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	<title>सारथी &#187; हिन्दी</title>
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	<link>http://sarathi.info</link>
	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>हिन्दी दिवस &#8212; एक विशेष अनुरोध !!</title>
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		<pubDate>Mon, 14 Sep 2009 10:24:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[सभी चिट्ठाकार बन्धुओं को हिन्दी दिवस की बधाई ! कुछ उत्साही बंधुओं ने हिन्दी दिवस तक हिन्दी विकिपीडिया को ५० हजार लेखों तक ले जाने का संकल्प लिया था&#160; जिसकी प्राप्ति केवल १२०० लेख दूर है।&#160; आज हिन्दी दिवस पर इससे अच्छा क्या हो सकता है कि हम सब अंधेरे का रोना रोने के बजाय&#160; [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify">सभी चिट्ठाकार बन्धुओं को हिन्दी दिवस की बधाई ! </p>
<p align="justify">कुछ उत्साही बंधुओं ने हिन्दी दिवस तक हिन्दी विकिपीडिया को ५० हजार लेखों तक ले जाने का संकल्प लिया था&#160; जिसकी प्राप्ति केवल १२०० लेख दूर है।&#160; आज हिन्दी दिवस पर इससे अच्छा क्या हो सकता है कि हम सब अंधेरे का रोना रोने के बजाय&#160; हिन्दी विकि का&#160; दीपक जलायें &#8211; अंधेरा निश्चित रूप से गायब होगा। </p>
<p align="justify">हिन्दी विकि (hi.wikipedia.org/) पर&#160; आइये। किसी महापुरुष, लेखक, वैज्ञानिक, खिलाड़ी, राजनेता आदि की जीवनी लिखिये। किसी देश, प्रदेश, जिला, नगर, कस्बा के बारे में लिखिये।&#160;&#160; किसी नदी, नहर, पहाड़, झील के बारे में लिखिये।&#160; किसी सिद्धान्त, फेनामेनन, नियम, फार्मूला या प्रक्रम के बारे में लिखिये। इतिहास पर लिखिये, कृषि पर लिखिये, मनोविज्ञान, शिक्षा, दर्शन पर लिखिये। किसी उपयोगी सॉफ्टवेयर के बारे में लिखिये; किसी औजार, उपकरण , युक्ति, मशीन के&#160; बारे में लिखिये। </p>
<p align="justify">बूँद-बूंद से घड़ा भरता है।&#160; हम सभी मिल जांय तो&#160; बहुत बड़ा काम बहुत आसानी से हो जायेगा।&#160; मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी के योगदान से हिन्दी विकि आज ५० हजार लेखों की सीमा को पार कर जायेगा।&#160; किन्तु&#160; सबको इस कुंए&#160; में एक लोटा दूध डालना ही पड़ेगा। यह सोचना बहुत बड़ी गलती होगी कि&#160; &quot;और सब तो दूध डालेंगे ही, मैं पानी ही डाल देता हूँ&quot; ! </p>
<p align="justify">&#8211;अनुनाद सिंह</p>
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		<title>हिन्दी विकिपिडिया</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2495</link>
		<comments>http://sarathi.info/archives/2495#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2009 03:57:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[मित्रों, हिन्दी विकिपिडिया&#160; को&#160; इसी हिन्दी दिवस तक&#160; पचास हजार&#160; लेखों&#160; वाला बनाने&#160; का संकल्प लिया गया है।&#160; कुछ मुट्ठी भर लोग ही इस समय इसमें लगे हैं&#160; जिनके अथक प्रयास&#160; से यह ४६,००० (छियालिस हजार) को पार कर गयी है। आप सभी से निवेदन है कि हिन्दी विकि पर जरूर पधारें: हिन्दी विकि ।&#160; [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify">मित्रों, </p>
<p align="justify">हिन्दी विकिपिडिया&#160; को&#160; इसी हिन्दी दिवस तक&#160; पचास हजार&#160; लेखों&#160; वाला बनाने&#160; का संकल्प लिया गया है।&#160; कुछ मुट्ठी भर लोग ही इस समय इसमें लगे हैं&#160; जिनके अथक प्रयास&#160; से यह ४६,००० (छियालिस हजार) को पार कर गयी है। </p>
<p align="justify">आप सभी से निवेदन है कि हिन्दी विकि पर जरूर पधारें: <a href="http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0" target="_blank">हिन्दी विकि</a> ।&#160; इस पर किसी विषय&#160; के उपर लेख है या नहीं, देखें। आपको&#160; जिस विषय की समझ है उस पर चार-पाँच वाक्य&#160; लिखें। इस तरह के दो-चार लेखों का योगदान अवश्य करें। नेट पर हिन्दी&#160; की उन्नति के लिये किये जा रहे प्रयासों में&#160; हिन्दी विकि&#160; सर्वाधिक&#160; सार्थक प्रयास है। इससे हिन्दी के दूरगामी हित सधेंगे। &#8211;अनुनाद सिंह</p>
<p align="justify">&#160;</p>
<p align="center"><a href="http://www.articlepedia.us"><font size="1">Article Bank</font></a><font size="1"> | </font><a href="http://guide4income.com"><font size="1">Net Income</font></a><font size="1"> | </font><a href="http://www.IndianTouristPlaces.info"><font size="1">About India</font></a><font size="1"> । </font><a href="http://www.CoinsEncyclopedia.org"><font size="1">Indian Coins</font></a><font size="1"> | </font><a href="http://www.physics4u.info"><font size="1">Physics Made Simple</font></a><font size="1"> | </font><a href="http://india.sarathi.info/"><font size="1">India</font></a></p>
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		<title>रतन सिंह और विकिपीडिया !!</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2009</link>
		<comments>http://sarathi.info/archives/2009#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 13 Mar 2009 23:30:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[अनुनाद जी के ईपत्र से प्रेरणा लेकर मैं ने विकिपीडिया के बारें में जो आलेख लिखे थे उसका काफी अच्छा परिणाम हुआ है और कई लोगों ने इस दिशा में कदम उठाना शुरू किया है. उदाहरण के लिये: (रतन सिंह) आपका कल का लेख पढने के बाद विकिपीडिया पर तीन लेख लिखे है अभी विकिपीडिया [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>अनुनाद जी के ईपत्र से प्रेरणा लेकर मैं ने विकिपीडिया के बारें में जो आलेख लिखे थे उसका काफी अच्छा परिणाम हुआ है और कई लोगों ने इस दिशा में कदम उठाना शुरू किया है. उदाहरण के लिये:</p>
<blockquote><p>(<a href="http://gyandarpan.com" target="_blank">रतन सिंह</a>) आपका कल का लेख पढने के बाद विकिपीडिया पर तीन लेख लिखे है अभी विकिपीडिया को थोडा समझ रहा हूँ ,विकिपीडिया के लेख में फोटो लगाना अभी समझ नहीं आया हो सके तो बताने का कष्ट करे |</p>
</blockquote>
<p>आज उन्होंने पूछा:</p>
<blockquote><p>(<a href="http://gyandarpan.com" target="_blank">रतन सिंह</a>) प्रिय शास्त्री जी, इस Knol और हिंदी विकिपीडिया में क्या फर्क है दोनों में से कोन ज्यादा अच्छा है, क्या यहाँ लिखे विकिपीडिया पर भी प्रकाशित होते है ?</p>
</blockquote>
<p>जब साथी चिट्ठाकार इस तरह दिलचस्पी लेने लगे हैं तो अनुनाद जी के मिशन (जिसके प्रति मैं भी समर्पित हूँ) के लिये यह एक अच्छा लक्षण है. आईये 2009 में विकिपीडिया पर कम से कम 50,000 हिन्दी लेख का लक्ष्य बना कर लिखने लगें.</p>
<p>इस बीच सवाल यह है कि विकिपीडिया और नॉल में कौन सा बेहतर है. मेरी समझ में इसका कोई उत्तर नहँ हैं क्योंकि दोनो की दिशा अलग है. किसी को घी के लड्डू अधिक पसंद हैं तो किसी को रसमलाई. मुझे दोनों ही पसंद है. ऐसा ही विकि और नॉल की बात है. दोनों का “स्वाद” अलग है, लेकिन दोनों ही गजब की चीजें हैं. अत: बेहतर की न सोचें.</p>
<p>दूसरा सवाल यह है कि दोनों में अतर क्या है. इसे निम्न बिंदुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है.</p>
<ul>
<li>नॉल एक वाणिज्यिक संस्थान (गूगल)&#160; की संपत्ति है, जबकि विकिपीडिया एक गैरव्यापारिक ट्रस्ट की संपत्ति है. </li>
