चिट्ठे एवं कबाडी

538030699_3c76b0bfa6 विषयाधारित चिट्ठों की आवश्यक्ता एवं महत्व पर मेरे लेख विषयाधारित चिट्ठे ही क्यों ?? पर काफी दिलचस्प एवं महत्वपूर्ण टिप्पणिया/प्रश्न मिले. एक निरीक्षण मेरे मित्रों की प्रस्तावनाओं एवं मेरी सोच पर:स्

  • प्रस्तावना: शास्त्री जी बहुत जरूरी बता उठाई आपने !मुझे लगता है अलग अलग विषयों पर अलग अलग ब्लॉग़ बनाना संभव नहीं है ! दूसरे इससे चिट्ठों की पाठक संख्या भी बढ्ने की बजाए घटेगी ! मेरा चिट्ठा यदि एक ही विषय पर सामग्री परोसने लगे तो एकरसता आ जाऎगी ! पाठक के लिए असली आकर्षण तो यह है कि वह यह जिज्ञासा लेकर मेरे चिट्थे पार आय कि आज मैंने क्या लिखा होगा !कोई भी चिट्ठा अपनी सामग्री के विषयों से नहीं विषय के बल्कि भीतर निहित भावधारा से पहचाना जाएगा ! वैसे इस मुद्दे पर और सोचा जा सकता है ! नीलिमा
  • उत्तर: नीलिमा जी, आप ने जो कहा वह तब तक ही जारी रहेगा जब तक लोग चिट्ठाकारों के प्रति वफादारी के कारण उनका लिखा कुछ भी पढने के लिये उनके चिट्ठे पर जायेंगे. सन 2010 तक यह स्थिति बदल जायगी एवं तब मुश्किल से 0.1% से चिट्ठे इस आधार पर पाठक जुटा पायेंगे. मेरा लेख बचे हुए चिट्ठाकारों के लिये था जिनको बाजार की शक्तियों को पहचान कर एक अति उत्तम प्रोडक्ट बाजार में उतारना पडेगा. दूसरी बात, विषयाधारित से मेरा तात्पर्य “हर विषय पर एक नया चिट्ठा” नहीं बल्कि “हर चिट्ठे की एक निश्चित दिशा” है. कबाडी हर चीज के लिये एक नई दुकान नहीं खोलता, लेकिन बेचता एक निश्चित सीमा में निर्धारित सामान है. वह कभी दवा, कभी कपडा, कभी स्टील के बरतन नहीं बेचता है. विषयाधारित से तात्पर्य यह है.
  • प्रस्तावना: आपकी बात तो सही है किन्तु एक ही विषय के बारे में लिखने के लिए हमें उस विषय पर महारत होनी चाहिए । जब हम किसी भी क्षेत्र के विशेषज्ञ नहीं हैं तब यह नहीं कर पाते । मैं तो केवल जैक औफ मैनी ट्रेड्स मास्टर औफ नन की स्थिति में हूँ । घुघूती बासूती
  • उत्तर: घुघूती बासूती जी, यह आपकी गलतफहमी है कि आप को किसी विषय में महारत नहीं है. आने वाले दिनों में मैं विषयों की जो सूचियां पोस्ट करूंगा उनको जरूर देखें. ऐसे कई विषय मिल जायेंगे जिन मे आप हो महारत हासिल है.
  • प्रस्तावना: निम्न चिट्ठों के चिट्ठाकारों से जो सुझाव/प्रश्न मिले हैं उनके उत्तर इसके पहले लिखी गई पंक्तियों में निहित है: संजीत त्रिपाठी, पारुल, ज्ञानदत्त पांडे, काकेश, बाल किशन, हर्षवर्धन, प्रमेन्‍द्र प्रताप सिंह, Sanjay Gulati Musafir

उन सभी मित्रों का आभार जिन्होंने टिपिया कर चर्चा को आगे बढाने एवं विषय को और स्पष्ट करने में मदद की.

चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: विश्लेषण, आलोचना, सहीगलत, निरीक्षण, परीक्षण, सत्य-असत्य, विमर्श, हिन्दी, हिन्दुस्तान, भारत, शास्त्री, शास्त्री-फिलिप, सारथी, वीडियो, मुफ्त-वीडियो, ऑडियो, मुफ्त-आडियो, हिन्दी-पॉडकास्ट, पाडकास्ट, analysis, critique, assessment, evaluation, morality, right-wrong, ethics, hindi, india, free, hindi-video, hindi-audio, hindi-podcast, podcast, Shastri, Shastri-Philip, JC-Philip,

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Author: Super_Admin

4 thoughts on “चिट्ठे एवं कबाडी

  1. एक मशहूर कहावत है –
    Liars wont figure, figure wont lie! अर्थात – आंकडे बोलते हैं।

    मुझे विषयाधारित करने का एक फायदा यह भी हुआ कि औसतन एक व्यक्ति कितना समय लगाता है मेरा ब्लॉग पढने में, वह बढ गया है। जबकि शास्त्री जी के सुझाव देने के बाद मैंने अपने लेखों की लम्बाई को 225-250 के बीच सीमित कर दिया तो समय घटना चाहिए था।

    बाकी भगवन सबकी अपनी पसंद और इच्छा – कोई दबाव नहीं।

  2. मेरा ब्लॉग विषय आधारित ब्लॉग है और मैं चाहूँगा की मेरे ब्लॉग पर वो लोग ही आए जो मेरे ब्लॉग के विषय पर सर्च कर रहे हो और उसी पर पड़ना चाहते हो, ताकि वो मेरे ब्लॉग पर अधिक से अधिक समय बिताये और उस विषय पर सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करे | न की कुछ देर मेरा ब्लॉग देखे और फिर किसी और ब्लॉग पर जाए और अधिक जानकारी के लिए |

  3. Shastri Sir,

    I read your recent posts on blogging and the importance of directed content.

    I agree with you and really respect your motivation with which you are freely sharing this wisdom with others. These kind of articles require a good amount of analysis and foresight and they will definitely help bloggers and (indirectly) also promote hindi – both being your openly known cherished goals/wishes.
    They are small articles but quite valuable.

    1. I feel “personal” blogs will always have a comparatively free nature – expressing whatever comes to mind, just for sharing sake. They could take any form – from the “proper” blog, to twitter like blogs. They are not really looking for a large readership (though nobody would mind readers either). You are absolutely right that they wont get a large readership, however (I feel that you will also agree), that they will always have a place, as a platform to share ones thoughts or creativity!

    2. I REALLY like your explaination regarding “har chitthe ki ek nirdharit disha”. You are absolutely right that for a large readership, the blog must have a specific content direction and thats hard work and requires dedication.

    3. Even blogs that write on varying topics but having a regularity within those few topics can benefit from Labels (called categories in wordpress). If one uses labels/ categories, then readers can quickly access related posts on the blog OR otherwise through targetted feeds. (as you wud know, label based feeds are easily possible). This way if a reader only likes someone’s political analysis and wants to read the same, but does not want to read the same blogger’s movie reviews – they can easily do so without feeling disturbed and the blogger need not to make two separate blogs. Each post can have multiple labels too. However, labels too wud become useless if there are too many labels!!
    Sir, whats your view on this? Am I being too trivial or too far from the mark??:-)
    In addition, you wud know better, but if I am not trivialising things, then may be both bloggers and readers need to be made more aware of this facility.

    Please dont mind it Sir, I am taking the liberty of using your blog as an example. For example your blog could also use categories like Blogging, Selected-Poems, Selected-Articles, PositiveGuidance etc. So now those readers who only want to read your selection of poems OR positive-guidance articles, can easily do so, without having to sift thru articles on blogging and its future(if thats what they want to??!!!)

    Still, I agree that blogs would need to have a specific direction for a larger readership.

    But Sir great regards to you for your remarkable wisdom and your blog is NOT a khichdi – atleast I have never felt so and I have never felt that there is a sponsored agenda of any sorts. Its saddening to read comments like that but your replies too would be enlightening for sure.

    Regards and good wishes!

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