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	<title>सारथी</title>
	<link>http://sarathi.info</link>
	<description>हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं ईसा के चरणसेवक शास्त्री फिलिप का बौद्धिक शास्त्रार्थ चिट्ठा!! (2010 का औसत:  600,000 हिटस प्रति महीने!!)</description>
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		<title>क्या भिखारी भी मानव हैं ?? (Are Beggars Also Human??)</title>
		<description><![CDATA[मेरे घर के पास हाईवे पर एक बहुत ही व्यस्त चौराहा है जहां हरीबत्ती के लिये अकसर 3 मिनिट रुकना पडता है. वहां एक स्थाई भिखारिन है जिसको मैं पिछले दस साल से पैसा देता आया हूँ. मुझे देखते ही उसकी बांछें ऎसी खिल जाती हैं जैसे कि मुझ से भीख पाना उसका जन्मसिद्ध हक [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2689</link>
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		<title>क्या है यह स्लट-वॉक ??? (What Is This Slut-walk?)</title>
		<description><![CDATA[इन दिनों स्लट-वॉक की बडी चर्चा हो रही है. दर असल स्लट-वॉक पश्चिमी सभ्यता का एक नंगा नाच है जिसे हिन्दुस्तान में आयातित किया जा रहा है. यह 3 अप्रेल 2011 को कनाडा से चालू हुआ था जहां प्रथम स्लट-वॉक में&#160; काफी सारी जवान स्त्रियों ने एक दम अर्धनग्न वस्त्रों में स्त्रियों के यौनिक शोषण [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2685</link>
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		<title>White Tiger: A Dissenting View</title>
		<description><![CDATA[The White Tiger is a 320+ page English novel by Arvind Adiga which was given the 2008 Man Booker prize. He was given an award close to Rs. 4,000,000 for this novel. Going by the amount he pocketed, and the praises that I saw (a masterpiece, Compelling, Delightfully mordant wit, blazingly savage and brilliant), I [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2683</link>
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		<title>हिन्दुस्तानी हो, हिन्दुस्तानी बनो!</title>
		<description><![CDATA[कई दशाब्दियों से रेलगाडी यात्रा मेरे लिये जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है. इन यात्राओं के दौरान कई खट्टेमीठे अनुभव हुए हैं, जिनमें मीठे अनुभव बहुत अधिक हैं. इसके साथ साथ कई विचित्र बाते देखने मिलती हैं जिनको देखकर अफसोस होता है कि लोग किस तरह से विरोधाभासों को पहचान नहीं पाते हैं. [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2682</link>
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		<title>चिट्ठा एग्रीगेटर की कमी!</title>
		<description><![CDATA[काफी अर्से पापी पेट की जरूरतों के पीछे&#160; भाग, चिट्ठाकारी को हटा कर रखने&#160; के बाद चिट्ठाकारी में लौटा तो एक बात बहुत खल गई कि कोई भी एग्रीगेटर काम नहीं कर रहा है. ऐसा लगा कि मैं अनाथ हो गया हूं. दर असल कुछ साल से यह नियम बन गया था कि रोज सुबह [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2681</link>
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		<title>नया साल, नये सपने??</title>
		<description><![CDATA[जनवरी एक को हमारे प्रार्थना समाज में सर्वदेशीय उन्नति एवं प्रगति के लिये हम एकत्रित हुए तो एक सज्जन ने एक दिलचस्प बात कही. वे बोले कि हर नये साल वे कुछ न कुछ निर्णय जरूर लेते हैं, लेकिन कभी भी उन निर्णयों का पालन नहीं कर पाते. इस कारण उन्होंने तय किया है कि [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2677</link>
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		<title>सरकार हमारी है या हम सरकार के खरीदे हैं??</title>
		<description><![CDATA[जनतंत्र का मतलब यह है कि सरकार जनता की, जनता के द्वारा और जनता के लिये बनाई गई है.&#160; लेकिन पूर्ण जनतंत्र तभी स्थापित हो सकता है जब किसी भी जनतंत्र के सारे&#160; नियमकानून उस देश की जनता के द्वारा और जनता के लिये बनाये गये हों. विडंबना यह है कि १९४७ में तकनीकी तौर [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2676</link>
