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आज भी ऐसे लोग हैं!

ग्वालियर यात्रा के दौरान मैं एक डाकटिकट/सिक्का प्रदर्शनी में गया जहां हजारों साल पुराने भारतीय सिक्के प्रदर्शन के लिये रखे गये थे. संयोग से, कुछ समय पहले पुरातत्व अध्ययन के कारण इस विषय में भी मेरी रुचि जागृत हो चुकी है एवं http://www.CoinsEncyclopedia.Com पर मेरे सहयोग से एक विश्वकोश तय्यार हो रहा है. इस बीच इस जालस्थल के मेरे सहयोगी…

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ईपुस्तक छापें, हजारों मन जीतें!

जैसा मैं ने अपने पिछले लेख में कहा था, अर्थलाभ की इच्छा त्याग दें तो आप की पुस्तक असानी से हजारों या लाखों लोगों तक पहुँच सकती है. इसके लिये सबसे अच्छा तरीका है ईपुस्तक के रूप में अपनी पुस्तक को प्रकाशित करना. ईपुस्तक का मतलब है पुस्तकें जो इलेक्टानिक रूप में हैं एवं जिनको जाल पर बांटा जा सकता…

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आपकी किताब छापेगा कौन??

बहुत से लोग हैं जो किताबें लिख सकते हैं, एवं जो लिखना भी चाहते है. लेकिन वे एक बात पर आकर अटक जाते हैं. सवाल यह है कि उनकी किताब कौन छापेगा. हिन्दीजगत में तो यह समस्या बहुत विकराल है क्योंकि लेखकों के अनुपात में प्रकाशक नहीं हैं, एवं जिनकी किताबें छप जाती हैं उन के पीछे कुछ न कुछ…

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कैसे लिखें एक किताब इस साल

हर उभरते लेखक की हार्दिक इच्छा होती है कि वह कम से कम एक किताब लिख सके. कई चिट्ठाकारों ने बातबात में यह इच्छा मुझे बताई भी है. लेकिन अधिकतर चिट्ठाकारों को लगता है कि वे कभी भी यह काम नहीं कर पायेंगे. समस्या किताब नहीं है, न किताब का विषय है. असल समस्या यह है कि लोग किताब लिखने…

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स्त्रियों को अपढ रखें, और देखें परिणाम 2

कल मैं ने हमारे इलाके की अशिक्षा का एक असर अपने लेख स्त्रियों को अपढ रखें, और देखें परिणाम!! में बताया था. इसी से संबंधित एक घटना कर्नाटका के एक गांव में हुई. परिवार नियोजन का प्रचार अपने चर्मोत्कर्ष पर था. सारे स्वास्थ्य केंद्रों को असंभव लक्ष्य दिये गये थे. खास बात, परिवार नियोजन के उपकरण मुफ्त बांटे जा रहे…

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स्त्रियों को अपढ रखें, और देखें परिणाम!!

आज हम दतिया इलाके के एतिहासिक छायाचित्र खीचने गये थे, तो इस इलाके की एक घटना याद आ गई. इस इलाके में अशिक्षा अभी भी बहुत अधिक है, खास कर स्त्रियों के बीच. लोग सोचते हैं कि पढालिखा देने से लडकियां परंपरागत कामों से जी कतराने लगती है. इस इलाके में परिवार नियोजन वालों का बडा दबदबा रहा है. कुछ…

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आप बोयें, गैर खायें!

आजकल ग्वालियर (मप्र) के चप्पे चप्पे घूम कर पुरातत्विक महत्व के भवनों का छायाचित्र उतार रहा हूं. इस दौरान डबरा इलाके में कई बार जाना हुआ. डबरा गन्ना-खेती एवं शक्करनिर्माण का एक बहुत बडा केंद्र है. आजकल ईख कटाई चालू हो गई है अत: सुबह से शाम तक गन्ने से भरी कई बैलगाडियां एवं ट्रेक्टर इस इलाके में आतेजाते दिखेंगे….

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रोग से भी भयानक इलाज !!

आज ग्वालियर से कुछ दूर एक किले का चित्र लेने गया तो उस गांव के एक पढे लिखे युवा से मुलाकात हुई जिसने किले के बारे में कुछ जानकारियां दीं. बातबात में मैं ने उसकी गर्दन के ऊपरी सिरे पर कुछ निशान देखे जो दो चित्रों द्वारा यहां आपकी जानकारी के लिये दिये जा रहे हैं. पूछने पर उन्हों ने…

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मदद करें: यह किस की मूर्ति है ?

परसों के लेख में मैं ने ग्वालियर किले के सहस्त्रबाहू मंदिर की एक मूर्ति का चित्र दिया था. इसे देख कर डा अरविंद मिश्रा ने एक दिलचस्प प्रश्न उठाया: "भित्ति शिल्प चित्र मे कौन है -क्या शिव और पार्वती" ? बाद में उनको लगा कि ये दोनो हीं नहीं है, लेकिन कई पत्रों के आदान प्रदान के बावजूद हम दोनों…

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होने दें कुछ और चिट्ठा-घमासान !!

पिछले कुछ दिनों से चिट्ठाजगत के सामूहिक चिट्ठों में जो घमासान हो रहा है उसके बारे में कई चिट्ठाकारों ने मुझे लिखा. उन में से अधिकतर का कहना है कि इस लट्ठमलट्ठ से उनका दिल खट्टा हो रहा है एवं चिट्ठाकारी से ही मन उठ रहा है. अन्य कई लोग अपने आपने चिट्ठों पर इस विषय पर बहुत अधिक चिंता…

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