विण्डोज-98 में युनिकोड सक्षमता लाना

कई लोग अभी भी विण्डोज-98 का उपयोग कर रहे हैं. कई इंटरनेट केफे भी अपने पुराने यंत्रों पर यही कर रहे है. अत: कई हिन्दी चिट्ठाकारों को काफी कठिनाई होती है. इस विषय में एक बहु उपयोगी लेख आप निम्न कडी पर प्राप्त कर सकते है:

विण्डोज-98 में युनिकोड सक्षमता लाना

लगे हाथ उनका निम्न लेख भी देख लें:

डीटीपी व ग्राफिक्स सॉफ्टवेयरों में भारतीय युनिकोड अनुकूलता

हिन्दी के लिये जालगगत में अनुकूल वातावरण बनाने के लिये जरूरी है कि जालजगत में विचरण करने वाले सारे हिन्दीप्रेमी संगणकजीवी, इन “फंडों” को जान ले!!

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एग्रीगेटर कब तक

पिछले दिन एक चिट्ठामित्र ने मुझ से एक प्रश्न पूछा:  बढते चिट्ठों के कारण किसी भी लेख को किसी भी एग्रिगेटर के पहले पन्ने पर अधिक समय रहने का मौका नहीं मिलता है. अत: लेखकों को क्या करना चाहिये. उनको दिये गये जवाब में से कुछ वाक्य अन्य चिट्ठाकारों के चिंतन के लिये:

1. यह सही है कि आजकल हिन्दी चिट्ठाकरों को, खास कर नवागंतुकों को, पाठक दिलाने में एग्रीगेटर काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे है. इसे कोई भी व्यक्ति नकार नहीं सकता.  लेकिन लेखों की संख्या के बढने के कारण बहुत जल्दी ही स्थिति बद्ल जायेगी. अत: एग्रीगेटरों के निरीक्षण के आधार पर मैं कुछ बाते  और कहना चाहता हूं

2. यदि एक दिन की सारी पोस्टिंग एग्रीगेटर के एक पन्ने पर आ जाये  तो सबसे अच्छा है.

2. नारद की इच्छा हमेशा यह रही है कि ऐसा ही हो. बाकी एग्रीगेटरों की सोच अलग है.

3. अनावश्यक डुप्लिकेट पोस्टिंग पर नारद चेतावनी भी देता था (मुझे अनाजाने हुई एक गलती पर मिल चुकी है).  उनका कहना था  की प्रथम पन्ने पर आने का दूसरों का अवसर नष्ट न हो. यह एक बहुत अच्छी अच्छी सोच है.

4. लेकिन चाहे कोई भी एग्रीगेटर कुछ भी कर ले, अगले  24 महीनों  में (मध्य 2009 तक) एक घंटे में 60 से 120 हिन्दी पोस्टिंग होने लगेंगी. ऐसी स्थिति में कोई भी एग्रीगेटर  कुछ नहीं कर पायगा.

5. इन हिन्दी पोस्टिगों में से 60%  तक किसी के कोई खास काम के नहीं होंगे.  अत: अच्छे लेखकों को इस भीड बीच में अपनी अलग पहचान बनानी होगी.

6. सार यह कि आज जो थोडा बहुत अवसर मिल रहा है उसका उपयोग करके मुझे और आपको अपनी “दुकानदारी” इस तरह फैलानी होगी कि कल हमारे 60% “ग्राहक”  सीधे हमारे पास आयें. बाकी एग्रीगेटरों के द्वारा आयें

7. इस बीच हो सकता है कि शायद आज के एग्रीगेटर लेखों को अपने आप श्रेणियों में बांटने की कोशिश करेंगे.

8. शायद नये सेग्रीगेटर आ जायेंगे जो श्रेणीबद्द तरीके से चिट्ठाप्रविष्ठियों को प्रस्तुत करेंगे. इस मामले मे ज्ञानदत्त जी अपना प्रस्ताव भी रख चुके हैं: ब्लॉग सेग्रीगेटर – पेरेटो सिद्धांत लागू करने का जंतर चाहिये

9. इस दिशा में कालजई की छंटी प्रविष्ठियां एक अच्छे  प्रयास का आरंभ है.

9. लेकिन चिट्ठाकारों को इन बातों के इंतजार किये बिना ही अपने चिट्ठों पर स्थाई मूल्य के लेखों को प्रस्तुत करना चाहिये जिससे उनको एक बहुत बडा स्थाई पाठकवर्ग अपने आप मिल जाये.

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[वीडियो] ऑफलाईन यूनिकोड टंकण कैसे करें 001

[वीडियो] सारथी के कई मित्रों ने लिख कर पूछा है कि यूनिकोड में ऑफलाईन टंकण कैसे करें. उनका कहना है कि वे सारा काम ऑनलाईन करते हैं जिस कारण काफी पैसा बर्बाद होता है. निम्न वीडियो मे इसका उत्तर समझाया गया है. वीडियो के चालू हो जाने के बाद “पॉस” कुंजी को दबा कर पांच मिनिट लोड होने दीजिये एवं फिर वीडियो देखिये.

[coolplayer] यूनिकोड में ऑफलाईन टंकण कैसे करें 001 [/coolplayer]

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आइए, इनस्क्रिप्ट सीखें

आज इन्स्क्रिप्ट से सम्बंधित  रवि रतलामी का एक उपयोगी, सचित्र, एवं वृहद लेख मेरी नजर में आया जहा वे लिखते हैं:

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“अगर लिनक्स (या विंडोज़) के डिफ़ॉल्ट हिन्दी की मैप (इनस्क्रिप्ट) पर थोड़ी सी भी गहरी ज्ञान-चक्षु डालें तो हमें मजेदार बात पता चलेगी, जो कि इस हिन्दी कुंजी पट को बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल में, तथा इसे सीखने में न सिर्फ सहायक होगी बल्कि टच-टाइपिंग के रुप में महारत हासिल करने में भी हमें आसानी होगी. और इसी वजह से इसे डिफ़ॉल्ट रुप में रखा गया है (इनस्क्रिप्ट की एक और खासियत है कि यदि यह आपको याद हो जाए तो इस कुंजी पट से भारत की अन्य भाषाओं में भी आँख मूंदकर टाइप कर सकेंगे).”

यह लेख हर हिन्दीप्रेमी एवं हिन्दीप्रचारक के लिये बहुत उपयोगी सिद्ध होगा. इस सचित्र लेख को यहां पढे: आइए, इनस्क्रिप्ट सीखें

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