Posted February 28th, 2009 by Shastri JC Philip
जैसा मैं ने अपने पिछले आलेख नॉल: आईये हिन्दी के लिये कुछ करें — 01 में कहा था, नॉल गूगल द्वारा स्थापित मुक्त विश्वकोश है जिस पर कोई भी व्यक्ति किसी भी विषय पर लिख सकता है. एक ही विषय पर सौ लोग लिखते हैं तो भी गूगल को कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि उनकी सोच यह है कि जो आलेख सर्वोत्तम होगा अधिकतर लोग उसे ही पढेंगे.
गूगल की सोच यह भी है कि यदि एक विषय पर चार अच्छे लेखक चार अलग लेख लिखते हैं तो पाठकों को चार अलग तरीके से लिखे लेख मिल जायेंगे और हर प्रकार के पाठक को फायदा मिलेगा. अत: हर समर्पित हिन्दी-प्रेमी और भारत-प्रेमी को इस अवसर का फायदा उठाना चाहिये. नॉल की कुछ विशेषतायें:
- आप अपनी पसंद के किसी भी विषय पर किसी भी लम्बाई का आलेख छाप सकते हैं. (इतना ध्यान रहे कि यह चिट्ठा नहीं बल्कि एक विश्वकोश या ज्ञानकोश है).
- चूंकि यह एक ज्ञानकोश है, अत: आप चाहें तो एक पूरी पुस्तक, उपन्यास आदि भी इस पर छाप सकते हैं.
- आप चाहें तो आपके आलेख में संशोधन का अधिकार अपने पास सुरक्षित रख सक सकते हैं, जिससे कोई अन्य व्यक्ति सिर्फ आपकी अनुमति से ही आपके आलेख में परिवर्तन कर सकता है.
- ऊपर दी गई सुविधा मुझे बहुत पसंद है क्योंकि विकिपीडिया पर आपके लिखे को कोई भी व्यक्ति कभी भी बदल सकता है और (कम से कम अंग्रेजी विकिपीडिया पर) कई बार अच्छे और आधिकारिक लेख बेवकूफों द्वारा मिटा दिये जाते हैं, लेकिन आप कुछ नहीं कर पाते. (अंग्रेजी विकिपीडिया पर मेरा पिछले 6 सालों का अनुभव).
- नॉल पर आप अपना गूगल विज्ञापन प्रदर्शित कर सकते हैं जिसकी आय आपके खाते में जायगी.
नॉल एकदम नई सुविधा है और हिन्दी मे नॉल पर अभी तक कोई खास काम नहीं हुआ है. मेरा सुझाव है कि मित्रगण knol.google.com पर जाकर पंजीकरण कर लें और उसके बाद लिखना शूरू कर दें. ड्राफ्ट में सहेजते जायें. जब आपका आलेख पूरी तरह से तय्यार हो जाये तो इसे छाप दें. छापने के बाद यदि आप इसका जालपता मुझे भेज दें तो मैं इसकी सूचना Hindi Knol Coordination Project (Portal) पर छाप दूंगा जिससे कि हम सब को आपस में पता लगता रहे कि कौन किस विषय पर कार्य कर रहा है.
यदि मित्रगण सीधे मुझ से संपर्क करें तो मैं आपकी मदद कर सकता हूँ जिससे कि आप प्रभावी नॉल लिख सकें. मैं ने अंग्रेजी में 55 नॉल प्रकाशित किये हैं, और उनके आधार पर यह बता सकता हूँ कि हिन्दी में किन किन बातों का ख्याल रखा जाये कि आपका नॉल प्रभावी हो.
जो हिन्दी चिट्ठाकार नॉल पर हिन्दी की सेवा करना चाहते हैं उन से निवेदन है कि वे हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये स्थापित मेरे ईग्रूप पाणिनी से आज ही जुड जायें. इसके लिये HindiKnolWriters-subscribe@googlegroups.com पर एक खाली ईपत्र भेज दीजिये, आपका नाम अपने आप जुड जायगा. नॉल पर प्रभावी तरीके से लिखने के लिये हर तरह का मर्गदर्शन मार्च 2 से इस ग्रूप में आपको मिलने लगेगा!!