<li>नॉल आपको अपने आलेखों के साथ गूगल विज्ञापन लगाने की सुविधा देता है, लेकिन विकिपीडिया पूर्ण रुप से विज्ञापन-मुक्त है.</li>
<li>नॉल में आप चाहें तो आपका लेख पूरी तरह आपके नियंत्रण में रखा जा सकता है, लेकिन विकिपीडिया में आपके द्वारा लिखे गये किसी भी लेख पर आपका किसी भी प्रकार का हक नहीं बनता है. उसे कोई भी व्यक्ति बदल सकता है.</li>
<li>नॉल एवं विकिपीडिया विभिन्न कापीराईट अधिकारों के अंतर्गत कार्य करते हैं अत: इनके लेख एक दूसरे पर कापी नहीं किये जा सकते.</li>
<li>नॉल अभी एक शिशु है जबकि विकिपीडिया एक परिपक्व व्यक्ति के समान है.</li>
</ul>
<p>इनके आधार पर निम्न बाते कही जा सकती है:</p>
<ul>
<li>विकिपीडिया पर लिखना आसान है. हर तरह की सुविधा एवं मदद तुरंत मिल जाती है.</li>
<li>विकिपीडिया पर पाठक अधिक मिल जाते हैं.</li>
<li>नॉल पर लिखना कुछ कठिन है, लेकिन यदि आप कापीराईट अपने पास रखना चाहते हैं तो यह बेहतर है. </li>
<li>लिखना जरूर शुरू कर दें. रतन सिंह ने तो इस साल 25 आलेख का मन बना लिया है, लेकिन यदि यह आप को कठिन लगे तो आप कम से कम दस का मन बना लें.</li>
</ul>
<p>&#160;</p>
<ul>
<li><a href="http://sarathi.info/archives/1999">यह विकिपीडिया क्या बला है??</a> </li>
<li><a href="http://sarathi.info/archives/2005">नॉल, विकीपीडिया — सब गडबड है!!</a></li>
<li><a href="http://sarathi.info/archives/2007">पुनीत ओमर — एक महत्वपूर्ण प्रश्न !!</a></li>
</ul>
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		<item>
		<title>पुनीत ओमर &#8212; एक महत्वपूर्ण प्रश्न !!</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2007</link>
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		<pubDate>Thu, 12 Mar 2009 23:30:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[मेरे कल के आलेख&#160; के बारें में मेरे एक युवा मित्र ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न टिप्पणी द्वारा प्रेषित किया है जो इस प्रकार है: (पुनीत ओमर): हिंदी भाषा के किसी भी रूप में प्रसार के लिए आप सभी को मेरी शुभकामनाये. परन्तु गूगल नौल और विकीपीडिया को हिंदी से लीप देने के पहले हम क्या [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे कल के आलेख&#160; के बारें में मेरे एक युवा मित्र ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न टिप्पणी द्वारा प्रेषित किया है जो इस प्रकार है:</p>
<blockquote><p>(<a href="http://www.punitomar.blogspot.com" target="_blank">पुनीत ओमर</a>): हिंदी भाषा के किसी भी रूप में प्रसार के लिए आप सभी को मेरी शुभकामनाये. </p>
<p>परन्तु गूगल नौल और विकीपीडिया को हिंदी से लीप देने के पहले हम क्या इस बारे में भी सोच हैं की ये लोग होते कौन हैं विशुद्ध भारतीय भाषा में लिखे गए भारतीय ज्ञान को सरे विश्व में वितरित करने का हक़ रखने वाले? मैं ऑनलाइन सामग्री पर लागू होने वाले सभी तरह के लाइसेंस के बारे में जानता हूँ परन्तु फिर भी सहमत नहीं हूँ की भारतीय अपनी अकूत ज्ञान सम्पदा को अपनी ही आंचलिक भाषा में किसी विदेशी के हाथों सौंप दे. अगर हर साल १० लाख से अधिक कंप्यूटर अभियंता या जानकार बनाने वाली भारत की युनीवर्सिटीज के होनहार छात्र अगर एक स्वदेशी ज्ञान स्थल नहीं बना सके तो कोई बात नहीं, परन्तु इंटरनेट पर चाँद निशुल्क सुविधाओं और औजारों के लालच में आकर अपना सर्वस्व विशुद्ध व्यापारिक मानसिकता वाले विदेशियों के चरणों में न्योछावर करने का मैं विरोध करता हूँ.</p>
</blockquote>
<blockquote><p>शास्त्री जी आप इतिहास के बेहतर जानकार हैं. आपको अवश्य पता होगा की कब कब और कैसे विश्व के तमाम भागों में तमाम आचार संहिताओं और वाणिज्य नियमों को ताक पर रख कर&#160; सूचनाओं का दुरूपयोग किया गया है. विशेष कर अमेरिका द्वारा..&#160; इसलिए अधिक लिखने की आवश्यकता नहीं.</p>
</blockquote>
<p>कल इससे मिलतीजुलती बातें भाटिया जी ने अपनी टिप्पणी में और व्यक्तिगत पत्र में मुझे प्रेषित की थी. इससे यह स्पष्ट है कि कई चिट्ठाकार मामले के विभिन्न पहलुओं के बारे में गहन चिंतन कर रहे हैं. </p>
<p>पुनीत ने (और भाटिया जी) जो मुद्दे उठाये हैं उनका उत्तर निम्न है:</p>
<ul>
<li>विदेशी कंपनियां एवं सर्वर-मालिक कभी भी शर्तें बदल कर सब कुछ हथिया सकते हैं. इसके कई उदाहरण पिछले 15 सालों में देखे जा चुके हैं. </li>
<li>जहां तक हो सके हिन्दुस्तान का अथाह ज्ञान हिन्दुस्तानियों के अधिकार के सर्वरों पर स्थित होना चाहिये. </li>
<li>लेकिन यह तभी हो पायगा जब कुछ धनी हिन्दुस्तान-प्रेमी लोग इसके लिये आर्थिक रूप से समर्पित हो जायें. </li>
<li>विकिपीडिया आजकल लगभग 100 से अधिक सर्वरों की सहायता से चल रही है. इसके लिये वे लोग् लाखों डॉलर हर साल एकत्रित करते हैं. </li>
<li>यदि सिर्फ हिन्दी की बात कहें तो एक सर्वर से चालू करना होगा, और दस साल में यह कम से कम 100 सर्वर-स्थान घेरने लगेगा. </li>
<li>इसके लिए आर्थिक रूप से समर्पित एक ट्रस्ट, तकनीकी जानकारी वाले समर्पित हिन्दी-प्रेमी, एवं लेखकों की जरूरत पडेगी. </li>
<li>लेखक मिल जायेंगे, लेकिन पहली दो बातें उपलब्ध होने के बाद ही किसी दिशा में बढा जा सकता है. </li>
<li>हिन्दुस्तान में कई ट्रस्ट हैं जिनके पास अथाह संपत्ति है. यदि कोई व्यक्ति इन से पहचान निकाल कर कुछ कर सके तो कार्य आरंभ हो सकता है. </li>
</ul>
<p>अत: पुनीत, तुम ने बात सही कही है. लेकिन आगे बढने के लिये यह जरूरी है कि कुछ लोग कमर कस कर इसके लिये निकल पडे. सिर्फ कमर कसना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऐसे 5 से 10 लोगों को इस कार्य के लिये निकलना होगा जो पहले साल कम से कम दस लाख रुपया एकत्रित कर सकें जो बढ कर दस साल में एक करोड रुपया प्रति वर्ष तक पहुंच सके. विकिपीडिया और गूगल के पास ये आर्थिक साधन हैं इस लिए वे विजयी हो रहे हैं.&#160; यदि कुछ लोग इस तरह के साधन जुटा सकें तो एक हिन्दुस्तानी कार्य विजयी हो सकता है.</p>
<p align="center"><a href="http://www.articlepedia.us"><font size="1">Article Bank</font></a><font size="1"> | </font><a href="http://guide4income.com"><font size="1">Net Income</font></a><font size="1"> | </font><a href="http://allthingsindian.org"><font size="1">About India</font></a><font size="1"> । </font><a href="http://www.CoinsEncyclopedia.org"><font size="1">Indian Coins</font></a><font size="1"> | </font><a href="http://www.physics4u.info"><font size="1">Physics Made Simple</font></a><font size="1"> | </font><a title="India, history, culture, tourist places, dances, customs, food, festivals" href="http://india.sarathi.info/"><font size="1">India</font></a></p>
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		<title>नॉल, विकीपीडिया &#8212; सब गडबड है!!</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/2005</link>
		<comments>http://sarathi.info/archives/2005#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 11 Mar 2009 23:30:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[प्रश्न: शास्त्री जी, कुछ दिन पहले आप ने हम सब से गूगल के नॉल पर हिन्दी में लिखने को कहा.&#160; आज आप ने आह्वान किया कि विकिपीडिया पर हिन्दी में आलेख लिखें. सवाल है कि इन में से कौन सा बेहतर है. मुझे तो सब गडबड मालूम पडता है. बाल नोचने की इच्छा होती है. [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p><font color="#0080c0">प्रश्न: शास्त्री जी, कुछ दिन पहले आप ने हम सब से गूगल के नॉल पर हिन्दी में लिखने को कहा.&#160; आज आप ने आह्वान किया कि विकिपीडिया पर हिन्दी में आलेख लिखें. सवाल है कि इन में से कौन सा बेहतर है. मुझे तो सब गडबड मालूम पडता है. बाल नोचने की इच्छा होती है.</font></p>