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		<title>एक पति, एक सौ पत्नियां!</title>
		<description><![CDATA[आज एक पत्रिका पढ रहा था तो एक बात बडी खटक गई. लेख प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के बारे में था. लेखक का कहना था कि प्रधान-मंत्री से बडी उम्मीदें थीं, लेकिन वे यह नहीं कर पाये या वह नहीं कर पाये. पढ कर बडा विचित्र लगा. आप न वह प्रतियोगिता देखी होगी जिसमें आदमी [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2672</link>
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		<title>क्या हम कभी सुधरेंगे?</title>
		<description><![CDATA[पापी पेट का चक्कर कुछ ऐसा चला कि चिट्ठाकारी करना भूल गया. लेकिन चिट्ठाकारी नहीं भूला. इस बीच हिन्दी शब्द संसाधक ने ऐसा चक्कर चलाया कि कुछ पूछिये मत. अब सब कुछ लगभग सामान्य दिखने लगा है. इन दिनों सारथी पर लिख नहीं रहा था, लेकिन चिट्ठों को पढता जरूर था. कई बार बडी कुंठा [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2669</link>
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		<title>राजनीति और आम जीवन!</title>
		<description><![CDATA[जब देश आजाद हुआ था तब देश का भरणपालन अधिकतर आदर्शवादियों के हाथ में था. इस कारण जो देश २५०० साल से लुटतापिटता आया था उसे बहुत ही सावधानी से देश की विदेशनीति बनाई गई, आर्थिक नीति बनाई गई, हर चीज को उस तरह से नियंत्रण में रखा गया जैसे एक मां बडी समझदारी से [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2659</link>
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		<title>एक बिजली, लाखों का नुक्सान!</title>
		<description><![CDATA[सुनते हैं कि उत्तर भारत में इन दिनों गर्मी दिन प्रति दिन बढ रही है और कई जगह ४५ के ऊपर पहुंच गई है. प्रभु की दया से केरल में पिछले २ हफ्तों से जम कर पानी बरस रहा है. जम कर से मेरा मतलब है हर शाम एक घंटा बिना रुके. सालों पहले जब [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2658</link>
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		<title>बनारस का बुद्धिजीवी फरिश्ता!</title>
		<description><![CDATA[मार्च के आखिरी हफ्ते का बडा इंतजार था, एक व्यक्ति से मिलने का जो अभी तक तो सिर्फ एक अमूर्त “नाम” था लेकिन जिसे मूर्त रूप में देखने की बडी कामना थी. इस घटना का एक पहलू &#8230;केरल में हुआ इक ब्लॉगर महामिलन &#8230;&#8230;(केरल यात्रा संस्मरण -८) में आ चुका है, लेकिन दूसरा पहलू विन्डोज [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2655</link>
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		<title>संडास या मोबाईल फोन!</title>
		<description><![CDATA[आज सुबह सुबह एक अंग्रेजी चिट्ठे पर एक विदेशी की टिप्पणी दिखी कि सन २०१० में हिन्दुस्तान में जितने संडास हैं उनसे अधिक मोबाईल फोन हैं. इस खबर पर कई लोगों ने काफी चुटकी ली एवं कई लोगों ने हंसी की तो मैं ने एकदम टिप्पणी की “क्या आप लोगों को लगता है कि हिन्दुस्तान [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2649</link>
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		<title>क्या एक भी हिंदी प्रोग्रामर नहीं है हिंदीप्रेमी?</title>
		<description><![CDATA[सारथी के मित्रों ने नोट किया होगा कि पिछले दिनों मेरी चिट्ठावापसी के समय से मैं हिंदी में लिखते समय काफी संघर्ष कर रहा हूँ. दर असल नियमित रूप लिखने कि बड़ी इच्छा है लेकिन जब से संगणक पर विंडोज ७ का प्रयोग चालू कर दिया है तब से सारे के सारे यूनिकोड हिंदी औजार [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2647</link>
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		<title>जालियांवाला बाग हत्याकांड!!</title>
		<description><![CDATA[पिछले तीन हफ्तों से रोज सुबह ५ को दौड शुरू होती है और रात को ९ बजे खतम होती है. इस चक्कर में चिट्ठाकारी और अन्य सब कुछ पीछे रह जाता है. लेकिन कल जब बेटे के चिट्ठे पर पढ़ा कि कल जालियांवाला हत्याकांड का दिवस था तो मन एक दम से दर्द से भर [...]]]></description>
		<link>http://sarathi.info/archives/2646</link>
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