Posted May 29th, 2007 by Shastri JC Philip
पिछले दो दिन काफी कविताये पढने का अवसर मिला. गजब की कवितायें हैं कई रचनाकरों की. प्रस्तुत है उन में से पांच की कुछ पंक्तियां. उम्मीद है आप भी पढेंगे.
यह पैचाशिक नरमेघ
पैदा कर गया है, दहशत जन जन के मन में
इन बूढ़ों की तो उड़ ही गयी है नींद तब से
बाकी नहीं बचे हैं पलकों के निशान
देखते हैं दृगों के कोर ही कोर
देती है जब तब पहरा पपोटों पर
सील मुहर सूखी कीचड़ की. [पूरी कविता पढें ...] Read the rest of this entry »
Posted May 29th, 2007 by Shastri JC Philip
“सारथी अवलोकन” शास्त्री जे सी फिलिप द्वारा चुने चिट्ठों एवं अन्य विषयों की जानकारी नियमित रूप से प्रकाशित करता है — इस उम्मीद के साथ कि यह स्वान्त: सुखाय कार्य जनोपयोगी भी सिद्ध होगा. हिन्दी एवं हिन्दुस्तान की उन्नति के लिये यह जरूरी है कि हम एक दूसरे को प्रोत्साहित करें, एवं एक दूसरे के ज्ञान, गुण, एवं सामाजिक योगदान जन जन की नजर में लायें.
इतिहास/पुराने पन्ने
अपने ग़म का मुझे कहां ग़म है
कथा साहित्य
प्यार हो तो ऎसा !!!
कथा साहित्य (लघु कथा)
दो मजेदार कहानियाँ
काव्य
बहता पानी ही तो नदी कहलाता है
मातृ दिवस: नमन
माली Read the rest of this entry »
Posted May 29th, 2007 by Shastri JC Philip
(ईसा मेरे इष्टदेव हैं. उनकी यह जीवनी मेरी अपनी कृति है जो जन जन को समर्पित है)
लगभग दो सहस्त्र साल पूर्व मध्य-पूर्व में एक छोटे से गांव में मरियम नामक एक यहूदी युवती रहती थी. बाल्यकाल से ही वह बहुत ईश्वर-भक्त थी और उसके रिश्ते के अन्य परिवारों के लोग, यहां तक कि उसके गांव के सभी लोग उसकी ईश्वर-भक्ति के बारें में जानते थे एवं एक दूसरे से कहा करते थे. उसका अधिकतर समय अपने पिता एवं माता का हाथ बटाने में निकल जाता था. बाकी समय वह अपने दादा दादी एवं अन्य बुजुर्गों से धार्मिक बातें सुनने के लिये बिताती थी.
यहूदी उस समय अपने ही देश में पराये थे क्योंकि उनके ऊपर रोमी साम्राज्य का शासन था. रोमी लोग बहुत महत्वाकांक्षी थे एवं यहूदियों पर कडाई से शासन करते थे. इतना ही नही, वे बडी कडाई के साथ यहूदियों से कर वसूल करते थे. इस कार्य के लिये वे लुटेरे किस्म के यहूदियों का उपयोग करते थे, अत: कोई भी इस शोषण से बच नहीं पाता था. उनके अत्याचार से यहूदियों के देशों मे त्राहि त्राहि मची हुई थी, एवं हर धार्मिक यहूदी हर दिन ईश्वर से प्रार्थना करता था कि वे भक्तों को इस पीडा से छुटकारा दें. उनका अटूट विश्वास था कि एक न एक दिन ईश्वर उनको एक मुक्तिदाता के द्वारा मुक्ति प्रदान करेंगे. उनके इस विश्वास के पीछे भी एक चरित्र है. यहूदियों का धर्मग्रन्थ तौरेत* के अनुसार मनुष्य जब ईश्वर की आज्ञा का उल्लंघन कर के पापी बन गया था तभी ईश्वर ने यह वचन दिया था कि वे एक मुक्तिदाता को भेजेंगे. उन लोगों का विश्वास था कि यह मुक्तिदाता उन लोगों को पाप की भयानकत से एवं रोमी साम्राज्य के अत्याचार से भी छुडायेंगे. मरियम के घर-गांव के बुजुर्ग बात बात पर यह विश्वास दुहराते थे, एवं बात उस भक्त कन्या के मन में घर कर गई थी कि वह अपनी आंखों से इस मुक्तिदाता को देखना चाहती थी. उनकी सेवा करने का अवसर उस जैसी ईश्वर-भक्त यहूदी के जीवन का सबसे बडा भाग्य होगा. Read the rest of this entry »
Posted May 26th, 2007 by Shastri JC Philip
हिन्दी चिट्ठों से चुने हुए कुछ उद्दरण. इन लेखों/कविताओं ने मुझे प्रेरणा दी, और मुझे उम्मीद है कि इन्हे पढ कर आप भी लभान्वित होंगे:
*** छ्त्तीसगढ़ के किसी शहर में एक न्यायाधिश महोदय को टहलते वक्त किसी आवारा घोड़े ने काट लिया. इससे नाराज माननीय न्यायाधिश महोदय ने शहर के सभी आवारा घोड़ों को पकड़ने का आदेश दे दिया. नगर निगम के कर्मचारी भाग भाग कर घोड़ों को पकड़ने लगे. आनन फानन में इनाम भी घोषित कर दिया गया: प्रति घोड़ा पकड़वाई: रुपये ३०० मात्र. ७ घोड़े पकड़े जा कर कांजी हाऊस (नगर निगम द्वारा संचालित आवारा पशुओं की जेल) में बंद हैं. [पूरा लेख पढें ...] Read the rest of this entry »