Posted July 31st, 2007 by Shastri JC Philip
आज इन्स्क्रिप्ट से सम्बंधित रवि रतलामी का एक उपयोगी, सचित्र, एवं वृहद लेख मेरी नजर में आया जहा वे लिखते हैं:
“अगर लिनक्स (या विंडोज़) के डिफ़ॉल्ट हिन्दी की मैप (इनस्क्रिप्ट) पर थोड़ी सी भी गहरी ज्ञान-चक्षु डालें तो हमें मजेदार बात पता चलेगी, जो कि इस हिन्दी कुंजी पट को बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल में, तथा इसे सीखने में न सिर्फ सहायक होगी बल्कि टच-टाइपिंग के रुप में महारत हासिल करने में भी हमें आसानी होगी. और इसी वजह से इसे डिफ़ॉल्ट रुप में रखा गया है (इनस्क्रिप्ट की एक और खासियत है कि यदि यह आपको याद हो जाए तो इस कुंजी पट से भारत की अन्य भाषाओं में भी आँख मूंदकर टाइप कर सकेंगे).”
यह लेख हर हिन्दीप्रेमी एवं हिन्दीप्रचारक के लिये बहुत उपयोगी सिद्ध होगा. इस सचित्र लेख को यहां पढे: आइए, इनस्क्रिप्ट सीखें
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Posted July 30th, 2007 by Shastri JC Philip
व्यक्तित्व विकास वीडियो 002: पूरे वीडियो को अपने संगणक पर उतरने के लिये लगभग 10 मिनिट का समय दीजिये. वीडियो एवं आडियो मुक्त रचनात्मक आम प्रतिलिपि अधिकार (Creative Commons Copyright) के अंतर्गत है अत: आप बिना अनुमति इसका उपयोग सीडी पर, जाल पर, इत्यादि कर सकते हैं. किसी भी तरह का परिवर्तन निषिद्ध है. [यदि लोड होने में किसी तरह की तकलीफ होती है तो इस लेख के शीर्षक को चटका कर इस लेख को पुन: लोड कर लीजिये. इससे आपके संगणक को इशारा मिल जायगा कि आप इस वीडियो को लोड करना चाहते हैं]
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Posted July 29th, 2007 by Shastri JC Philip

मित्रों..वंदेमातरम: जुलाई का अंतिम सप्ताह प्रारंभ होने वाला है.नज़दीक आ रहा है अगस्त का महीना…स्वातंत्र्य उत्सव इस बार दो संयोग लेकर आ रहा है.प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के डेढ़ सौ वर्ष पूर्ण हो रहे है और इस बार का स्वतंत्रता दिवस हमारे लिये हीरक जयतीं वर्ष की सौग़ात लेकर आ रहा है.यानी आज़ादी के साठ वर्ष पूर्ण हो रहे हैं इस 15 अगस्त को.मै एक छोटी सी एडवरटाईज़िंग एजेंसी चलाता हूँ ..मेरी क्रिएटिव टीम ने इन दो राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रसंगों के लिये शुभंकर (लोगो) रचे हैं .




इन्हे मै ब्लागर बिरादरी को सौंपते हुए अति-प्रसन्नता का अनुभव करता हूँ.राष्ट्रप्रेम कभी भी मेरे लिये पार्ट-टाइम पसंद या चोचला नहीं रहा है और मेरा मानना है कि मुल्क से मुहब्बत किसी उत्सव और तारीख़ की मोहताज नही रहती.ब्लाँग पर जारी करने का उद्देश्य है कि आप सब इसे अपने ब्लाँग पर बेझिझक इस्तेमाल करें..स्टेशनरी पर लगाएं..स्टीकर बनाएं…पोस्टर बनाएं..दफ़्तर में लगाएं ..घर पर सजाएं…कोई काँपी राइट नहीं ..कोई कमर्शियल अपेक्षा नहीं….किसी नामोल्लेख की ज़रूरत नहीं…जितनी जल्द यह सब होगा इन दो गौरव प्रसंगों की भाव-भूमि बनेगी.
बस आशा इतनी भर है कि आपको ये प्रयास ठीक ठाक लगे तो दो प्यार भरे बोल लिख भेजियेगा..हमारी टीम को मेहनत सार्थक हो जाएगी..यदि आप पृथक से इसे ई-मेल पर मंगवाना चाहते हैं तो मुझे विशेष रूप से adraag@gmail.com पर सूचित करें.ब्लाँग बिरादरी से मिले स्नेह के एवज़ में ये प्रयास छोटा ज़रूर है लेकिन इसके पीछे छुपा राष्ट्रप्रेम काजज़्बा बडा़ है …नेक है…जय हिंद.