</blockquote>
<p><a href="http://sarathi.info/wp-content/uploads/2009/03/hairpulling.jpg"><img title="HairPulling" style="border-top-width: 0px; display: inline; border-left-width: 0px; border-bottom-width: 0px; margin: 0px 40px 0px 0px; border-right-width: 0px" height="160" alt="HairPulling" src="http://sarathi.info/wp-content/uploads/2009/03/hairpulling-thumb.jpg" width="240" align="left" border="0" /></a> मेरे आलेख <a href="http://sarathi.info/archives/1999">यह विकिपीडिया क्या बला है??</a> के छपने के बाद किसी अनाम सज्जन ने सुझाव-बॉक्स की सहायता से यह प्रश्न भेजा है. उनका इशारा विकिपीडिया के लेख के साथ <a href="http://sarathi.info/archives/1965">नॉल: आईये हिन्दी के लिये कुछ करें — 01</a>&#160;&#160; और <a href="http://sarathi.info/archives/1968">नॉल: आईये हिन्दी के लिये कुछ करें — 02</a> की ओर है.</p>
<p><font color="#0080c0">उत्तर:</font> प्रिय दोस्त कई बार गडबड या असंतुलन किसी वस्तु में नहीं, बल्कि देखने वाले की नजर में होता है. एक से अधिक चुनाव की उपलब्धि को आप गडबड के रूप में देखते हैं. लेकिन विषय के दूसरे पहलू को जरा देखने की कोशिश करें जो इस प्रकार है:</p>
<p>कल अनुनाद जी ने अपने पत्र में लिखा था “हिन्दी विकिपिडिया का समुचित विकास होने पर हिन्दी में ज्ञान की कमी का रोना सदा के लिये बन्द किया जा सकता है।”</p>
<p>हम सब जानते हैं कि अंग्रेजी की तुलना में हिन्दी में पर्याप्त आलेख किसी भी विषय पर नहीं मिल पाते है. लोग इसका बडा रोना रोते हैं. लेकिन विकिपीडिया के आने से इस रोने का इलाज करने के लिये एक कारगर दवा मिल गई है. नॉल के आने से दो दवायें हो गई हैं, न कि सब गडबड हो गया है. </p>
<p>आज जालजगत में अंग्रेजी के कई विश्व/ज्ञानकोश उपलब्ध हैं. हरेक की अपनी खासियत है, अपनी उपयोगिता है. किसी को एक पसंद है, किसी को दूसरा पसंद है. कई सब का सहारा लेते हैं. महज इसलिये कोई बाल नहीं नोचता कि एक से अधिक चुनाव लभ्य है. बल्कि जब ज्ञान के लिये एक से अधिक मुफ्त स्रोत उपलब्ध हो जाता है तो हरेक को फायदा होता है.</p>
<p>यह हमारा भाग्य है कि अब हिन्दी में दो ज्ञान/विश्वकोश की नीव पड गई है. हम में से हरेक व्यक्ति के पास ऐसी जानकारियां हैं जिन से दूसरों को फायदा हो सकता है. आप के शहर के एक अज्ञात, लेकिन महत्वपूर्ण, एतिहासिक स्थल से लेकर आपके शहर की लुप्त होती कलाओं के बारे में आप से बेहतर कोई नहीं लिख सकता!!</p>
<p>बाल नोचना छोडिये. लिखना शुरू कर दीजिये. हिन्दी में ज्ञान की कमी का रोना रोने के बदले आईये हिन्दी के लिये कुछ करने के लिये कमर कस ले!!</p>
<p> <center>
<p><a href="http://www.articlepedia.us"><font size="1">Article Bank</font></a><font size="1"> | </font><a href="http://guide4income.com"><font size="1">Net Income</font></a><font size="1"> |</font><font size="1"> </font><a href="http://www.CoinsEncyclopedia.org"><font size="1">Indian Coins</font></a><font size="1"> | </font><a href="http://www.physics4u.info"><font size="1">Physics Made Simple</font></a><font size="1"> | </font><a title="India, history, culture, tourist places, dances, customs, food, festivals" href="http://india.sarathi.info/"><font size="1">India</font></a>       <br /><font size="1">Photograph: Pulling My Hair Out! <small>by <b><a href="http://www.flickr.com/photos/29223627@N04/">Katalyst (is still a&#8230;</a></b></small></font></p>
<p> </center></p>
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		<title>यह विकिपीडिया क्या बला है??</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1999</link>
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		<pubDate>Tue, 10 Mar 2009 23:30:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[आदरणीय अनुनाद जी ने सभी चिट्ठाकारों के लिये कल निम्न सूचना भेजी थी: खुशी की बात है कि हिन्दी विकिपिडिया अब सर्वाधिक सामग्री वाली पचास विकिपिडिया में सम्मिलित हो गयी है।&#160; इसमें लेखों की संख्या अब सत्ताइस हजार के पास पहुँच गयी है।&#160; यह सब कुछ कुछ समर्पित हिन्दीप्रेमियों के बिना थके किये गये मेहनत [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>आदरणीय <a href="http://pratibhaas.blogspot.com/" target="_blank">अनुनाद जी</a> ने सभी चिट्ठाकारों के लिये कल निम्न सूचना भेजी थी: खुशी की बात है कि हिन्दी विकिपिडिया अब सर्वाधिक सामग्री वाली पचास विकिपिडिया में सम्मिलित हो गयी है।&#160; इसमें लेखों की संख्या अब सत्ताइस हजार के पास पहुँच गयी है।&#160; यह सब कुछ कुछ समर्पित हिन्दीप्रेमियों के बिना थके किये गये मेहनत का परिणाम है।</p>
<p>इसी के साथ आप सभी से भी आग्रह है कि आप भी अपने विशिष्टता के क्षेत्र में&#160; पाँच-दस लेखों का योगदान अवश्य करें।&#160; विकिपिडिया की सामग्री सदा उपयोगी रहने वाली सामग्री है। भविष्य में&#160; हिन्दी विकिपिडिया (अन्य विकि भी)&#160;&#160; अत्यधिक&#160; महत्व के साबित होने वाले हैं।&#160; हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के लिये ऐसे प्रयासों का विशेष महत्व है क्योंकि इस तरह&#160; विश्वकोश बनाने का इतना&#160; विशाल प्रयास पहली बार हो रहा है।</p>
<p>हिन्दी विकिपिडिया पर कुछ लिखने की कोशिश तो कीजिये।&#160; हिन्दी विकिपिडिया का समुचित विकास होने पर हिन्दी में ज्ञान की कमी का रोना सदा के लिये बन्द किया जा सकता है।</p>
</blockquote>
<p><font color="#ff0000"><a href="http://sarathi.info/wp-content/uploads/2009/03/shastri1-100.jpg"><img title="shastri1_100" style="border-top-width: 0px; display: inline; border-left-width: 0px; border-bottom-width: 0px; margin: 0px 30px 0px 0px; border-right-width: 0px" height="171" alt="shastri1_100" src="http://sarathi.info/wp-content/uploads/2009/03/shastri1-100-thumb.jpg" width="100" align="left" border="0" /></a> मेरी टिप्पणी:</font> विकिपीडिया एक अंग्रेजी ज्ञानकोश है जो कुछ ही सालों में दुनियाँ का सबसे बडा ज्ञान/विश्वकोश बन गया है. इसके अंग्रेजी संस्करण के आरंभ के कुछ समय बाद दुनियाँ के कई महत्वपूर्ण भाषाओं में भी इसे चालू किया गया. हिन्दी विकि को आप&#160;&#160; <a title="http://hi.wikipedia.org/wiki" href="http://hi.wikipedia.org/wiki">http://hi.wikipedia.org/wiki</a> पर देख सकते हैं.</p>
<p>विकिपीडिया की विशेषता यह है कि कोई भी व्यक्ति इसमें योगदान दे सकता है. किसी भी विषय पर लिखा जा सकता है. कैसे लिखा जाये इसके लिये पर्याप्त मदद-सामग्री उपलब्ध है. यह सब कुछ कुछ समर्पित हिन्दीप्रेमियों के बिना थके किये गये निस्वार्थ मेहनत का परिणाम है। इसका मतलब है कि यदि कुछ लोग निकल पडें तो हिन्दी के लिये बहुत कुछ किया जा सकता है.</p>
<p>मेरा अनुरोध है कि हर हिन्दीप्रेमी को इस साल&#160; कम से कम दस लेख हिन्दी विकि पर लिखना चाहिये. यदि सारे सक्रिय हिन्दी चिट्ठाकार 2009 में ऐसा कर दें तो 27,000&#160; प्रविष्ठियों की संख्या इस साल 50,000 को पार कर जायगी. </p>
