आज लगभग हर सफल व्यक्ति समय की पाबंदी का रोना रोता है. उनका सोचना है कि शायद समय की कमी के कारण वे पाबंद नहीं रह पाते है. लेकिन यह सोचना गलत है. जीवन में समय की पाबंदी विकसित करने के लिये कई तरीके है, जिन में से एक है अपनी घडी को पांच मिनिट आगे रखना. लाखों लोगों ने इसे अजमाया है एवं इससे उनको बहुत फायदा हुआ है. 1970 से, जब मुझे मेरी पहली घडी मिली थी, यह मेरी आदत है. अपनी घडी हमेशा पांच मिनिट आगे रखता हूं. इस पांच मिनिट ने हजारों बार मेरी मदद की है. आप भी आज से इसे अजमा कर देखें. इससे कोई फायदा न हुआ तो आप कुछ नहीं खोते. लेकिन यदि फायदा हुआ तो जीवन में आप एक अच्छी बात और प्राप्त कर लेंगे. आपने चिट्ठे पर विदेशी हिन्दी पाठकों के अनवरत प्रवाह प्राप्त करने के लिये उसे आज ही हिन्दी चिट्ठों की अंग्रेजी दिग्दर्शिका चिट्ठालोक पर पंजीकृत करें!
असल में समय का पाबंद न रहना आदत की बात है, अवसर की नहीं. लेकिन इस कारण सारे विश्व में हिन्दुस्तान का अपमान होता है. मैं ने कई देशों में लोगों को यह कहते सुना है कि भारतीय लोग समय के पाबंद नहीं होते.
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