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सन्दर्भ 4

वियोग एक बहुत ही दर्दनाक अनुभव है, खास कर जब वह मिटे बिना मन मे बसा रहता है. समय हर चीज को मिटा देता है, सिर्फ सिद्धांत में. व्यावहारिक तल पर सच्चाई कई बार सिद्धान्त को पीछे छोड, उस व्यक्ति के पीछे पड जाता है जो वास्तविकता को भुगत रहा होता है. नीचे की पक्तियां देखिये: आज भी अभी आज…

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सन्दर्भ 3

हर व्यक्ति दर्द से दूर रहना चाहता है, लेकिन मानव हृदय की विशेषता है कि विशेष परिस्थितियों में वह दर्द को एक अनजान अनकहे तरीके से आत्मसात भी कर लेता है. दर्द एक ही समय में उसका शत्रु भी होता है मित्र भी, चुनौती भी देता है सांत्वना भी. गद्य में उस भावना या अनुभव का सटीक वर्णन नहीं हो…

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सन्दर्भ 2

कोई भी सामान्य व्यक्ति दर्द को जान कर आमंत्रण नहीं देता है. तपस्वियों एवं त्यागियों को छोड कर बाकी सब तो दर्द को किसी भी तरीके से एवं किसी भी कीमत पर अपने से दूर रखने की कोशिश करते हैं. लेकिन पूर्ण रूप से दर्दमुक्त जीवन किसी को नहीं मिल पाता है, न ही मिलना चाहिये. मिल गया तो हम…

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सारथी: काव्य अवलोकन 6

काव्य विधा की एक विशेषता यह है कि कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक कहा जा सकता है. पाठक को प्रेरित किया जा सकता है. चिंतन के लिये सामग्री दी जा सकती है. प्रस्तुत हैं कुछ और चुने हुए मोती: गन्दे से पिल्लों के साथ कुश्ती करते बच्चे कूड़े के ढ़ेर के पास दरी बिछाये मुखिया. अध खुले…

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सारथी: काव्य अवलोकन 5

इस बार काफी कवितायें पढने का मौका मिला. (गजल, गीत आदि को भी फिलहाल इसी श्रेणी में ही रखा जा रहा है). ये मन को झकझोरते हैं, चिंतन के लिये प्रेरित करते हैं, एवं चिंतन के लिये पौष्टिक भोजन प्रदान करते हैं. उम्मीद है कि आप भी इन्हें पढ कर लाभान्वित होंगे: उनका लोकतंत्र तो परलोक में बसता है यहां…

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सारथी: काव्य अवलोकन 4

इस हफ्ते कई कविताओं ने मुझे बहुत स्पर्श किया. प्रस्तुत हैं कुछ उद्धरण एवं उन कविताओं तक पहुंचने की कडियां. उम्मीद है कि आप सब लोग इससे सभान्वित होंगे. मेरी दुकान में हर किस्म के कफ़न मिलते हैंजिंदा एवं मरे दोनो जिस्म के कफ़न मिलते हैंयहां गरीबों के भी कफ़न हैंअमीरों के भी कफ़न हैलेकिन दाम और क्वालिटी में फर्क…

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सारथी: काव्य अवलोकन 3

इस हफ्ते हिन्दी चिट्ठों बहुत सारी कवितायें पढीं. इन में से कई बहुत मर्मस्पशी लगें. चुने हुए उद्धरण प्रस्तुत हैं. उम्मीद है आप इन कविताओं को पढ कर लाभान्वित होंगे. अंग्रेजी लिपि की हिन्दी कविताएं हम सामन्यता नहीं चुनते लेकिन इस बार एक को शामिल किया है: कैसे नहीं तू तड़पता है, कैसे नहीं तू रोता है ऐसी विनाश लीलाओं…

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सारथी: काव्य अवलोकन 2

पिछले दो दिन काफी कविताये पढने का अवसर मिला. गजब की कवितायें हैं कई रचनाकरों की. प्रस्तुत है उन में से पांच की कुछ पंक्तियां. उम्मीद है आप भी पढेंगे. यह पैचाशिक नरमेघ पैदा कर गया है, दहशत जन जन के मन में इन बूढ़ों की तो उड़ ही गयी है नींद तब से बाकी नहीं बचे हैं पलकों के…

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