<p>वाकई में हिन्दी विकिपिडिया का समुचित विकास होने पर हिन्दी में ज्ञान की कमी का रोना सदा के लिये बन्द किया जा सकता है। आज ही अपना पहला योगदान वहां जाकर कर आयें. याद रखिये, सिर्फ हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.</p>
<p align="center"><a href="http://www.articlepedia.us"><font size="1">Article Bank</font></a><font size="1"> | </font><a href="http://guide4income.com"><font size="1">Net Income</font></a><font size="1"> | </font><a href="http://allthingsindian.org"><font size="1">About India</font></a><font size="1"> । </font><a href="http://www.CoinsEncyclopedia.org"><font size="1">Indian Coins</font></a><font size="1"> | </font><a href="http://www.physics4u.info"><font size="1">Physics Made Simple</font></a><font size="1"> | </font><a title="India, history, culture, tourist places, dances, customs, food, festivals" href="http://india.sarathi.info/"><font size="1">India</font></a></p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>तीन हीरे &#8212; अनुनाद जी के खजाने से!!</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1693</link>
		<comments>http://sarathi.info/archives/1693#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 27 Nov 2008 00:30:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी सन्दर्भ]]></category>

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		<description><![CDATA[अनुनाद जी का चिट्ठा हर हिन्दी एवं हिन्दुस्तान प्रेमी के लिये एक नियमित पडाव होना चाहिये. उनके चिट्ठे से तीन हीरे मैं आपके समक्ष रखना चाहता हूँ. उम्मीद है कि आप उनके चिट्ठे को बुकमार्क कर लेंगे. हीरा 1: हिन्दी सशक्तिकरण के सरल सूत्र&#160; हिन्दी दिवस पर हिन्दी के बारे में लोगों के विचार पढ़कर [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><font face="Mangal" size="2">अनुनाद जी का चिट्ठा हर हिन्दी एवं हिन्दुस्तान प्रेमी के लिये एक नियमित पडाव होना चाहिये. उनके चिट्ठे से तीन हीरे मैं आपके समक्ष रखना चाहता हूँ. उम्मीद है कि आप उनके चिट्ठे को बुकमार्क कर लेंगे.</font></p>
<p><font face="Mangal" size="2">हीरा 1: <font color="#0000ff">हिन्दी सशक्तिकरण के सरल सूत्र</font>&#160; हिन्दी दिवस पर हिन्दी के बारे में लोगों के विचार पढ़कर लोगों की हिन्दी से घनिष्ट सम्बन्ध साफ-साफ़ दिख रहा है। मैं भी इस अवसर पर कुछ कहना चाहूँगा:&#160; इतिहास से सीखा है की उतार-चढाव होते रहते हैं ; आशा रखो, कर्मरत रहो, धीरज रखो । स्थिति बदल कर रहेगी; भारत हिन्दीमय होकर रहेगा। (</font><a href="http://pratibhaas.blogspot.com/2008/09/blog-post_12.html" target="_blank"><font face="Mangal" size="2">शेष लेख पढें …</font></a><font face="Mangal" size="2">)</font></p>
<p><font face="Mangal" size="2">हीरा 2: <font color="#0000ff">हिन्दी और स्वभाषा पर विचारोत्तेजक लेख</font> भारत के मैकाले-पूजकों ने हिन्दी , राजभाषा , मातृभाषा आदि के बारे में तरह-तरह की भ्रांतियां फैला दी हैं . इससे आम जनता के मानस पटल पर इनके महत्व की विराट छवि बनने ही नहीं पाती। इसी का परिणाम है कि राजनैतिक रूप से &#8216;स्वतंत्र&#8217; होने के बावजूद भी किसी को यह स्पष्ट ही नहीं है कि स्व-तंत्र होता क्या है और इसका क्या महत्व है? इसस भ्रान्ति से उपजे भटकाव के सहारे भारत में गुलाम मानसिकता से ग्रस्त एक अत्यंत छोटा सा समूह अपने साथ अन्य लोगों को भी गुलाम ने रहने को विवश किए हुए है। (</font><a href="http://pratibhaas.blogspot.com/2008/10/blog-post.html" target="_blank"><font face="Mangal" size="2">शेष लेख पढें …</font></a><font face="Mangal" size="2">)</font></p>
<p><font face="Mangal" size="2">हीरा 3: <font color="#0000ff">अंतरजाल से बिना जुड़े ही विकिपीडिया की सुविधा</font>&#160; जी हाँ, विकिपीडिया के अपार ज्ञान के भंडार से अब आफलाइन रहकर भी ज्ञानार्जन किया जा सकता है। भारत में इंटरनेट की स्थिति को देखते हुए भारत के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।       <br />केवल अंग्रेजी ही नहीं बल्कि सभी भाषाओं की विकिपीडिया और उसके बंधु प्रकल्पों का सारा ज्ञान विविध प्रारूपों मेंउपलब्ध है जिसे नि:शुल्क उतारकर उपयोग किया जा सकता है। (</font><a href="http://pratibhaas.blogspot.com/2008/11/blog-post.html" target="_blank"><font face="Mangal" size="2">शेष लेख पढें …</font></a><font face="Mangal" size="2">)</font></p>
<p><font face="Mangal" size="2">अनुनाद जी ने कई बार अपने चिट्ठे के लेखों के पुनर्प्रकाशन की अनुमति सारथी को दी है, लेकिन आज मेरा लक्ष्य आपको उनके चिट्ठे पर ले जाना है अत: आपको सिर्फ हीरों की झलक मात्र दिखा दी है. अब यदि उसे हासिल नहीं करते एवं उनके चिट्ठे को बुकमार्क नहीं करते तो नुकसान आप का ही है!!</font></p>
<p><font face="Mangal" size="2"></font></p>
<p align="center"><span style="color: #800000"><span style="font-size: x-small"><span style="font-size: x-small; font-family: mangal"><span style="font-size: x-small"><span style="font-size: x-small"><font size="2">यदि आपको टिप्पणी पट न दिखे तो आलेख के शीर्षक पर क्लिक करें, लेख के नीचे टिप्पणी-पट&#160; दिख जायगा!!</font></span></span></span></span></span></p>
<p align="center"><a href="http://www.articlepedia.us"><span style="font-size: xx-small">Article Bank</span></a><span style="font-size: xx-small"> | </span><a href="http://guide4income.com"><span style="font-size: xx-small">Net Income</span></a><span style="font-size: xx-small"> | </span><a href="http://allthingsindian.org"><span style="font-size: xx-small">About India</span></a><span style="font-size: xx-small"> । </span><a href="http://www.CoinsEncyclopedia.org"><span style="font-size: xx-small">Indian Coins</span></a><span style="font-size: xx-small"> | </span><a href="http://www.physics4u.info"><span style="font-size: xx-small">Physics Made Simple</span></a></p>
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		<title>स्तरीय हिन्दी पुस्तकें कुबेर ही पढ सकता है</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/334</link>
		<comments>http://sarathi.info/archives/334#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 25 Nov 2008 00:30:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[विश्लेषण]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[यह राजभाषा हिन्दी का दुर्भाग्य है कि हिन्दी लुगदी-साहित्य तो देश के कोने कोने मे (जी हां, दक्षिण में भी) 25 से 30 रुपये में मिल जाता है, लेकिन जो किताबें व्यक्ति एवं समाज को शाश्वत लाभ दे सकती हैं वे दूढे नहीं मिलतीं. किसी तरह मिल जाये तो स्थिति यह है कि किताब खरीदो [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><font face="Mangal" size="2"></font></p>
<p><font face="Mangal" size="2">यह राजभाषा हिन्दी का दुर्भाग्य है कि हिन्दी लुगदी-साहित्य तो देश के कोने कोने मे (जी हां, दक्षिण में भी) 25 से 30 रुपये में मिल जाता है, लेकिन जो किताबें व्यक्ति एवं समाज को शाश्वत लाभ दे सकती हैं वे दूढे नहीं मिलतीं. किसी तरह मिल जाये तो स्थिति यह है कि किताब खरीदो तो बीबीबच्चे भूखे रह जायें, या उनको खिलाने की फिकर करों तो किताब दुकान में ही रह जाये.</font></p>
