पिछले दो दिन काफी कविताये पढने का अवसर मिला. गजब की कवितायें हैं कई रचनाकरों की. प्रस्तुत है उन में से पांच की कुछ पंक्तियां. उम्मीद है आप भी पढेंगे.
यह पैचाशिक नरमेघ
पैदा कर गया है, दहशत जन जन के मन में
इन बूढ़ों की तो उड़ ही गयी है नींद तब से
बाकी नहीं […]

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