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महादेवी गुप्ता — रणचंडी भी, माँ भी !!

मुझे अफसोस है कि उस जमाने में केमरा सिर्फ चुने हुए लोगों के पास था. आगफा का क्लिक थ्री जिसने मुझे फोटोग्राफी सिखाई वह केमरा इसके बहुत बाद में बाजार में आया. नहीं तो इस भद्र महिला का चित्र आज मेरे व्यक्तिगत पुस्तकालय में मेरे आराध्य व्यक्तियों की पंक्ति में होता. मैं छटी में था जब श्रीमती महादेवी गुप्ता से…

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पैसे में छेद या छेद वाला पैसा??

मेरे पिछले आलेख ताऊ जी, भाटिया जी, ज्ञान जी, सुब्रमनियन जी और …. और 2 पैसे की भी कोई कीमत है क्या? में बार बार छेद वाले एक पैसे की चर्चा हुई थी. आज अल्पना जी ने टिपियाया: (alpana)कृपया छेद वाले सिक्कों के बारे में भी बताईगा..प्रतीक्षा रहेगी. तो लगा कि इस लेखन परंपरा को समाप्त करने के बदले छेद…

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2 पैसे की भी कोई कीमत है क्या?

मेरे कल के आलेख ताऊ जी, भाटिया जी, ज्ञान जी, सुब्रमनियन जी और …. में मैं ने 2 आने का एक सिक्का दिखाया था जो हमारे बचपन में एक बहुत बडी राशि होती थी.  इस पर समीर जी ने टिपियाया कि “दो आने की बात करने को करोड़ों के नाम शीर्षक में??”. समीर जी की टिप्पणी पढ मुझ एकदम अपनी…

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ताऊ जी, भाटिया जी, ज्ञान जी, सुब्रमनियन जी और ….

मेरे पिछले आलेख  फुरसतिया, शास्त्रार्थ, भडकीले शीर्षक! पर Zakir Ali ‘Rajneesh’ ने एक बहुत सही टिप्प्णी की थी कि “अपनी पाठक संख्या बढाने के लिए दूसरों के बारे में टिप्पणी करते रहना भी एक अच्छा तरीका है।”.  यह एकदम सही बात है, खास कर यदि उन लोगों का नाम ले लिया जाये जिन को सब लोग जानते हैं. तो आज…

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क्या ऐसे लोग अभी भी हैं??

मैं अपने बेटे के साथ रहने गया तो कई विशेष लोगों से मुलाकात हुई. इन में एक है उसके घर झाडूपोछा करने वाली बाई. लगभग 60 से 70 साल की होगी. आज से 8 महीने पहले डा आनंद ने जैसे ही अपने क्वार्टर में डेरा जमाया तो यह स्त्री आई और बोली कि इसके पहले सभी डाक्टरों का काम उस…

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खटाई तेरे रूप अनेक !!

स्वाद की अधिकतम विविधता भारतीय भोजन की एक विशेषता है. यदि आप ने पश्चिमी और यूरोपीय देशों का खाना खाया हो तो आप एकदम समझ जायेंगे कि मैं क्या कहना चाहता हूँ. इस कारण भारतीयों को उनका भोजन एकदम “सपाट” लगता है जबकि उनको भारतीय भोजन एकदम कठिन (पथरीली/पहाडी भूमि पर नंगे पैर मेराथन दौडने   के समान) लगता है. खटाई…

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सुब्रमनियन जी और मैं !!

मार्च 2008 में मैं ने अपने एतिहासिक अनुसंधानों में भारतीय सिक्कों को भी जोड दिया. (तब तक यह अनुसंधान किलों, इमारतों एवं मंदिरों तक सीमित था). मुश्किल से चार महीने बीते होंगे कि जाल पर एक सज्जन से मेरी “मुलाकात” हुई. पहली मुलाकात, पहले प्रेम के समान, कई पत्रों के रूप में आगे बढी. पता चला कि मल्हार के छोटे…

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आपके गुरुजन दुष्ट प्रवृत्ति के होंगे !

मेरे आलेख कमजोरदिल इसे न पढें में मैं ने एक गुरू की कहानी बताई है जो लूट के अलावा कुछ नहीं जानता था. इस पर पा.ना. सुब्रमणियन  जी ने टिपियाया कि लगता है कि आपको जितने भी गुरुजन मिले सभी बड़े दुश्ट प्रवृत्ति के रहे. केवल सहानुभूति जताई जा सकती है. कविता वैसे अच्छी बन पड़ी है अब इसके लिए…

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ऐ मां तेरी सूरत से अलग …

बचपन की याद अभी भी है जब “ऐ मां तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी” हर किसी के जुबां पर थी. मुझे लगता है कि इन पंक्तियों को हम ने बहुत जल्दी भूला दिया. माँ चिट्ठा मानवजीवन में मां के महत्व एवं योगदान को याद करने के लिये चालू किया गया है. इसमें मातृत्व के हर पहलू…

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क्या गोरखधंधा है? आम है या अदरख?

प्रकृति की सुरक्षा में मेरी रुचि जान कर हमारे पडोस की एक बुढिया मां ने मुझे इस इलाके के कई कंदमूलों से मेरा परिचय करवाया. हम लोग लगभग 15 साल पहले यहां जमीन खरीद कर बस गये थे. उस समय बस हमारा अकेला घर था, एवं कालोनी के बचे सारें प्लाटों पर सिर्फ पानी ही पानी था. बरसात के समय…

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