<p><font face="Mangal" size="2">इस हफ्ते मैं कोच्चि (विशाल कोच्चि का नया नाम) में स्थित दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा की पुस्तकशाला में दो बार गया. काफी सारे हिन्दी शब्दकोश एवं अन्य सन्दर्भ ग्रंथ खरीदे. पत्नीबच्चों से छुपा कर घर के अंदर उनकी तस्करी की. अब उनका उपयोग खुल कर कर रहा हूं. लेकिन इन दो दिनों मे एक बात बहुत अखरी. सही कहा जाये तो यह बात पिछली चार दशाब्दियों के लेखन में मुझे बहुत अखरती रही है. यह कि स्तरीय हिन्दी पुस्तकें अपने जुडवे अंग्रेजी भाई या बहन से सस्ते कागज पर छपती हैं, सस्ती जिल्द होती है, कम टिकाऊ होती है, लेकिन पृष्ठ संख्या के हिसाब से कीमत में दुगनी से चार गुनी अधिक होती है. मुझे हमेशा यह लगता रहा है कि जो हिन्दीलेखक अच्छे स्तर की शाश्वत पुस्तकें लिख सकते हैं उन में से कई की नजर हिन्दीभाषियों की आर्थिक स्थिति पर नहीं बल्कि किताबे से मिलने वाली रॉयल्टी की ओर रहती है. मजे की बात यह है कि बहुत कम हिन्दुस्तानी प्रकाशक रॉयल्टी देते हैं.</font></p>
<p> <font face="Mangal" size="2">मैं 50 के करीब पुस्तकें (अधिकतर मलयालम भाषा में) लिख चुका हूं. इनमे तीन सन्दर्भ ग्रंथ, एक वृहत शब्दकोश, एवं एक 4 खंड का विश्वकोश है. इनमें से एक सन्दर्भ ग्रंथ मलयालम बोलने वाले ईसाईयों के बीच इतना प्रसिद्ध हुआ था कि 300,000 रुपये मे (जी हां, तीन लाख रुपये में) उसकी एक आखिरी प्रति मस्कट (Muscat) में नीलाम हुई. पैसा किसी और को मिला. लेकिन यह सब करने के बाद मुझे हिन्दुस्तानी भाषा की पुस्तकों से सारे जीवन में रॉयल्टी मिली 1200 (जी हां, केवल बारह सौ) रुपये. वह भी विवाह जीवन के बारे में एक साधारण सी पुस्तक के लिये. </font>
</p>
<p><font face="Mangal" size="2">यह एक विषचक्र है: रॉयल्टी के पीछे भागिये, किताब की कीमत बढा चढा कर रखिये, लेकिन इन सब के बावजूद आपको भारतीय भाषा की किताबें लिखने के लिये धेला भी नहीं मिलेगा. उधर वह किताब आम आदमी की पहुंच से बाहर जो हो जाती है वह अलग. न तो हिन्दी का कल्याण होता है, न हिन्दीभाषी का. लगभग सभी भारतीय भाषाओ में यही हिसाब चल रहा है. यदि पुस्तक महल, एवं दिल्ली प्रेस (जो सरिता छापते हैं) न होते तो आम हिन्दीभाषी शायद एक भी किताब खरीद न पाता. </font></p>
<p><font face="Mangal" size="2">दुखी होकर कुछ साल पहले मैं ने एक निर्णय लिया था कि अब बेचने के लिये नहीं मुफ्त वितरण के लिये लिखूंगा. अंग्रेजी में ईसाई धर्म एवं दर्शन से सम्बंधित 20 के करीब छोटे पुस्तक इसके बाद लिखे. सब को इलेक्ट्रानिक रूप में (पीडीएफ) वितरित करना शुरू किया. मई 2007 तक, 10,00,000 प्रतियां वितरित हुई. कम से कम दुनियां भर के लोगों को फायदा हुआ. आजकल 60,000 प्रतियां हर महीने मेरे अंग्रेजी चिट्ठों से जा रहे है, अर्थात 1,000,000 प्रतियां एक साल में. हर पुस्तक को मैं ने &quot;मुक्त&quot; प्रकाशनाधिकार के अन्तर्गत रखा है. जो चाहे उसका उपयोग कर सकता है (बिना परिवर्तन के, बिना मेरा नाम हटाये).</font></p>
<p><font size="2"><font face="Mangal">आजकल अंग्रेजी छोड कर हिन्दी में लिख रहा हूं. ईश्वर ने मदद की तो बहुत जल्दी ही ये ईपुस्तकें हिन्दी में उपलब्ध हो जायेंगी. मुक्त कॉपीराईट होगा एवं पूर्ण रूप से नि:शुल्क होंगी. बेची नहीं जायेंगी, नहीं तो सिर्फ कुबेर ही उनको पढ पायगा. हिन्दी में स्तरीय पुस्तकों की कीमत देख कर मैं ने कई बार आंसू बहाये हैं, लेकिन मैं नहीं चाहता कि मेरे पाठकों को यह करना पडे</font></font></p>
<p><a title="हिन्दी सम्बन्धित चिट्ठे" href="http://www.chitthajagat.in/?shabd=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80"><font face="Mangal" size="2">हिन्दी</font></a><font face="Mangal" size="2">, </font><a title="हिन्दी-पुस्तकें सम्बन्धित चिट्ठे" href="http://www.chitthajagat.in/?shabd=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82"><font face="Mangal" size="2">हिन्दी-पुस्तकें</font></a><font face="Mangal" size="2">, </font><a title="कापीराईट सम्बन्धित चिट्ठे" href="http://www.chitthajagat.in/?shabd=%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%9F"><font face="Mangal" size="2">कापीराईट</font></a><font face="Mangal" size="2">, </font><a title="मुक्त-कापीराईट सम्बन्धित चिट्ठे" href="http://www.chitthajagat.in/?shabd=%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%9F"><font face="Mangal" size="2">मुक्त-कापीराईट</font></a><font face="Mangal" size="2">, </font><a title="ईपुस्तकें सम्बन्धित चिट्ठे" href="http://www.chitthajagat.in/?shabd=%E0%A4%88%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82"><font face="Mangal" size="2">ईपुस्तकें</font></a><font face="Mangal" size="2">, </font><a title="सारथी सम्बन्धित चिट्ठे" href="http://www.chitthajagat.in/?shabd=%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A5%E0%A5%80"><font face="Mangal" size="2">सारथी</font></a><font face="Mangal" size="2">, </font><a title="चुने-हुए-लेख सम्बन्धित चिट्ठे" href="http://www.chitthajagat.in/?shabd=%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%8F-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%96"><font face="Mangal" size="2">चुने-हुए-लेख</font></a><font face="Mangal" size="2">, </font><span style="color: #800000"><span style="font-size: x-small"><span style="font-size: x-small; font-family: mangal"><span style="font-size: x-small"><span style="font-size: x-small"><font size="2">यदि आपको टिप्पणी पट न दिखे तो आलेख के शीर्षक पर क्लिक करें, लेख के नीचे टिप्पणी-पट&#160; दिख जायगा!!</font></span></span></span></span></span></p>
<p align="center"><a href="http://www.articlepedia.us"><span style="font-size: xx-small">Article Bank</span></a><span style="font-size: xx-small"> | </span><a href="http://guide4income.com"><span style="font-size: xx-small">Net Income</span></a><span style="font-size: xx-small"> | </span><a href="http://allthingsindian.org"><span style="font-size: xx-small">About India</span></a><span style="font-size: xx-small"> । </span><a href="http://www.CoinsEncyclopedia.org"><span style="font-size: xx-small">Indian Coins</span></a><span style="font-size: xx-small"> | </span><a href="http://www.physics4u.info"><span style="font-size: xx-small">Physics Made Simple</span></a></p>
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		<title>हिन्दुस्तानी एकेडेमी</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1477</link>
		<comments>http://sarathi.info/archives/1477#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 01 Oct 2008 03:29:27 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[हिन्दुस्तान की अधिसंख्य आबादी द्वारा हिन्दी व उर्दू भाषा बोली जाती थी। देश की आजादी में भी हिन्दी और उर्दू का अत्यधिक योगदान रहा है। हिन्दुस्तानी भाषा का तात्पर्य हिन्दी + उर्दू से है। इसी हिन्दुस्तानी के संरक्षण, संवर्द्धन के लिए हिन्दुस्तानी एकेडेमी की स्थापना 22 जनवरी, 1927 में हुई। इसका उद्‍घाटन 29 मार्च, 1927 [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="left"><font face="m" size="2">हिन्दुस्तान की अधिसंख्य आबादी द्वारा हिन्दी व उर्दू भाषा बोली जाती थी। देश की आजादी में भी हिन्दी और उर्दू का अत्यधिक योगदान रहा है। हिन्दुस्तानी भाषा का तात्पर्य हिन्दी + उर्दू से है। इसी हिन्दुस्तानी के संरक्षण, संवर्द्धन के लिए हिन्दुस्तानी एकेडेमी की स्थापना 22 जनवरी, 1927 में हुई। इसका उद्‍घाटन 29 मार्च, 1927 को लखनऊ में तत्कालीन प्रान्तीय गवर्नर सर विलियम मॉरिस द्वारा किया गया। इसके गठन में तत्कालीन शिक्षा मंत्री मा. राय राजेश्वर बली, पं. यज्ञनारायण उपाध्याय, स्व. हाफिज हिदायत हुसैन, डा. तेज बहादुर सप्रू का प्रमुख योगदान था।</font></p>
