Posted September 14th, 2009 by Shastri JC Philip
सभी चिट्ठाकार बन्धुओं को हिन्दी दिवस की बधाई !
कुछ उत्साही बंधुओं ने हिन्दी दिवस तक हिन्दी विकिपीडिया को ५० हजार लेखों तक ले जाने का संकल्प लिया था जिसकी प्राप्ति केवल १२०० लेख दूर है। आज हिन्दी दिवस पर इससे अच्छा क्या हो सकता है कि हम सब अंधेरे का रोना रोने के बजाय हिन्दी विकि का दीपक जलायें – अंधेरा निश्चित रूप से गायब होगा।
हिन्दी विकि (hi.wikipedia.org/) पर आइये। किसी महापुरुष, लेखक, वैज्ञानिक, खिलाड़ी, राजनेता आदि की जीवनी लिखिये। किसी देश, प्रदेश, जिला, नगर, कस्बा के बारे में लिखिये। किसी नदी, नहर, पहाड़, झील के बारे में लिखिये। किसी सिद्धान्त, फेनामेनन, नियम, फार्मूला या प्रक्रम के बारे में लिखिये। इतिहास पर लिखिये, कृषि पर लिखिये, मनोविज्ञान, शिक्षा, दर्शन पर लिखिये। किसी उपयोगी सॉफ्टवेयर के बारे में लिखिये; किसी औजार, उपकरण , युक्ति, मशीन के बारे में लिखिये।
बूँद-बूंद से घड़ा भरता है। हम सभी मिल जांय तो बहुत बड़ा काम बहुत आसानी से हो जायेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी के योगदान से हिन्दी विकि आज ५० हजार लेखों की सीमा को पार कर जायेगा। किन्तु सबको इस कुंए में एक लोटा दूध डालना ही पड़ेगा। यह सोचना बहुत बड़ी गलती होगी कि "और सब तो दूध डालेंगे ही, मैं पानी ही डाल देता हूँ" !
–अनुनाद सिंह
Posted September 11th, 2009 by Shastri JC Philip
मित्रों,
हिन्दी विकिपिडिया को इसी हिन्दी दिवस तक पचास हजार लेखों वाला बनाने का संकल्प लिया गया है। कुछ मुट्ठी भर लोग ही इस समय इसमें लगे हैं जिनके अथक प्रयास से यह ४६,००० (छियालिस हजार) को पार कर गयी है।
आप सभी से निवेदन है कि हिन्दी विकि पर जरूर पधारें: हिन्दी विकि । इस पर किसी विषय के उपर लेख है या नहीं, देखें। आपको जिस विषय की समझ है उस पर चार-पाँच वाक्य लिखें। इस तरह के दो-चार लेखों का योगदान अवश्य करें। नेट पर हिन्दी की उन्नति के लिये किये जा रहे प्रयासों में हिन्दी विकि सर्वाधिक सार्थक प्रयास है। इससे हिन्दी के दूरगामी हित सधेंगे। –अनुनाद सिंह
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Posted March 14th, 2009 by Shastri JC Philip
अनुनाद जी के ईपत्र से प्रेरणा लेकर मैं ने विकिपीडिया के बारें में जो आलेख लिखे थे उसका काफी अच्छा परिणाम हुआ है और कई लोगों ने इस दिशा में कदम उठाना शुरू किया है. उदाहरण के लिये:
(रतन सिंह) आपका कल का लेख पढने के बाद विकिपीडिया पर तीन लेख लिखे है अभी विकिपीडिया को थोडा समझ रहा हूँ ,विकिपीडिया के लेख में फोटो लगाना अभी समझ नहीं आया हो सके तो बताने का कष्ट करे |
आज उन्होंने पूछा:
(रतन सिंह) प्रिय शास्त्री जी, इस Knol और हिंदी विकिपीडिया में क्या फर्क है दोनों में से कोन ज्यादा अच्छा है, क्या यहाँ लिखे विकिपीडिया पर भी प्रकाशित होते है ?
जब साथी चिट्ठाकार इस तरह दिलचस्पी लेने लगे हैं तो अनुनाद जी के मिशन (जिसके प्रति मैं भी समर्पित हूँ) के लिये यह एक अच्छा लक्षण है. आईये 2009 में विकिपीडिया पर कम से कम 50,000 हिन्दी लेख का लक्ष्य बना कर लिखने लगें.
इस बीच सवाल यह है कि विकिपीडिया और नॉल में कौन सा बेहतर है. मेरी समझ में इसका कोई उत्तर नहँ हैं क्योंकि दोनो की दिशा अलग है. किसी को घी के लड्डू अधिक पसंद हैं तो किसी को रसमलाई. मुझे दोनों ही पसंद है. ऐसा ही विकि और नॉल की बात है. दोनों का “स्वाद” अलग है, लेकिन दोनों ही गजब की चीजें हैं. अत: बेहतर की न सोचें.
दूसरा सवाल यह है कि दोनों में अतर क्या है. इसे निम्न बिंदुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है.
- नॉल एक वाणिज्यिक संस्थान (गूगल) की संपत्ति है, जबकि विकिपीडिया एक गैरव्यापारिक ट्रस्ट की संपत्ति है.
- नॉल आपको अपने आलेखों के साथ गूगल विज्ञापन लगाने की सुविधा देता है, लेकिन विकिपीडिया पूर्ण रुप से विज्ञापन-मुक्त है.
- नॉल में आप चाहें तो आपका लेख पूरी तरह आपके नियंत्रण में रखा जा सकता है, लेकिन विकिपीडिया में आपके द्वारा लिखे गये किसी भी लेख पर आपका किसी भी प्रकार का हक नहीं बनता है. उसे कोई भी व्यक्ति बदल सकता है.
