मेरे लेख लुप्त होती सिक्का-संपदा !, क्यों चोरी हो रही है प्राचीन संपदा? एवं पी एन सुब्रमनियन जी के लेख प्राचीन मूर्तियों की तस्करी से संबंधित कुछ अनुरोध है पाठकों से:
- आपके शहर में यदि कोई लुप्त होती या नजरअंदाज हुई एतिहासिक मूर्ति, भवन, मंदिर, मठ, या और कुछ है तो इसके बारे में अपने चिट्ठे पर एक सचित्र आलेख जरूर दें.
- आपके पास चिट्ठा नहीं है तो यह आलेख छपने के लिये चित्र सहित सारथी को भेज दें.
- यदि आपके शहर में, गांव में, या इनके आसपास प्राचीन मूर्तियां फैली पडी हों तो कृपया किसी संग्रहालय, संस्था, मंदिर आदि की मदद से उनको सुरक्षित स्थान पर रखवाने की व्यवस्था करें. गांवों में पंचायत की मदद से इनको सुरक्षित करने के उपाय (कम से कम उनको एक जगह एकत्रित करने के द्वारा) किया जा सकता है.
- कृपया मूर्तियों के लिये किसी भी व्यक्ति को अवैध खुदाई न करने दें.
- यदि आपके या आपके किसी मित्र के पास प्राचीन भारतीय सिक्के हों तो कृपया या तो उनके बारे में अपने चिट्ठे पर लिखें या आलेख सारथी को भेज दें.
- यदि उन सिक्कों के बारे में आपको जानकारी न हो तो स्पष्ट चित्र लेकर सारथी को भेज दें, हम उन सिक्कों को पहचानने में आपकी मदद करेंगे.
- यदि कोई भी व्यक्ति सिक्के बेचना चाहता हो तो विदेशियों के हाथ न दें. पहली बात, यह एक राष्ट्रीय लज्ज की बात होगी कि हम अपनी धरोगर गैर व्यक्ति को बेच रहे हैं. दूसरी बात, ऐसा करने से हमारी प्राचीन धरोहर लुप्त हो जाती है, जो किसी भी देशप्रेमी व्यक्ति को नहीं करना चाहिये.
- यदि आप किसी देशप्रेमी विक्रेता को नहीं जानते तो सारथी को लिखें. हम ऐसे विक्रेताओं से आपका परिचय करवा देंगे जो किसी भी हालत में देशीय धरोहर को विदेश जाने नहीं देंगे बल्कि देशप्रेमी सिक्काप्रेमियों को ही देंगे.
- यदि कोई व्यक्ति सिक्कों को दान करना चाहता हो तो कई भारतीय सिक्का-संस्थायें हैं जो इनको अपने संग्रहालय स्थान देंगे एवं इस धरोहर को भावी पीढियों के लिये सुरक्षित कर देंगे.
हिन्दुस्तान की प्राचीन धरोहर को सुरक्षित करना हर देशप्रेमी हिन्दुस्तानी की जिम्मेदारी है. हम में से यदि हर कोई अपनी जिम्मेदारी समझे तो बूंद बूद से घट बहुत जल्दी भर सकता है.
पुनश्च:
इतने महत्वपूर्ण विषय को उठाने के लिये धन्यवाद! इसी के साथ मैं यह अनुरोध करूंगा कि आपके आस-पास ‘कोई’ भी चीज विलुप्त होने की कगार पर हो तो उसका शीघ्रातिशीघ्र दस्तावेजीकरण (डॉकुमेन्टेशन) कर लेना चाहिये। इससे वह परोक्ष रूप से ‘अमर’ हो जाती है। उदाहरण के लिये आपके क्षेत्र में पुराने घरों की डिजाइन में क्या-क्या पहलू हुआ करते थे? आपके गाँव का कोई व्यक्ति विशेष ढंग से चारपाई बुनता था; कोई विशेष ढंग से टोकरी बनाता था; कोई दाई बच्चा पैदा कराने का विशेष तरीका इस्तेमाल करती थी, आदि। यह मान लीजिये कि आगे ये सब बहुत उपयोगी होंगे। इन विधियों को खोजने में लाखों लोगों ने माथा-पच्ची किया होगा; लाखों साल लगे होंगें। हम इन्हें यों ही विलुप्त कैसे होते देख सकते हैं? वो भी कम्यूटर के इस युग में? जबकि फोटो लेना और दस्तावेज बनाना बायें हाँथ का खेल हो गया है। (अनुनाद सिंह)
यदि आपको टिप्पणी पट न दिखे तो आलेख के शीर्षक पर क्लिक करें, लेख के नीचे टिप्पणी-पट दिख जायगा!!
Article Bank | Net Income | About India