Posted February 27th, 2009 by Shastri JC Philip
हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है. इसके लिये हमें आजीवन हिन्दी के प्रचार के लिये अपने आप को समर्पित करना होगा. ऐसे समर्पित व्यक्तियों को निम्न में से एक या अधिक कार्य अपनी सामर्थ एवं तकनीकी जानकारी के अनुसार करना चाहिये:
- गैरहिन्दीभाषियों को सरल एवं ललित हिन्दी सिखायें.
- हिन्दीभाषियों को हर कार्य हिन्दी में करने के लिये प्रोत्साहित करें.
- ऊपर लिखी बातों की सफलता के लिये ललित एवं सरल हिन्दी शब्दावली का प्रचार करें.
- जालजगत को हर विषय पर सरल एवं ललित हिन्दी में लिखे आधिकारिक लेखों से भर दें.
बिंदु 4 में दी बात को आज लोग कई तरह से कर रहे हैं
1. अपने चिट्ठे या जालस्थल को आधिकारिक आलेखों से भरने के द्वारा. इसके सबसे अच्छे उदाहरण हैं अजित वडनेकर का भाषा-चिट्ठा एवं डॉ अरविंद के प्रोत्साहन के कारण चलने वाले तमाम वैज्ञानिक चिट्ठे.
2. इसके दो अनौपचारिक उदाहरण है ताऊजी का चिट्ठा एवं भाटिया जी का चिट्ठा जहां विविध विषयों पर पहेलियों द्वारा रोचक तरीके से ज्ञान-वितरण होता है. और भी कई चिट्ठे इनका अनुकरण कर हिन्दी में ज्ञानवितरण का अनुकरणीय कार्य कर रहे हैं.
3. एक औपचारिक लेकिन बेहद प्रभावी तरीका है विकीपीडिया जैसे जगजाने जालस्थलों (विश्वकोशों) पर हिन्दी में जानकारीपरक आलेख लिखना.
हिन्दी चिट्ठाजगत के कई जानेमाने चिट्ठाकार काफी समय से हिन्दी विकीपीडिया पर बडे ही समर्पण के साथ एक हिन्दी विश्वकोश का निर्माण कर रहे हैं. विकीपीडिया की तरह एक और सुविधा अब उपलब्ध हो गई है जिसका नाम है “नॉल”. यह गूगल का एक अभियान है और आप इसे http://knol.google.com/ पर देख सकते हैं.
आने वाले कई आलेखों में मैं क्रमबद्ध तरीके से बताऊगा कि आप किस तरह हिन्दी के प्रचारप्रसार के लिये नॉल का उपयोग कर सकते हैं. फिलहाल यदि आप इस चिट्ठे पर जाकर अपना नाम पंजीकृत करवा ले तो मेरे अगले आलेख को समझने में सुविधा हो जायगी.
यदि मित्रगण सीधे मुझ से संपर्क करें तो मैं आपकी मदद कर सकता हूँ जिससे कि आप प्रभावी नॉल लिख सकें. मैं ने अंग्रेजी में 55 नॉल प्रकाशित किये हैं, और उनके आधार पर यह बता सकता हूँ कि हिन्दी में किन किन बातों का ख्याल रखा जाये कि आपका नॉल प्रभावी हो.
जो हिन्दी चिट्ठाकार नॉल पर हिन्दी की सेवा करना चाहते हैं उन से निवेदन है कि वे हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये स्थापित मेरे ईग्रूप “हिन्दी नॉल लेखक संघ” से आज ही जुड जायें. इसके लिये HindiKnolWriters-subscribe@googlegroups.com पर एक खाली ईपत्र भेज दीजिये, आपका नाम अपने आप जुड जायगा. नॉल पर प्रभावी तरीके से लिखने के लिये हर तरह का मर्गदर्शन मार्च 2 से इस ग्रूप में आपको मिलने लगेगा!!
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Posted November 27th, 2008 by Shastri JC Philip
अनुनाद जी का चिट्ठा हर हिन्दी एवं हिन्दुस्तान प्रेमी के लिये एक नियमित पडाव होना चाहिये. उनके चिट्ठे से तीन हीरे मैं आपके समक्ष रखना चाहता हूँ. उम्मीद है कि आप उनके चिट्ठे को बुकमार्क कर लेंगे.