<p><font face="m" size="2">एकेडेमी का मुख्य उद्देश्य व कार्य इस प्रकार रहा है :-</font></p>
<p><font face="m" size="2">1. राजभाषा हिन्दी, उसके साहित्य तथा ऐसे अन्य रूपों एवं शैलियों (जैसे उर्दू, ब्रजभाषा, अवधी, भोजपुरी आदि) का परिरक्षण, संबर्द्धन और विकास करना, जिससे हिन्दी समृद्ध हो सकती है।</font></p>
<p><font face="m" size="2">2. हिन्दीतर भारतीय भाषाओं तथा विदेशी भाषाओं की साहित्यिक कृतियों का हिन्दी में अनुवाद कराना।</font></p>
<p><font face="m" size="2">3. मौलिक हिन्दी कृतियों, सृजनात्मक साहित्य का प्रोत्साहन एवं प्रकाशन।</font></p>
<p><font face="m" size="2">4. राज्य सरकार की सहमति से हिन्दी में सन्दर्भ ग्रन्थ तैयार कराना तथा उनका प्रकाशन।</font></p>
<p><font face="m" size="2">5. प्रतिष्ठित विद्वानों एवं लेखकों को एकेडेमी का अधिसदस्य चुनना।</font></p>
<p><font face="m" size="2">6. एकेडेमी के हितैषियों को इसका अधिसदस्य चुनना।</font></p>
<p><font face="m" size="2">7. लेखकों, कवियों, साहित्यकारों, वैज्ञानिकों तथा कलाकारों का सम्मान करना।</font></p>
<p><font face="m" size="2">8. प्रतिष्ठित विद्वानों के व्याख्यानों की व्यवस्था करना।</font></p>
<p><font face="m" size="2">9. साहित्यिक गतिविधियों पर विचार करने के लिए वार्षिक सम्मेलन का आयोजन करना।</font></p>
<p><font face="m" size="2">10. प्राचीन एवं मध्ययुगीन हिन्दी साहित्य के वैज्ञानिक रूप से सम्पादित पाठों का प्रकाशन।      </p>
<p></font><font face="m" size="2">हिन्दुस्तानी एकेडेमी के दो अंग हैं :-</font></p>
<p><font face="m" size="2">1. परिषद      <br /></font><font face="m" size="2">2. कार्यसमिति</font></p>
<p><font face="m" size="2">परिषद एकेडेमी की नीति का निर्धारण करती है। दोनो अंगों में सदस्यों का आमेलन शासकीय नामांकन द्वारा व विभिन्न संस्थाओं (जैसे हिन्दी साहित्य सम्मेलन, भारतीय हिन्दी परिषद, विज्ञान परिषद, शिबली एकेडेमी आजमगढ़, हिन्दी समिति लखनऊ, ब्रज साहित्य मण्डल मथुरा, नागरी प्रचारिणी सभा काशी) के प्रतिनिधियों द्वारा होता है।</font></p>
<p><font face="m" size="2">हिन्दुस्तानी एकेडेमी के अधिसंख्य सदस्य जो रह चुके हैं उनमें पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी &#8216;निराला&#8217;, राजर्षि पुरूषोत्तमदास टण्डन, डा. सम्पूर्णानन्द, प्रो. गोविन्द चन्द्र पाण्डेय प्रमुख हैं।</font></p>
<p><font face="m" size="2">एकेडेमी के अध्यक्ष पद पर जिन लब्ध प्रतिष्ठ विद्वानों ने कार्य किया है, उनमें प्रमुख हैं – डा. तेज बहादुर सप्रू, राय राजेश्वर बली, श्री कमलाकान्त वर्मा, श्री बालकृष्ण राव, डा. रामकुमार वर्मा, न्यायमूर्ति सुरेन्द्र नाथ द्विवेदी आदि।</font></p>
<p><font face="m" size="2">एकेडेमी के सचिव पद को जिन विद्वानों ने सुशोभित किया है उनमें प्रमुख हैं – डा. ताराचन्द, डा0 धीरेन्द्र वर्मा, श्री विद्या भास्कर, श्री उमाशंकर शुक्ल, डा. जगदीश गुप्त आदि।</font></p>
<p><font face="m" size="2">एकेडेमी में आयोजित होने वाली व्याख्यान मालाएं, परिसंवाद, संगोष्ठियाँ अत्यन्त उच्चस्तरीय, गम्भीर व महत्त्वपूर्ण होती हैं।</font></p>
<p><font face="m" size="2">एकेडेमी की त्रैमासिक शोध परक पत्रिका &#8216;हिन्दुस्तानी&#8217; सन्‍ 1931 से प्रकाशित हो रही है। 1948 तक यह हिन्दी व उर्दू दोनो भाषाओं में प्रकाशित होती थी। अब केवल हिन्दी में ही यह प्रकाशित होती है। इसके लेख शोधपरक, आलोचनात्मक एवं गवेषणात्मक प्रकृति के होते हैं। हिन्दी साहित्य जगत में &#8216;हिन्दुस्तानी&#8217; को अतिशय आदर से देखा जाता है। बीच-बीच में हिन्दी विद्वानों के नाम पर विशेषांक भी प्रकाशित होते हैं जैसे- सूर, प्रेमचन्द, राहुल सांकृत्यायन, हजारी प्रसाद द्विवेदी आदि।</font></p>
<p><font face="m" size="2">एकेडेमी के पास अपना समृद्ध पुस्तकालय है। जिसमें लगभग १८००० पुस्तकें हैं।</font></p>
<p><font face="m" size="2">हिन्दुस्तानी एकेडेमी ने लगभग २२५ मूल्यवान पुस्तकों का प्रकाशन भी किया है। जिसमें कुछ मुख्य पुस्तकें हैं &#8211; प्रयाग प्रदीप, घाघ और भड्डरी, शंकराचार्य, मानस में तत्सम शब्द, संत तुकाराम, हिन्दी वीरकाव्य, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, जायसी, नैषध परिशीलन, हिन्दी नाटक और रंगमंच, अवधी का विकास, भोजपुरी लोकगाथा, अभिधर्म कोश, नौतर्ज मुरस्सा, आध्यात्म रामायण, इन्तखाबे दाग, आलमे हैवानी आदि।</font></p>
<p><font face="m" size="2">&#8216;हिन्दुस्तानी एकेडेमी&#8217; द्वारा अब तक लगभग 30 विद्वानों को उनकी प्रतिष्ठित कृतियों के लिए सम्मानित किया गया है। जिसमें उल्लेखनीय हैं &#8211; मुंशी प्रेमचन्द, श्री जगन्नाथदास &#8216;रत्नाकर&#8217;, मौलाना सैयद अली नक़वी सफी, बाबू गुलाब राय, पं. राम नरेश त्रिपाठी, आचार्य पं. रामचन्द्र शुक्ल, आचार्य परशुराम चतुर्वेदी आदि।</font></p>
<p><font face="m" size="2">वर्तमान में एकेडेमी का भवन चन्द्रशेखर आजाद पार्क (एल्फ्रेड पार्क) में स्थित है। यह भवन 1963 में बना।</font></p>
<p><font face="m" size="2">एकेडेमी की आय का मुख्य साधन सरकारी अनुदान, प्रकाशित पुस्तकों की बिक्री, सभागार से प्राप्त किराया है।</font></p>
<p><font face="m" size="2">इस समय एकेडेमी में स्तरीय पुस्तकों का मुद्रण/प्रकाशन व दुर्लभ पुस्तकों का पुनर्मुद्रण कार्य तीव्रगति से चल रहा है।</font></p>
<p><font face="m" size="2">हिन्दी व उसकी सहयोगी भाषाओं को समृद्ध व लोकप्रिय बनाने में एकेडेमी का योगदान अविस्मरणीय है। राष्ट्रभाषा को विश्व की प्रमुख भाषाओं के समकक्ष बैठाना और उसकी सर्वांगीण उन्नति ही एकेडेमी का संकल्प है। इस संकल्प को पूरा करने में एकेडेमी का आदर्श वाक्य भवभूति के उत्तररामचरितम्‍ से लिया गया है। यह है- <b>&#8221;</b><b>विन्देम देवतां वाचम</b><b>&#8221;</b> अर्थात हम देवताओं की वाणी प्राप्त करें। नि:सन्देह एकेडेमी अपने आदर्श वाक्य के अनुसरण में हिन्दी सेवा में रत है।</font></p>
<p><font face="m" size="2"></font></p>
<p><font face="m" size="2">(डा. एस.के. पाण्डेय)      <br />सचिव-हिन्दुस्तानी एकेडेमी       <br />एवं अपर जिलाधिकारी(वित्त एवं राजस्व)       <br />इलाहाबाद</font></p>
<p> <center>
<p><font color="#0080ff">[</font><a href="http://www.blogger.com/profile/03171684943410358559"><font color="#0080ff">हिन्दुस्तानी एकेदेमी </font></a><font color="#0080ff">के उम्दा प्रकाशनों तथा वर्तमान गतिविधियों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने तथा इससे जुड़कर हिन्दी की सेवा करने के लिए </font><a href="http://hindustaniacademy.blogspot.com"><font color="#0080ff">यहाँ </font></a><font color="#0080ff">चटका लगाएं और सम्पर्क करें]</font></p>
<p><font size="2"></font></p>
<p align="center"><font color="#800000">यदि आपको टिप्पणी पट न दिखे तो आलेख के शीर्षक पर क्लिक करें, टिप्पणी-पट लेख के नीचे दिख जायगा!!</font></p>
<p align="center">&#160;</p>
