हम हैं जो कानून को बिगाडते हैं

पिछले दिनों एक फिल्म अभिनेता की सजा पर सारे हिन्दुस्तान की पत्र पत्रिकायें इस विषय पर गिद्ध के समान टूट पडी. इसमे कोई ताज्जुब की बात नहीं है. आम भारतीय की प्रथमिकतायें देश के नायकों का आदर करने के बदले उन लोगो के पीछे भागना है जो देश के निर्माण में किसी भी तरह का ठोस योगदान नहीं कर रहे हैं.

इस देश के लाखों डॉक्टर, इंजीनियर, दैनिक जरूरत की चीजों के निर्माता, जीवन रक्षण के साधनों के निर्माता, किसान, मजदूर, ड्राइवर, सैनिक, डाकिया, संवाददाता आदि हैं जो हिन्दुस्तान के निर्माण की सबसे अधिक महत्वपूर्ण कडियां है. परंतु इन नायकों को  अकसर कोई नहीं पूछता है. लेकिन करोडों का अवैध लेनदेन करने वाले क्रिकेट के किसी खिलाडी को छींक आ जाती है तो लोग भूख हडताल पर बैठ जाते हैं कि सरकार ने इस छीक को आने से क्यों रोका नहीं.

जो देश आपने नायकों का आदर करना नहीं जानता, उस देश का नियंत्रण खलनायकों के हाथ चला जाता है. हिन्दुस्तान में  धीरे धीरे यह हो भी रहा है. लेकिन मेरा आज का विषय यह नहीं है. विषय यह है कि जब एक फिल्मी हीरो को सजा हुई तो सतही तौर पर सोचने वाले लाखों लोग उससे नाखुश हुए. वे ऐसा कानून नहीं चाहते जो यह करे. लेकिन वे भूल गये कि कानून हरेक के साथ बराबरी से पेश आने के लिये बनाया गया है.

वे लाखों लोग जो इस विषय पर आंसू बहा रहे है, उनकी आंखों में उन हजारों लोगों के लिये एक कतरा भी नहीं है जो सालों से बिना मुकदमे के जेलों में बंद हैं. उन सैकडों वीर जवानों एवं हिन्दुस्तानी जासूसों की बात करें जो पाकिस्तानी जेलों में पिस रहे हैं तो उनकी जुबानों पर ताला पड जाता है.

हम न्याय और कानून चाहते है, ऐसा कानून जो हमारी इच्छा पर नाचे. कानून को हम ही बिगाडते है. देश की आजादी के 60 वर्ष पूरे होने जा रहे है. हमें अपनी सोच बदलनी होगी. अपराधी को सजा मिलनी चाहिये चाहे वह राजा क्यों न हो. निरपराधी के लिये हमें लडना चाहिये चाहे वह रंक क्यों न हो.

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Author: Super_Admin

1 thought on “हम हैं जो कानून को बिगाडते हैं

  1. स‌ही कहा शास्त्री जी, अच्छा अभिनेता होना अपनी जगह है लेकिन उसके लिए किसी के अपराध तो माफ नहीं होने चाहिए।

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