घडी क्यों 5 मिनिट आगे रखें??

आज लगभग हर सफल व्यक्ति समय की पाबंदी का रोना रोता है. उनका सोचना है कि शायद  समय की कमी के कारण वे पाबंद नहीं रह पाते है. लेकिन यह सोचना गलत है.

Rush असल में  समय का पाबंद न रहना आदत की बात है, अवसर की नहीं. लेकिन इस कारण सारे विश्व में हिन्दुस्तान का अपमान होता है. मैं ने कई देशों में लोगों को यह कहते सुना है कि भारतीय लोग समय के पाबंद नहीं होते.

जीवन में समय की पाबंदी विकसित करने के लिये कई तरीके है, जिन में से एक है अपनी घडी को पांच मिनिट आगे रखना. लाखों लोगों ने इसे अजमाया है एवं इससे उनको बहुत फायदा हुआ है. 1970 से, जब मुझे मेरी पहली घडी मिली थी, यह मेरी आदत है. अपनी घडी हमेशा पांच मिनिट आगे रखता हूं.  इस पांच मिनिट ने हजारों बार मेरी मदद की है. आप भी आज से इसे अजमा कर देखें. इससे कोई फायदा न हुआ तो आप कुछ नहीं खोते. लेकिन यदि फायदा हुआ तो जीवन में आप  एक अच्छी बात और प्राप्त कर लेंगे.

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एक अनोखा तोहफा चिट्ठाकारों के लिये

आज शाम को अपने सर्वर का लॉग जांच रहा था तो एक नया जालस्थल दिखा. जाकर देखा तो पता चला कि “चिट्ठाजगत” चुपके से एक और नया एग्रीगेटर तय्यार कर रहा है. उनका हिन्दी एग्रीगेटर है www.Chitthajagat.in लेकिन नया एवं समांतर एग्रीगेटर है www.Chitthajagat.com

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यह एग्रीगेटर “चिट्ठाजगत” की समग्री को पूरी तरह से एंग्लो हिन्दी में प्रस्तुत करता है. मेरी नजर में यह समांतर एग्रीगेटर हिन्दी जगत के लिये एक वरदान सिद्ध होगा क्योंकि हमारे संभावित पाठकों में से हमको सिर्फ 20% मिल रहे है. बाकी 80% तक पहुंचने के लिये यह जरूरी था.

हिन्दी बोलनेसमझने वालों की संख्या 60 से 70 करोड है लेकिन उनके बीच संगणक/जाल का प्रचार अभी हो ही रहा है. अत: मेरे मूल्यांकन के अनुसार हिन्दी चिट्ठाकारों को अपनी मेहनत के अनुपात में पाठक नहीं मिल रहे हैं. लेकिन जैसा मैं ने कई बार कहा है, पश्चिमी राज्यों में हिन्दीविद्यार्थीयों की संख्या बहुत अधिक है, संगणक/जाल का प्रसार भी बहुत अधिक है, अत: कम से कम चार गुने और पाठक वहां से आकर्षित किये जा सकते है. चिट्ठाजगत का यह एंग्लो-हिन्दी एग्रीगेटर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है.

दिल थाम कर बैठें. पता नही चिट्ठाजगत के कर्ता इस की घोषणा कब करें, लेकिन इसका असर एक महीने से कम में लगभग हर हिन्दी चिट्ठे पर नये पाठकों के रूप में दिखने लगेगा.

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हिंदी टूलबार बन गया ’पिटारा’

यूनुस भाई ने हिंदी टूलबार के बारे में लिखा:

कमाल है । इत्‍ती सारी चीज़ें एक साथ । ये तो जादू का पिटारा है ।

तो हमने सोचा क्यों न इस टूलबार का नाम पिटारा रख दिया जाये। तो टूलबार को पहचान देने के लिये यह नाम हमें बहुत सही लगा। अब से हिंदी टूलबार का नाम हो गया है ’पिटारा’।

अब कुछ नया बता दिया जाये- मनोरंजन मीनू में अब अंग्रेजी समावार चैनल एनडीटीवी 24X7 लाइव जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही आपके सप्ताहंत के लिये ’दिलवाले दुलहनिया ले जायेंगे’।

आपने अपने सभी मित्रों को हिंदी टूलबार पिटारा के बारे में तो बता दिया है ना?

अपने मित्रों को बतायें

जोगलिखी एवं संजय बेंगाणी

Joglikhi [सफल चिट्ठाकारी परंपरा] मैं नयपुराने चिट्ठाकारों से अकसर कहता हूं कि चिट्ठाजगत में जनप्रिय होने एवं सफलता प्राप्त करने के लिये वे हफ्ते में कम से कम पांच बार लिखा करें. अकसर लोग जवाब देते हैं कि यह एक असंभव काम है.

असंभव इसलिये लगता है कि लोग 1000 से 2000 शब्दों के लेख लिखना चाहते है. चिट्ठाजगत पर यह एक बेवकूफी का काम है, क्योंकि इतने बडे लेख पढने का समय बहुत कम लोगों के पास होता है. अनुसंधान बताते हैं कि आदर्श चिट्ठा प्रविष्ठि 200 शब्द या उससे कम लम्बाई की होनी चाहिये. अधिकतम 300 शब्द. लेकिन लोग कहते हैं कि 200 या 300 शब्दों में कुछ भी नहीं किया जा सकता है. यह एक गलत सोच है.

sanjaybengani-48 एक अच्छा चिट्ठाकार 200 शब्दों में बहुत कुछ कर सकता है. अधिकतर सफल चिट्ठाकार ऐसा ही करते हैं. हिन्दी चिट्ठों में इसका एक ताजा उदाहरण है संजय बेंगाणी का जोगलिखी. कम से कम शब्दों में अधिकतम जानकारी. इनका लेख “क्यों-कैसे क्या, बस हो गया…” 200 शब्दों से कम में सटीक लेखन का एक ज्वलंत उदाहरण है.

यदि हम सब इस तरह लिखने लगें तो अधिकतम कुल 1500 शब्दों मे (5 छोटी प्रविष्ठियां, 2 कुछ और बढी प्रविष्ठियां) एक हफ्ते का काम चल जायगा, पाठको को सहूलियत होगी, एवं अधिक पाठक आकर्षित होंगे. एक चित्र और जोड दें तो सोने में सुहागा हो जायगा.

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