<p align="center"><a href="http://www.articlepedia.us"><font face="a" size="1">ArticlePedia</font></a><font face="a" size="1"> | </font><a href="http://guide4income.com"><font face="a" size="1">Guide4Income</font></a><font face="a" size="1"> | </font><a href="http://allthingsindian.org"><font face="a" size="1">All Things Indian</font></a></p>
<p> </center></p>
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		<title>हिन्&#8205;दी प्रतीक का एचटीएमएल</title>
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		<pubDate>Wed, 17 Sep 2008 05:15:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[हिन्दी हमारी मातृभाषा है, मात्र एक भाषा नहीं है को अपने चिट्ठे पर स्थापित करने के लिये एचटीएमएल कोड संजीव जी ने अपने चिट्ठे पर उपलब्ध करवाया है जिसे आप निम्न आलेख से प्राप्त कर सकते है. कृपया इस प्रतीक को कम से कम अगले किसी प्रतीक के आने तक अपने चिट्ठे पर जरूर प्रदर्शित [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><font face="Mangal" size="2">
<p>हिन्दी हमारी मातृभाषा है, मात्र एक भाषा नहीं है को अपने चिट्ठे पर स्थापित करने के लिये एचटीएमएल कोड संजीव जी ने अपने चिट्ठे पर उपलब्ध करवाया है जिसे आप निम्न आलेख से प्राप्त कर सकते है. कृपया इस प्रतीक को कम से कम अगले किसी प्रतीक के आने तक अपने चिट्ठे पर जरूर प्रदर्शित करें: <a href="http://bhilaiance.blogspot.com/2008/09/blog-post.html">सारथी जी द्वारा प्रस्‍तुत हिन्‍दी लोगो का एचटीएमएल कोड यहां से प्राप्‍त करें</a></p>
<p>संजय को इस कार्य के लिये विशेष आभार !!</p>
<p></font></p>
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		<title>हिन्दुस्तानी एकेडेमी: तकनीकी समस्या</title>
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		<pubDate>Tue, 16 Sep 2008 07:41:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[हिन्दुस्तानी एकेडेमी को उसके पुराने जालस्थल पर&#160; सक्रिय रखने में कुछ तकनीकी बाधा उत्पन्न हो गयी है। लेकिन निराश न हों, इसका नया ठिकाना बस यहाँ क्लिक करते ही मिल जाएगा। कष्ट के लिए खेद है। धन्यवाद! सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><font face="Mangal" size="2">
<p><a href="http://hindustaniacademy.blogspot.com">हिन्दुस्तानी एकेडेमी</a> को उसके पुराने जालस्थल पर&nbsp; सक्रिय रखने में कुछ तकनीकी बाधा उत्पन्न हो गयी है। लेकिन निराश न हों, इसका नया ठिकाना बस <a href="http://hindustaniacademy.blogspot.com">यहाँ क्लिक</a> करते ही मिल जाएगा। कष्ट के लिए खेद है। धन्यवाद!
<p><strong>सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी</strong></p>
<p></font></p>
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		<title>&#8216;हिन्दुस्तानी एकेडमी&#8217;</title>
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		<pubDate>Sun, 14 Sep 2008 09:09:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[हिन्दुस्तानी एकेडेमी (इलाहाबाद) हिन्दी प्रेमी भाइयों और बहनों, आज १२-१३ सितम्बर की मध्य रात्रि के समय मैं &#8216;हिन्दुस्तानी एकेडमी&#8217; को अन्तर्जाल पर उतारने का दुस्साहस कर रहा हूँ। जी हाँ, दुस्साहस इस लिए कि इस संस्था का इतिहास जिन लोगों से बना है, उनके व्यक्तित्व के आगे मेरी गिनती सूर्य के आगे एक दीपक की [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><font face="Mangal" size="2">
<p><a href="http://hindustaniacademy.wordpress.com" target="_blank">हिन्दुस्तानी एकेडेमी (इलाहाबाद)</a>
<p><b>हिन्दी प्रेमी भाइयों और बहनों,</b>
<p>आज १२-१३ सितम्बर की मध्य रात्रि के समय मैं <a>&#8216;हिन्दुस्तानी एकेडमी&#8217;</a> को अन्तर्जाल पर उतारने का दुस्साहस कर रहा हूँ। जी हाँ, दुस्साहस इस लिए कि इस संस्था का इतिहास जिन लोगों से बना है, उनके व्यक्तित्व के आगे मेरी गिनती सूर्य के आगे एक दीपक की भी नहीं है। हिन्दी के प्रकाण्ड विद्वानों, शोधकर्ताओं, मनीषियों, और लब्ध-प्रत्तिष्ठ साहित्यकारों की कर्मस्थली रही इस एकेडमीं के बारे में कुछ लिख सकने की क्षमता मुझ जैसे गैर साहित्यिक विद्यार्थी के लिए दुस्साहस ही तो है।
<p>लेकिन मैने इस संस्था में अपनी भूमिका साहित्य लिखने या इसकी समीक्षा करने की नहीं तय की है। बल्कि श्री राज्यपाल महोदय द्वारा इस संस्था के एक गैर साहित्यिक (कोषाध्यक्ष) पद हेतु नामित किए जाने की सहर्ष स्वीकृति के बाद इस उत्कृष्ट प्रांगण में प्रवेश करने का बहाना मिलने पर मैने अपने चिठ्ठाकारी के अत्यल्प अनुभवों का ही प्रयोग कर इस बिसरायी जा रही संस्था को आप सबके ध्यान में लाने और इसके गौरव को नयी ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए आप सभी के सक्रिय योगदान की अपील करने के लिए मैने इस ब्लॉग का माध्यम चुना है।
<p>अतः, हे हिन्दी सेवी ब्लॉगर बन्धुओं एवं अन्यान्य विद्वतजन, मेरा अनुरोध है कि अपनी प्रिय भाषा की उन्नति व प्रगति के लिए आप जो भी और जिस रूप में भी कर रहे हैं, उसकी जानकारी इस मंच पर टिप्पणी के माध्यम से अथवा अपनी रचनाओं को ई-मेल अथवा डाक के माध्यम से संस्था को उपलब्ध कराकर दें। हिन्दी-विमर्ष के इस मंच पर निःस्वार्थ सेवा के उद्देश्य से अवश्य पधारें।
<p>उत्तर प्रदेश शासन के भाषा विभाग द्वारा इस संस्था के माध्यम से निम्न योजनाएं संचालित की जाती हैं:
<ol>
<li>
<p>मौलिक हिन्दी कृतियों में सृजनात्मक साहित्य का प्रकाशन।</p>
<li>
<p>हिन्दी के अलावा अन्य भारतीय तथा विदेशी भाषाओं के काव्य, नाटक व कथा साहित्य का हिन्दी अनुवाद तथा प्रकाशन।</p>
<li>
<p>प्रतिष्ठित विद्वानों तथा साहित्यकारों की व्याख्यानमाला का आयोजन।</p>
<li>
<p>हिन्दुस्तानी त्रैमासिक नाम से साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन।</p>
<li>
<p>उत्कृष्ट कोटि के एवं प्राचीन साहित्यिक संदर्भग्रन्थों के पुस्तकालय का संचालन।</p>
</li>
</ol>
<p>शीघ्र ही यहाँ &#8216;एकेडमी&#8217; में संरक्षित अमूल्य साहित्यिक धरोहर से आप सबको परिचित कराने का क्रम प्रारम्भ किया जाएगा। इससे यदि आप पहले से किसी रूप में जुड़े रहे हों तो अपने संस्मरण भेज सकते हैं। आपके सहयोग का स्वागत है।
<p><i>(&#8216;हिन्दुस्तानी&#8217; त्रैमासिक में प्रकाशित रचनाओं का कोई पारिश्रमिक संस्था द्वारा फिलहाल भुगतान नहीं किया जाता है।)</i><b><br /></b>
<p>ई-मेल: <b><a href="http://us.mc380.mail.yahoo.com/mc/compose?to=hindustaniacademy@gmail.com">hindustaniacademy@gmail.com</a></b>
<p>मेरा मेल:<b> <a href="http://us.mc380.mail.yahoo.com/mc/compose?to=tripathito@gmail.com">tripathito@gmail.com</a></b>
<p>डाक का पता: <b>१२डी, कमला नेहरू मार्ग, इलाहाबाद (उ.प्र.) २११००१</b>
<p>आपसे अनुरोध है कि इस संस्था के बारे में और इसके उद्देश्यों से अपने इष्टमित्रों को अवश्य परिचित कराएं।
<p><b>-सिद्धार्थ </b></p>
<p></font></p>
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		<title>हिन्दी मात्र एक भाषा नहीं है!!</title>
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		<pubDate>Sun, 14 Sep 2008 00:42:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[मित्रों, नमस्कार!!  मेरी क्रिएटिव टीम एक निकट आ रहे हिन्दी दिवस के  मद्देनज़र एक स्लोगन को छोटी सी डिज़ाइन में रूपांतरित किया है. मुझे बड़ी ख़ुशी होगी यदि आप अपने ब्लॉग पर इसे प्रदर्शित करेंगे. आप इसे डाउनलोड कर पिक्चर के रूप में लगा सकते हैं. बड़ा ही अच्छा होगा यदि हम सब मिल कर [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><font size="2" face="Mangal"> </font></p>