[यदि आपको अपने चिट्ठे पर इन्हें स्थापित करने में कोई परेशानी हो तो हमारे अगले लेख में इसकी पूरी जानकारी आवश्यक कोड के साथ देखें]
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Posted July 28th, 2007 by Shastri JC Philip
हँस और सरस्वती के साथ जिस महत्वपूर्ण हिन्दी पत्रिका को विशेष आदर की दृष्टि से देखा / पढा़ जा रहा है उसमें से एक है इन्दौर से श्री मध्य भारत हिन्दी साहित्य समिति द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका वीणा.हिन्दी साहित्य समिति की गतिविधियों से हिन्दी जगत बाख़बर है फ़िर भी यहाँ यह दोहराने में कोई हर्ज नहींझोगा कि महात्मा गाँधी के पावन चरण दो बार(1918 और 1935) इस संस्था के परिसर में पडे़.अस्सी बरस की इस पत्रिका ने कई वित्तीय और प्रकाशकीय उतार चढ़ाव देखे हैं फ़िर भी यह इसका पुण्य और हिन्दी सेवियों की लगन है कि यह नियमित रूप से प्रकाशित होती रही है.वरिष्ठ साहित्यकार डाँ श्यामसुंदर व्यास स्वास्थ्यगत कारणों से इसके संपादक पद से अभी अभी निवृत्त हुए है और डाँ राजेंद्र मिश्र ने यह ज़िम्मेदारी बख़ूबी सम्हाल ली है. उनके साथ पदेन संपादक के रूप में पं.गणेशदत्त ओझा,उप-संपादक के रूप में श्री सूर्यकांत नागर और राकेश शर्मा,प्रबंध संपादक के रूप में प्रो.चन्द्रशेखर पाठक की ऐसी टीम है जो पूरी लगन और निष्ठा से हिन्दी के इस पावन प्रकल्प में अपना सहयोग दे रही है.संपादक डाँ.राजेन्द्र मिश्र ने आते ही अपनी योग्यता को साबित किया है और वीणा को नया कलेवर देकर इसके पन्नों मे जैसे नई रागिनी छेड़ दी है..
अपने ब्लाँग पर ये ख़बर जारी करने का निमित्त ये भी है कि हमारे हिन्दी ब्लाँगर बिरादरी वीणा जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशन के बारे में जाने.बडे़ सादा परिवेश में प्रकाशित होने वाली वीणा के पास इस काँर्पोरेट परिदृष्य में ऐसा कोई तामझाम या प्रमोशन कैम्पेन हे नहीं जिससे वह अपने आपको व्यक्त कर सके. ब्लाँग की दुनिया निश्चित रूप से हिन्दी प्रेमियों की एक ताक़त बन कर उभरी है और वीणा के शहर का एक साधारण सा ब्लाँगर होने के नाते मेरा नैतिक कर्तव्य है कि मै और आप ..हम सब वीणा के लिये जो कुछ कर सकते हों करें.
आपसे ये भी गुज़ारिश कर रहा हूं कि मेरी इस प्रविष्टि को बाक़ायदा काँपी कर अपने ब्लाँग पर भी सूचना(और बेझिझक आपकी अपनी प्रविष्टि या सूचना बज़रिये ई-मेल) के रूप में जारी करें.
इसमें हमारे एग्रीगेटर और चर्चाओं में रहने वाले और लोकप्रिय चिट्ठाकार खा़सी मदद कर सकते हैं .
सदस्य बनकर भी सहयोग किया जा सकता है.नीचे इसके बारे में विवरण दे रहा हूँ:
प्रकाशित सामग्री में से कुछ बानगियाँ दे रहा हूं
जुलाई अंक के संपादकीय से एक अंश
(भावभूमि :हाल ही में न्यूयार्क में सम्पन्न हुआ विश्व हिन्दी सम्मेलन)
अगर हिन्दी को आना है तो सबसे पहले उसे स्कूलों में एक शिक्षा माध्यम के रूप में अपनाना होगा नहीं तो विश्व भाषा के लिये किए जाने वाले प्रयास एक तमाशा बन कर रह जाएंगे.हिन्दी विश्व की भाषा बन जाएगी , भारत की भाषा नहीं और जब तक वह भारत की भाषा नहीं बनती,तब तक उसके विश्व भाषा बनने का कोई भी अर्थ नहीं है.जब तक हिन्दी दिल्ली में नही होगी तब तक उसका लंदन या न्यूयार्क में होना प्रासंगिक नहीं है.
- राजेन्द्र मिश्र.
लघुकथा : सनकी
ब्रीफ़केस बंद करता हुआ वह जैसे ही बाहर निकला, अर्दली ने झुककर सलाम किया.
अर्दली को उसने इशारे से बुलाया तथा बीस रूपये का नोट बतौर बख्शीश देते हुए बोला…चाय पानी के लिये.
साहब ये तो बहुत ज़्यादा है…!
उसके ईमानदार चेहरे की ओर उसने मुग्धभाव से देखा तथा बीस का नोट लेकर
बदले में पचास का थमाते हुए गाडी़ स्टार्ट कर दी.
स्टेयरिंग घुमाते हुए वह सोचने लगा…’काश ! अंदर की कुर्सी पर अर्दली जैसा आदमी होता !
और अर्दली सोचने लगा …काश ! ख़ुदा ने हर आदमी को इस जैसा बनाया होता.
-सतीश दुबे
इसी अंक के अन्य ह्स्ताक्षर : गुरूदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर,स्वामी वाहिद क़ाज़मी,
डाँ.माधवराव रेगुलपाटी,सूर्यकांत नागर,जवाहर चौधरी,पदमा सिंह.
हिन्दी मासिक पत्रिका : वींणा
संपादक:डाँ राजेन्द्र मिश्र.
मोबाइल: 09302104498
शुल्क :
विदेशों में : 20 डाँलर
वार्षिक मूल्य : रू.150/-
आजीवन : रू.500/-
(ध्यान रहे 7 अगस्त 2007 से यह शुल्क बढाकर रू.1500/- किया जा रहा है)
अपना ड्राफ़्ट ’वीणा मासिक पत्रिका के नाम से भेजें,इन्दौर मे देय)
संपर्क:
श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति
11 रवीन्द्रनाथ टैगोर मार्ग
इन्दौर 452 001 मध्य प्रदेश
दूरभाष: 0731-2516657
(अमूमन संपादकीय टीम शाम 5 बाद उपलब्ध रहती है
कोई ई मेल आई डी नहीं है..कोई संदेश हो तो मेरे ईमेल
पर भेज दें मै उसे पहुँचा दूंगा:sanjaypatel1961@gmail.com
[http://joglikhisanjaypatelki.blogspot.com/2007/07/blog-post_27.html]
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