हीरा 1: हिन्दी सशक्तिकरण के सरल सूत्र हिन्दी दिवस पर हिन्दी के बारे में लोगों के विचार पढ़कर लोगों की हिन्दी से घनिष्ट सम्बन्ध साफ-साफ़ दिख रहा है। मैं भी इस अवसर पर कुछ कहना चाहूँगा: इतिहास से सीखा है की उतार-चढाव होते रहते हैं ; आशा रखो, कर्मरत रहो, धीरज रखो । स्थिति बदल कर रहेगी; भारत हिन्दीमय होकर रहेगा। (शेष लेख पढें …)
हीरा 2: हिन्दी और स्वभाषा पर विचारोत्तेजक लेख भारत के मैकाले-पूजकों ने हिन्दी , राजभाषा , मातृभाषा आदि के बारे में तरह-तरह की भ्रांतियां फैला दी हैं . इससे आम जनता के मानस पटल पर इनके महत्व की विराट छवि बनने ही नहीं पाती। इसी का परिणाम है कि राजनैतिक रूप से ‘स्वतंत्र’ होने के बावजूद भी किसी को यह स्पष्ट ही नहीं है कि स्व-तंत्र होता क्या है और इसका क्या महत्व है? इसस भ्रान्ति से उपजे भटकाव के सहारे भारत में गुलाम मानसिकता से ग्रस्त एक अत्यंत छोटा सा समूह अपने साथ अन्य लोगों को भी गुलाम ने रहने को विवश किए हुए है। (शेष लेख पढें …)
हीरा 3: अंतरजाल से बिना जुड़े ही विकिपीडिया की सुविधा जी हाँ, विकिपीडिया के अपार ज्ञान के भंडार से अब आफलाइन रहकर भी ज्ञानार्जन किया जा सकता है। भारत में इंटरनेट की स्थिति को देखते हुए भारत के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।
केवल अंग्रेजी ही नहीं बल्कि सभी भाषाओं की विकिपीडिया और उसके बंधु प्रकल्पों का सारा ज्ञान विविध प्रारूपों मेंउपलब्ध है जिसे नि:शुल्क उतारकर उपयोग किया जा सकता है। (शेष लेख पढें …)
अनुनाद जी ने कई बार अपने चिट्ठे के लेखों के पुनर्प्रकाशन की अनुमति सारथी को दी है, लेकिन आज मेरा लक्ष्य आपको उनके चिट्ठे पर ले जाना है अत: आपको सिर्फ हीरों की झलक मात्र दिखा दी है. अब यदि उसे हासिल नहीं करते एवं उनके चिट्ठे को बुकमार्क नहीं करते तो नुकसान आप का ही है!!
यदि आपको टिप्पणी पट न दिखे तो आलेख के शीर्षक पर क्लिक करें, लेख के नीचे टिप्पणी-पट दिख जायगा!!
Article Bank | Net Income | About India । Indian Coins | Physics Made Simple
Posted July 17th, 2007 by Shastri JC Philip
सारथी के अगले एक लेख में हम हिन्दी भाषा से सम्बंधित हर तरह के औजार, शब्दकोश, खोज यंत्र, लिपि परिवर्तक, फीड एग्रीगेटर, टंकण सहाई आदि की एक वृहद सूची देना चाहते हैं. हिन्दी से स्नेह करने वाले एवं हिन्दी के प्रचारप्रसार में रुचि रखने वाले हर पाठक से बिनती है कि इस सूची में जोडने के लिये जो औजार एवं जालस्थल हैं उनके बारे मे सूचना या तो टिप्पणी में जोड दें या webmaster@sarathi.info को प्रेषित कर दें. यदि आपको किसी औजार के बारे में सूचना है लेकिन यदि आप उसका जालस्थल नहीं जानते तो नाम भेज दीजिये, जालस्थल हम ढूंढ लेंगे.
सारथी की मदद कीजिये. हमारी आपसी मदद से ही जालगगत में हिन्दी पुष्ट होगी. हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.