<p><font size="2" face="Mangal"><a href="http://sarathi.info/wp-content/uploads/2008/09/hindi-day.jpg"><img src="http://sarathi.info/wp-content/uploads/2008/09/hindi-day-thumb.jpg" style="border-width: 0px; margin: 0px 20px 0px 0px" alt="Hindi Day" width="207" align="left" border="0" height="240" /></a> मित्रों, नमस्कार!!  मेरी क्रिएटिव टीम एक निकट आ रहे हिन्दी दिवस के  मद्देनज़र एक स्लोगन को छोटी सी डिज़ाइन में रूपांतरित किया है. मुझे बड़ी ख़ुशी होगी यदि आप अपने ब्लॉग पर इसे प्रदर्शित करेंगे. आप इसे डाउनलोड कर पिक्चर के रूप में लगा सकते हैं. बड़ा ही अच्छा होगा यदि हम सब मिल कर हिन्दी के हक़ में माहौल बनाएँ.मेरी एड्रेस बुक में जितने भी संभावित पते मिले मैने उन्हें ये विचार भेज दिया है , आप भी इसे अपने अन्य ब्लॉगर मित्रों को भेज सकें तो बड़ी मेहरबानी. </font></p>
<p><font size="2" face="Mangal">एक ही अपेक्षा है इस काम को सब मिल कर आगे बढ़ाएँ,कृपापूर्वक इसके लिये मेरे नाम का ज़िक्र कहीं भी न करें,ये एक बड़ा पवित्र  कार्य है और हम सब की ज़िम्मेदारी है. आशा है आपका सहयोग मिलेगा.<br />
संजय<br />
&#8211;<br />
SANJAY PATEL<br />
Mobile:97525-26881</font></p>
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		</item>
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		<title>भारत की भाषाई चुनौती</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1278</link>
		<comments>http://sarathi.info/archives/1278#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 30 May 2008 04:23:26 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[आज लिखने बैठा तो एक उम्दा एवं सशक्त लेखनमाला मेरी नजर मे आई. प्रस्तुत हैं कुछ उद्धरण &#8212; इस उम्मीद के साथ कि आप पूरी लेखनमाला जरूर पढेंगे: ***** Ask any Bihari student of Delhi University. She/he may be infinitely more, or equally at least, intelligent, hardworking and ambitious but she faces a daily disadvantage [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><font face="Mangal" size="2">
<p>आज लिखने बैठा तो एक उम्दा एवं सशक्त लेखनमाला मेरी नजर मे आई. प्रस्तुत हैं कुछ उद्धरण &#8212; इस उम्मीद के साथ कि आप पूरी लेखनमाला जरूर पढेंगे:</p>
<p></font>
<p>***** <font face="Verdana" size="2">Ask any Bihari student of Delhi University. She/he may be infinitely more, or equally at least, intelligent, hardworking and ambitious but she faces a daily disadvantage if she has had a largely Hindi education. There are no good books on major subjects in ‘national language’ Hindi, classroom lectures and notes are all in English – both making comprehension difficult.</font> [ <a href="http://azadlub.blogspot.com/2008/05/indias-language-challenge.html" target="_blank">भारत की भाषाई चुनौती I</a>]</p>
<p><font face="Mangal" size="2">
<p>***** यह बात सही है कि आप भाषा किसी पर थोप नहीं सकते लेकिन राष्ट्रीय भावना के विकास के सहारे राष्ट्रीय भाषा का विचार धीरे-धीरे अपनी जगह ले सकता है। लेकिन विज्ञान और तकनीक की विचारधारा पर जब तक संप्रभु वर्ग का नियंत्रण बना रहेगा तब तक अंगरेजी को भारतीय भाषायें पदच्युत नहीं कर सकतीं। [<a href="http://azadlub.blogspot.com/2008/05/blog-post_6350.html" target="_blank">अँगरेजी का अंडरवर्ल्ड</a>]</p>
<p>***** अगर आप चाहते हैं कि यह स्थिति बदले तो बाज़ार की शक्तियों से टकराना होगा. अंगरेजी के बाज़ार से लड़े बिना अगर आप भारतीय भाषाओं को प्रतिष्ठा दिलाना चाहते हैं तो वह दिवास्वप्न ही साबित होगा. भारतीय भाषाओं के पक्ष में युद्ध छेड़ने वालों के रवैये से स्पष्ट होता है कि अंगरेजी बाज़ार की भाषा बनी रहे तथा हिन्दी व अन्य भारतीय भाषाएं अस्मिता की भाषा के रूप में प्रतिष्टित हों. विचार करने की बात है कि अगर अंगरेजी बाज़ार और अच्छे रोज़गार (ऊंची नौकरी और बड़े कारोबार) की भाषा बनी रहती है तो आप समाज के लोगों पर कैसे दबाव डालेंगे कि वे अपने बच्चों को मातृभाषा (हिन्दी, मराठी, बांगला, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ आदि) में शिक्षा दिलाएं? [<a href="http://azadlub.blogspot.com/2008/05/blog-post_29.html" target="_blank">अंगरेजी का खतरनाक अंडरवर्ल्ड (अन्तिम)</a>]</p>
<p></font></p>
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		</item>
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		<title>इंस्टेंट कविता मंत्र</title>
		<link>http://sarathi.info/archives/1275</link>
		<comments>http://sarathi.info/archives/1275#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 27 May 2008 03:30:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
				<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[मैं ने पिछले साल कुछ समय निकालकर समकालीन हिन्दी लघु कविताओं का एक विश्लेषण किया था. विश्लेषण का निष्कर्ष यह था कि हिन्दी चिट्ठाजगत में छपने वाले लगभग 20% बहुत ही उम्दा कोटि की होती हैं. ये कवितायें हृदय को छू जाती हैं एवं पाठक को एकदम खुशी, दु:ख, देशप्रेम, या तमाम अन्य भावों से [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><font face="Mangal" size="2">
<p>मैं ने पिछले साल कुछ समय निकालकर समकालीन हिन्दी लघु कविताओं का एक विश्लेषण किया था. विश्लेषण का निष्कर्ष यह था कि हिन्दी चिट्ठाजगत में छपने वाले लगभग 20% बहुत ही उम्दा कोटि की होती हैं. ये कवितायें हृदय को छू जाती हैं एवं पाठक को एकदम खुशी, दु:ख, देशप्रेम, या तमाम अन्य भावों से उद्वेलित कर जाती हैं. इस तरह की काफी कवितायें हिन्द युग्म पर एवं कई व्यक्तिगत चिट्ठों पर देखे जा सकते हैं.</p>
<p>इन में से कुछ कविताओं को लेखकों की अनुमति से मैं ने सारथी पर प्रकाशित भी किया था. इतना ही नहीं बल्कि इस श्रेणी की बहुत सी कविताओं को &quot;काव्य अवलोकन&quot; में प्रस्तुत किया था एवं पाठकों ने उन कविताओं को बहुत पसंद किया था. </p>
<p>बाकी बचे 80% में से आधे (कुल कविताओं के लगभग 40%) रचनाकारों की रचनाधर्मिता कम एवं किसी भी तरह से कविता करने की इच्छा को दिखाते हैं. इनका विश्लेषण करने पर लगा कि इस तरह की कविताओं की रचना तो बहुत आसान है. बस आपको इसका मंत्र मालूम होना चाहिये. प्रस्तुत है इंस्टेंट कविता मंत्र नम्बर 1.</p>
<p>कविता की नायिका के रूप में स्त्री या प्रेमिका को ले लीजिये. उसके बाद निम्न भावनाओं को व्यक्त करने वाले कुछ अर्ध वाक्य एक के बाद एक पिरो दें (पूर्ण वाक्य न लिखें, क्योंकि वह तो गद्य हो जायगा, या आपकी पोल खुल जायगी).</p>
<ul>
<li>विरह </li>
<li>वेदना </li>
<li>अनिद्रा </li>
<li>याचना </li>
<li>प्रत्युत्तर </li>
<li>संतृप्ति </li>
</ul>
<p>लगभग दसेक कवितायें अपने चिट्ठे पर चला देने के बाद आप इन बिंदुओं में मनचाहे उपबिन्दु लगा कर लघुकाव्य से लेकर महाकाव्य तक के अनुभव से होके गुजर सकते हैं. </p>
<p>और भी कई मंत्र एवं उपंत्र हैं, लेकिन सिर्फ एक परेशानी है &#8212; इस तरह की कविताओं को पाठक के रूप में वे ही चिट्ठाकार मिलते हैं जो&#160; स्वयं की रचनाओं के लिये इस तरह के टोटके से आगे नहीं बढ पाते हैं.</p>
<p> </font></p>
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