रोजगार

क्षण भर में
नेता जी ने
कर दिया हल
सारी बेरोजगारी का,
यह कह कर कि
"क्यों रोते हैं
ये बेरोजगार.
अरे बेरोजगारी ही तो,
उनका है रोजगार.
अत: कैसे हुए वे बेरोजगार"

दर्शक कायल हो गये,
अपने नायक के सामर्थ की.
लेकिन मजा बिगाड दिया
एक बेरोजगार ने
जब आगे बढ कर
पूछा उसने कि,
"इतना आसान रोगगार है यह
तो क्यों नही सुझाते आप
पहले अपने बच्चों को यह हल".

 

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शोकदिवस !!!

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शोकदिवस !!

शोकदिवस !!

शोकदिवस !!

शोकदिवस !!

 

आज राष्ट्रीय स्तर पर शोक मनाने की जरूरत है.

बम्बई में जो कुछ हुआ वह भारतमां के हर बच्चे के लिये व्यथा की बात है!

राष्ट्रद्रोहियों को चुन चुन कर खतम करने का समय आ गया है!!

शायद एक बार और कुछ क्रांतिकारियों को जन्म लेना पडेगा !!!

शोक!शोक!शोक!
किस बात का शोक?
कि हम मजबूत न थे
कि हम सतर्क न थे
कि हम सैंकड़ों वर्ष के
अपने अनुभव के बाद भी
एक दूसरे को नीचा और
खुद को श्रेष्ठ साबित करने के
नशे में चूर थे।
कि शत्रु ने सेंध लगाई और
हमारे घरों में घुस कर उन्हें
तहस नहस कर डाला।

अब भी
हम जागें
हो जाएँ भारतीय
न हिन्दू, न मुसलमां 
न ईसाई
मजबूत बनें
सतर्क रहें
कि कोई
हमारी ओर
आँख न तरेरे।
दिनेशराय द्विवेदी

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बढई जिसे कीलें नहीं चाहिये!

Roof Picture By: Shabbir Siraj (केरल का एक घर एवं साथ लगा तालाब)

 

अनुनाद जी एवं अन्य मित्रों ने पिछले दिनों सारथी में याद दिलाया था कि लुप्त होती भारतीय कलाओं के बारे में लिख कर उनकी जानकारी भावी पीढियों के लिये सुरक्षित किया जाये. यह लेख उसके उत्तर में लिखा गया है.

आज से कुछ साल पहले केरल यात्रा के दौरान एक मित्र के घर में एक बढई को एक बेंच बनाते देखा. वह लगभग सारे दिन काम पर लगा  रहा, लेकिन मुझे ताज्जुब हुआ कि उसके पास एक भी कील नहीं था. शाम तक बेंच बन गया लेकिन उसने उस मजबूत बेंच को बनाने के लिये एक भी कील का प्रयोग नहीं किया.

पूछने पर पता चला कि केरल के बढई लोग लकडी के तानेबाने इस सफाई से काट कर खांचों में फंसा देते हैं कि कील की जरूरत नहीं पडती. इसके एक और उदाहरण के लिये मेरे मित्र ने मुझे केरल का एक पुराना मकान दिखाया. इसकी छत मिट्टी की पकी पटियों से बना है. ये पटियें लकडी के अतिविशाल फ्रेम पर टिकी रहती हैं.

मजे की बात यह है कि इस अतिविशाल फ्रेम के सारे तानेबाने बिना कीलों के प्रयोग के जोडे जाते हैं. इन बढइयों की देशी त्रिकोणमिती ऐसी गजब की है कि सारे टुकडे खांचों में फंस कर एक मजबूत फ्रेम बनाते हैं. इतना ही नहीं, पटियों के हजारों किलोग्राम वजन को बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से संतुलित करता है.

मेरा पैतृक भवन इस तरह का था. लेकिन वर्तमान मकान बनाते समय ऐसा बनाने की कोशिश की तो पता चला कि इस कला के जानकार कम बचे हैं. यह भी पता चला कि कोई जानकार मिल भी जाये तो लकडी इतनी महंगी हो गई है कि दीवाला निकल जाये. अंत में हार कर कंक्रीट का छत बनवा लिया.

उन महान बढईयों को मेरा सलाम जिनके हाथों में जादू था!!

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तीन हीरे — अनुनाद जी के खजाने से!!

अनुनाद जी का चिट्ठा हर हिन्दी एवं हिन्दुस्तान प्रेमी के लिये एक नियमित पडाव होना चाहिये. उनके चिट्ठे से तीन हीरे मैं आपके समक्ष रखना चाहता हूँ. उम्मीद है कि आप उनके चिट्ठे को बुकमार्क कर लेंगे.

हीरा 1: हिन्दी सशक्तिकरण के सरल सूत्र  हिन्दी दिवस पर हिन्दी के बारे में लोगों के विचार पढ़कर लोगों की हिन्दी से घनिष्ट सम्बन्ध साफ-साफ़ दिख रहा है। मैं भी इस अवसर पर कुछ कहना चाहूँगा:  इतिहास से सीखा है की उतार-चढाव होते रहते हैं ; आशा रखो, कर्मरत रहो, धीरज रखो । स्थिति बदल कर रहेगी; भारत हिन्दीमय होकर रहेगा। (शेष लेख पढें …)

हीरा 2: हिन्दी और स्वभाषा पर विचारोत्तेजक लेख भारत के मैकाले-पूजकों ने हिन्दी , राजभाषा , मातृभाषा आदि के बारे में तरह-तरह की भ्रांतियां फैला दी हैं . इससे आम जनता के मानस पटल पर इनके महत्व की विराट छवि बनने ही नहीं पाती। इसी का परिणाम है कि राजनैतिक रूप से ‘स्वतंत्र’ होने के बावजूद भी किसी को यह स्पष्ट ही नहीं है कि स्व-तंत्र होता क्या है और इसका क्या महत्व है? इसस भ्रान्ति से उपजे भटकाव के सहारे भारत में गुलाम मानसिकता से ग्रस्त एक अत्यंत छोटा सा समूह अपने साथ अन्य लोगों को भी गुलाम ने रहने को विवश किए हुए है। (शेष लेख पढें …)

हीरा 3: अंतरजाल से बिना जुड़े ही विकिपीडिया की सुविधा  जी हाँ, विकिपीडिया के अपार ज्ञान के भंडार से अब आफलाइन रहकर भी ज्ञानार्जन किया जा सकता है। भारत में इंटरनेट की स्थिति को देखते हुए भारत के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।
केवल अंग्रेजी ही नहीं बल्कि सभी भाषाओं की विकिपीडिया और उसके बंधु प्रकल्पों का सारा ज्ञान विविध प्रारूपों मेंउपलब्ध है जिसे नि:शुल्क उतारकर उपयोग किया जा सकता है। (
शेष लेख पढें …)

अनुनाद जी ने कई बार अपने चिट्ठे के लेखों के पुनर्प्रकाशन की अनुमति सारथी को दी है, लेकिन आज मेरा लक्ष्य आपको उनके चिट्ठे पर ले जाना है अत: आपको सिर्फ हीरों की झलक मात्र दिखा दी है. अब यदि उसे हासिल नहीं करते एवं उनके चिट्ठे को बुकमार्क नहीं करते तो नुकसान आप का ही है!!

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