अपना चिट्ठा/जालस्थल लुटेरों से बचायें 6

जहां तक हो सके मुफ्त जालसुविधा से बचना चाहिए, खास कर यदि आप अपनी रचनाओं को कीमती समझते हैं तो. इतना ही नहीं, यदि जाल को आप यदि अपने आंशिक या पूर्ण आय का साधन बनाना चाहते हों तो भूल कर भी वह दूसरे की मिल्कियत के “आभासी” जमीन पर न स्थापित करें. इस तरह से करने गये एक व्यक्ति की आपबीती नीचे दिये चित्र में आप देख सकते हैं.

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इस व्यक्ति द्वारा प्रदत्त सेवा का मैं बहुत उपयोग करता हूं. मेरा एक विज्ञापन भी इन दिनों इनके चिट्ठे पर आता है. इन्होंने मुफ्त जालस्थल पर जगह लेकर एक गजब की सेवा शुरू की. आय का एक जरिया बनाना इनका लक्ष्य था. लेकिन जब इनके जालस्थल पर आने वालों की संख्या बढी तो अचानक बिना सूचना के यह सुविधा इन से छिना ली गई. अब इन्होंने पैसा खर्च करके अपना खुद का जालस्थल खरीद लिया है. लेकिन ग्राहकों को नये जालस्थल तक लाने के लिये सारी मेहनत शुरू से करनी पडी.

आपको लगेगा कि शायद “बडी” जालकम्पनियां शायद इस तरह का काम नहीं करेंगी. यह आपकी गलतफहमी है. अन्तर्जाल का कुल मिलाकर लगभग 25 साल का अस्तित्व रहा है. इन 25 सालों मे मुफ्त सुविधा देने वाली कोई भी कम्पनी 10 साल से अधिक अपनी मुफ्त सेवा एक सा नहीं रख सकी है. किसी जमाने में हॉटमेल की तूती बजती थी. आज वह काफी पीछे खिसक गया है, एवं उसे कई मुफ्त सुविधाये प्रदान करने के दो से तीन साल में ही बंद कर देना पडा. यही हालत याहू का है. किसी जमाने में वह मुफ्त POP3 ईपत्र की सुविधा प्रदान करता था. मुझ जैसे नवागंतुक ने उस समय अपना सारा कारोबार याहू के POP3 ईपत्र पर निर्भर कर दिया था. एक दिन अचानक सूचना मिली कि यह मुफ्त सुविधा अब हटा ली गई है. तीन महीने संघर्ष करके मैं ने अपने नये POP3 ईपतों को अपने ग्राहकों तक पहुंचाया. मानसिक परेशानी, समय की बर्बादी, एवं जालआय बन्द होने की संभावना इन तीनों महीने मेरे सर पर लटकती रही.

आज चिट्ठाकरों को मुफ्त जगह देने में गूगल सबसे आगे है. वर्डप्रेस उसके बाद है. गूगल अपने दुनियां भर फैले लगभग 200,000 सर्वरों की मदद से अपना व्यापार चला रहा है. इसके लिये करोडों रुपया प्रति दिन लगता है. अधिकर पैसा विज्ञापन से आता है. लेकिन जिस दिन विज्ञापन से होने वाली आय में मन्दी आयगी उस दिन गूगल आपका गला घोंटने लगेगा. याद रखें, अमरीकी कम्पनियां पैसे की कमी पडने पर किसी को भी निर्दयता से बाहर कर देती है. जिन लोगों ने अपनी सारी जिन्दगी इन कम्पनियों को दी है, उनका भी कोई ख्याल नहीं रखा जाता है.

अत: मित्र, यदि आपका चिट्ठा/जालस्थल आपके लिये या अपकी आय के लिये महत्वपूर्ण है तो आज ही अपने स्वयं का जालस्थल खरीद लीजिये [क्रमश:]

अपना चिट्ठा/जालस्थल लुटेरों से बचायें 1
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Author: Super_Admin

5 thoughts on “अपना चिट्ठा/जालस्थल लुटेरों से बचायें 6

  1. shastri ji dhanyewaad aapka in sab jaankariyon ke liye mujhe aap ki nai shrikhala ka intezaar rahega …. usme yah bhi batiyega ki space kis tarah khareda ja sakta hai ….. agar bura na mane to main janna chahunga ki kya aap kisi church me father bhi hain?

  2. Yahoo India! is providing POP Access, Since last three years. Seems, You are talking about Yahoo US. Yet, I am not sure that Yahoo US Ever Provided POP Access for free.

    Hotmail was providing HTTP access to E Mails for free up to 2005, then They discontinued it.

    Netscape Mail, after dicontinuing POP Access in 2005, came up with AOL to provide free IMAP mail Access.

    I do use all these services 🙂

  3. @sajeev
    प्रिय सजीव, ये विषय भी आ जायेंगे. आप के प्रश्न का उत्तर: “नहीं” मै नहीं हूं. हां, काफी धार्मिक प्रवृत्ति का हूं एवं ईसा का चरणदास हूं

  4. शास्त्री जी आगे बताईये…ये तो बहुत ही संकट की बात है…हमने तो बहुत विश्वास के साथ सारी रचनाये रखी है..कभी एसा होगा तो हमारे लिये तो बहुत मुश्किल हो जायेगा…आपके अगले चिट्ठे का बेसब्री से इन्तजार रहेगा…

    शानू

  5. thanks for your writing.

    i liked it very much. i found most of the indians including me are unaware of the scams about the web. your writing can help them in a good way. please write some address or webaddress of the webspace provider so that these people can approach them and buy the webspace they wanted.

    because you are senior and you know much better than most of the people so i think it will usefull for your reader to know what company you recommend to purchase the webspace.

    thanks,
    sanjay sharma,india

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