क्या टिप्पणी दें ?

चिट्ठों पर टिप्पणी संबंधित पिछले लेख टिप्पणी क्यों करें में मैं ने कारण सहित लिखा था कि क्यों हर हिन्दी चिट्ठाकार को जाल भ्रमण के हर मौके पर अन्य चिट्ठों पर टिप्पणी जरूर करनी चाहिये. कई नवोदित चिट्ठाकरों ने लिख कर पूछा कि टिप्पणी में क्या लिखा जाय कि अधिक समय भी न देना पडे, लेकिन विषयोचित टिप्पणी भी कर दी जाये. कृपया निम्न बातों को ध्यान में रखें तो आप कम से कम समय में अधिकतम चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करे सकेंगे:

1. जहां तक हो सके अपनी टिप्पणियों का 60% या अधिक नवोदित चिट्ठाकारों को दें. नारद पर हमेशा “नये चिट्ठे” नाम से उनके द्वारा पंजीकृत आखिरी 20 चिट्ठों की सूची मिल जाती है. चिट्ठाजगत चिट्ठों को एक क्रमांक देता है जिसके आधार पर आप अनुमान लगा सकते हैं कि चिट्ठों में कौन से नये हैं.

2. अधिकतर नवोदित चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करने के लिये दो से पांच शब्दों की टिप्पणी पर्याप्त है. उदाहरण के लिये:

बहुत अच्छा लिखा है
बहुत अच्छा लिखते हो
काफी सशक्त लिखा है
लेख की जानकारी उपयोगी है
लेख की जानकारी जनोपयोगी है
आपका चिट्ठा मै नियमित रूप से पढूंगा
आपका चिट्ठा मै नियमित रूप से पढता हूं
सटीक विश्लेषण है
मुझे बहुत प्रेरणा मिली
प्रेरणादायक लेख

3. टिप्पणी में यदि आप इससे अधिक लिख सकते हैं तो अच्छा है, लेकिन कम से कम इतना लिख देंगे तो एक नवोदित रचनाकार/चिट्ठाकर को आगे बढने के लिये आवश्यक प्रोत्साहन मिल जायगा.

4. काव्य अवलोकन के बाद उस काव्य से दो से लेकर चार सशक्त पंक्तियां चुन कर टिप्पणीपट पर चिपका दें एवं दो से पांच शब्द की टिप्पणी जोड दें तो यह उस रचनाकार के लिये हवाई-ईंधन (aviation fuel) का कार्य करेगा एवं वह बहुत ऊंचा उठ सकेगा.

आज से उदारता से टिप्पणी कीजिये. जीवन में वह व्यक्ति सबसे अधिक पाता है, जो सबसे अधिक देता है.

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Author: Super_Admin

6 thoughts on “क्या टिप्पणी दें ?

  1. अतिशय उदारता भी शायद नए लोगों के लिए उचित नही है ,वे गुमराह हो सकते हैं ,मेरी अपनी समझ है की अच्छे चिट्ठे प्रतिक्रिया बटोर ही लेते हैं .

  2. टिप्पणियों से ज़्यादा लेखन-सामग्री के विस्तार की बात होनी चाहिए।
    बच्चों और किशोरों के लिए ज्ञानवर्धक सामग्री रहे तो अगली पीढ़ी में हिंदी के प्रति मोह बना रहेगा।

  3. आपसे सहमत हूँ शास्त्री जी, मैंने देखा है कि टिप्पणियों के रुप में उपयुक्त प्रोत्साहन न मिलने के कारण कई नवोदित चिट्ठाकार लिखना ही छोड़ देते हैं। इसलिए मैं पुराने चिट्ठों पर टिप्पणी करुँ न करुँ नए चिट्ठों पर जरुर करता हूँ। 🙂

  4. सही है! अगर हम ज्यादा से ज्यादा हिन्दी चिट्ठे देखना चाहते हैं तो प्रोत्साहन ज़रुरी है

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