- नॉल एवं विकिपीडिया विभिन्न कापीराईट अधिकारों के अंतर्गत कार्य करते हैं अत: इनके लेख एक दूसरे पर कापी नहीं किये जा सकते.
- नॉल अभी एक शिशु है जबकि विकिपीडिया एक परिपक्व व्यक्ति के समान है.
इनके आधार पर निम्न बाते कही जा सकती है:
- विकिपीडिया पर लिखना आसान है. हर तरह की सुविधा एवं मदद तुरंत मिल जाती है.
- विकिपीडिया पर पाठक अधिक मिल जाते हैं.
- नॉल पर लिखना कुछ कठिन है, लेकिन यदि आप कापीराईट अपने पास रखना चाहते हैं तो यह बेहतर है.
- लिखना जरूर शुरू कर दें. रतन सिंह ने तो इस साल 25 आलेख का मन बना लिया है, लेकिन यदि यह आप को कठिन लगे तो आप कम से कम दस का मन बना लें.
Posted March 13th, 2009 by Shastri JC Philip
मेरे कल के आलेख के बारें में मेरे एक युवा मित्र ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न टिप्पणी द्वारा प्रेषित किया है जो इस प्रकार है:
(पुनीत ओमर): हिंदी भाषा के किसी भी रूप में प्रसार के लिए आप सभी को मेरी शुभकामनाये.
परन्तु गूगल नौल और विकीपीडिया को हिंदी से लीप देने के पहले हम क्या इस बारे में भी सोच हैं की ये लोग होते कौन हैं विशुद्ध भारतीय भाषा में लिखे गए भारतीय ज्ञान को सरे विश्व में वितरित करने का हक़ रखने वाले? मैं ऑनलाइन सामग्री पर लागू होने वाले सभी तरह के लाइसेंस के बारे में जानता हूँ परन्तु फिर भी सहमत नहीं हूँ की भारतीय अपनी अकूत ज्ञान सम्पदा को अपनी ही आंचलिक भाषा में किसी विदेशी के हाथों सौंप दे. अगर हर साल १० लाख से अधिक कंप्यूटर अभियंता या जानकार बनाने वाली भारत की युनीवर्सिटीज के होनहार छात्र अगर एक स्वदेशी ज्ञान स्थल नहीं बना सके तो कोई बात नहीं, परन्तु इंटरनेट पर चाँद निशुल्क सुविधाओं और औजारों के लालच में आकर अपना सर्वस्व विशुद्ध व्यापारिक मानसिकता वाले विदेशियों के चरणों में न्योछावर करने का मैं विरोध करता हूँ.
शास्त्री जी आप इतिहास के बेहतर जानकार हैं. आपको अवश्य पता होगा की कब कब और कैसे विश्व के तमाम भागों में तमाम आचार संहिताओं और वाणिज्य नियमों को ताक पर रख कर सूचनाओं का दुरूपयोग किया गया है. विशेष कर अमेरिका द्वारा.. इसलिए अधिक लिखने की आवश्यकता नहीं.
कल इससे मिलतीजुलती बातें भाटिया जी ने अपनी टिप्पणी में और व्यक्तिगत पत्र में मुझे प्रेषित की थी. इससे यह स्पष्ट है कि कई चिट्ठाकार मामले के विभिन्न पहलुओं के बारे में गहन चिंतन कर रहे हैं.
पुनीत ने (और भाटिया जी) जो मुद्दे उठाये हैं उनका उत्तर निम्न है:
- विदेशी कंपनियां एवं सर्वर-मालिक कभी भी शर्तें बदल कर सब कुछ हथिया सकते हैं. इसके कई उदाहरण पिछले 15 सालों में देखे जा चुके हैं.
- जहां तक हो सके हिन्दुस्तान का अथाह ज्ञान हिन्दुस्तानियों के अधिकार के सर्वरों पर स्थित होना चाहिये.
- लेकिन यह तभी हो पायगा जब कुछ धनी हिन्दुस्तान-प्रेमी लोग इसके लिये आर्थिक रूप से समर्पित हो जायें.
- विकिपीडिया आजकल लगभग 100 से अधिक सर्वरों की सहायता से चल रही है. इसके लिये वे लोग् लाखों डॉलर हर साल एकत्रित करते हैं.
- यदि सिर्फ हिन्दी की बात कहें तो एक सर्वर से चालू करना होगा, और दस साल में यह कम से कम 100 सर्वर-स्थान घेरने लगेगा.
- इसके लिए आर्थिक रूप से समर्पित एक ट्रस्ट, तकनीकी जानकारी वाले समर्पित हिन्दी-प्रेमी, एवं लेखकों की जरूरत पडेगी.
- लेखक मिल जायेंगे, लेकिन पहली दो बातें उपलब्ध होने के बाद ही किसी दिशा में बढा जा सकता है.
- हिन्दुस्तान में कई ट्रस्ट हैं जिनके पास अथाह संपत्ति है. यदि कोई व्यक्ति इन से पहचान निकाल कर कुछ कर सके तो कार्य आरंभ हो सकता है.
अत: पुनीत, तुम ने बात सही कही है. लेकिन आगे बढने के लिये यह जरूरी है कि कुछ लोग कमर कस कर इसके लिये निकल पडे. सिर्फ कमर कसना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऐसे 5 से 10 लोगों को इस कार्य के लिये निकलना होगा जो पहले साल कम से कम दस लाख रुपया एकत्रित कर सकें जो बढ कर दस साल में एक करोड रुपया प्रति वर्ष तक पहुंच सके. विकिपीडिया और गूगल के पास ये आर्थिक साधन हैं इस लिए वे विजयी हो रहे हैं. यदि कुछ लोग इस तरह के साधन जुटा सकें तो एक हिन्दुस्तानी कार्य विजयी हो सकता है.
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