Says:

    बढ़िया जानकारी दी आपने!

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