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Archive of the posts written by author : शास्त्री जे सी फिलिप.

प्रभु ईसा अपने दिव्य उद्भव को प्रगट करते हैँ

यहूदियों का कायदा था कि साल में कम से कम एक बार वे यरुशलम नगर में स्थित अपने प्रधान मन्दिर में जरूर जाते थे. ईसा के मांबाप इस मामले में बहुत नियमित थे, एवं अपने लिये एवं बालक ईसा के लिये वहां हर…

बालक ईसा के दर्शन के लिये पूर्व से विद्वानों का काफिला पधारा!!

ईसा जब दो साल के थे तब अचानक विद्वानों का एक बहुत बडा दल यहूदियों की राजधानी यरुशलम में हेरोद के राज दरबार पहुंचा. उन्होंने राजा को बताया कि उनको आकाश में एक विशिष्ट प्रकाश-पुंज दिखाई दिया था जो इस बात का चिन्ह…

ईसा चरित (बाल पर्व) 008

वे गडरिये रातोंरात अपनी जगह से कूच कर गये एवं ढूंढ कर उस गौशाले तक पहुंच गये. वहां जैसा स्वर्गदूतों ने उन से कहा था ठीक उसी तरह उन्होंने शिशु ईसा को कपडे में लिपटा और चरनी में सोते पाया. उन्होंने पहले तो…

ईसा चरित (बाल पर्व) 007

गौशाले में एक चरनी को साफ-सूखा करके कपडे बिछा कर मरियम ने ईसा को उस में लिटा दिया. ब्रह्माण्ड के पालक के लिये कैसी पालनी. विधाता की गति को पहचानना कई बार बहुत मुश्किल है. किसी को भी इस दिव्य बालक की सही…

ईसा चरित (बाल पर्व) 006

यात्रा एवं प्रसव की निकटता के कारण थकी हारी अपनी पत्नी के लिये यूसुफ बहुत परेशान हुए. मैदानों में भी जहां टिकने के लिये सहूलियत थी वहां लोग पहले से उसे घेर कर तम्बू लगा चुके थे. अंत में सराय के मालिक की…

ईसा चरित (बाल पर्व) 005

स्वर्गदूत द्वारा दिये गये दर्शन एवं सन्देश के बाद से यूसुफ एवं मरियम ने हमेशा यह याद रखा कि उस दिव्य बालक का पालण-पोषण विशिष्ट तरीके से होना है क्योंकि उनके द्वारा ईश्वर मानव मात्र के उद्धार के लिये इस धरती पर मनुष्य-रूप…

ईसा चरित (बाल पर्व) 004

मरियम एक बेहद धार्मिक एवं पवित्र कन्या थी अत: वह इस खबर को सुन एकदम घबरा गयी. वह स्वर्गदूत से बोली, “हे महानुभव, हे ईश्वर के महान दूत, ऐसा कैसे हो सकता है. मुझे आज तक किसी पुरुष ने स्पर्श नहीं किया है,…

ईसा चरित (बाल पर्व) 003

मंगनी के कुछ महीने बाद मरियम अपने कमरे में बैठ प्रार्थना कर रही थी कि अचानक एक स्वर्गदूत उसके सामने आ खडा हुआ. उसने मरियम से कहा: “हे मरियम, हे ईश्वर-भक्त नारी, आप पर परमात्मा की विशेष कृपा हुई है. आप जिस तरह…

ईसा चरित (बाल पर्व) 002

धीरे-धीरे कई साल गुजर गये, लेकिन यहूदियों को उनकी पीडा से बचाने कोई नहीं आया. कई स्वतंत्रता आन्दोलन चले, लेकिन कुछ नहीं हुवा. कर-वसूली करने वालों का अत्याचार दिन प्रति दिन बढता जा रहा था. ये लुटेरे लोग हर साल बोली लगा कर…

ईसा चरित (बाल पर्व) 001

 (बाल पर्व) (ईसा मेरे इष्टदेव हैं. उनकी यह जीवनी मेरी अपनी कृति है जो जन जन को समर्पित है)   लगभग दो सहस्त्र साल पूर्व मध्य-पूर्व में एक छोटे से गांव में मरियम नामक एक यहूदी युवती रहती थी. बाल्यकाल से ही वह…