जीवन का लक्ष्य क्या हो?

कल किसी मित्र ने परामर्श के लिये एक प्रश्न भेजा “मैं अपन जीवन का लक्ष्य तय नहीं कर पा रहा. मार्गदर्शन करें”.

आपने एक बहुत अच्छा प्रश्न एक बहुत सही समय पर पूछा है. अच्छा इसलिये कि कम सब को इस प्रश्न पर सतत मनन करते रहना चाहिये जिससे कि हम लक्ष्य से न भटक जायें. बहुत सही समय पर इसलिये पूछा है क्यों कि यदि आप लक्ष्यहीनता से निराश हो जाने से पहले ही प्रश्न पूछ लिया. बीमारी का इलाज करने से हजार गुना बेहतर है कि बीमारी से बचने का उपाय किया जाये.

सबसे पहले तो यह समझ लें कि समय समय पर हरेक के मन में यह प्रश्न उठता है कि उसके जीवन का लक्ष्य क्या है. हर डाक्टर, इंजिनियर, वकील, जर्नलिस्ट, मास्टर, व्यापारी यदाकदा इस प्रश्न से चार होता है. यदि आजकल आपके मन में जो प्रश्न आ रहे हैं वह यदि इस किस्म का है, और यदि आप किसी पेशे के लिये पढाई शुरू कर चुके हैं या किसी नौकरी में लग चुके हैं तो आप अधिक फिकर न करें. अपनी पढाई जारी रखें या अपने पेशे में पूरे मन से लगे रहें, आगे की दिशा मिल जायगी. लेकिन यदि आप आजकल बेरोजगार हैं, या ऐसा विषय पढ रहे हैं जिसमें आपका मन नहीं लगता, या आपका पेशा आपके मन माफिक नहीं है तो आपको आगे सोचने की जरूरत है.

सबसे पहले तो आप यह जांचे कि आप की रुचि किन विषयों एवं क्षेत्रों में है. उदाहरण के लिये,  हो सकता है कि संगीत के अलावा किसी भी विषय में आपकी रुचि न हो एवं विज्ञान अपके लिये मारक साबित हो. या हो सकता है कि इसके बिल्कुल उल्टा हो. जब अपनी रुचि पहचान लें तो उससे संबंधित रोजगार के अवसरों को जांचे. फिर यह देखें कि उन रोजगारों को प्राप्त करने के लिये प्राथी की क्या प्रष्ठभूमि होनी चाहिये.

इतना सब कुछ समझने के बाद अपनी पसंद के पेशे के लिये तय्यारी शुरू कर दें. लेकिन इसके साथ एक बात न भूलें: आज नौकरी एवं पेशे के लिये जो अंधी दौड हो रही है, उसमें हर किसी को अपना लक्ष्य नहीं मिल सकता है. अत: एक से अधिक लक्ष्य अपने सामने रखें जिससे कि एक न मिले तो आप दूसरे को चुन सकें. दूसरी बात, जो भी निर्णय लें उसे वास्तविकता के धरातल पर लें.

सारथी पर दहिनी ओर दिये गये फार्म की मदद से कोई भी व्यक्ति अपना नामपता या ईमेल प्रगट किये बिना अपने प्रश्न मुझे भेज सकते हैं.

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Author: Super_Admin

9 thoughts on “जीवन का लक्ष्य क्या हो?

  1. The aim of life is according to me is to be a human and to do your work with resposbility.

    कभी मेरे जीवन का लक्ष्य था हाईस्कूल पास करना,
    कभी मेरे जीवन का लक्ष्य था इंटर पास करना,
    कभी मेरे जीवन का लक्ष्य था स्नातक पास करना,
    कभी मेरे जीवन का लक्ष्य था परास्नातक पास करना,
    अभी मेरे जीवन का लक्ष्य है अपने पैरों पर खड़े होना और पिछले कुछ दिनों से प्यार का बुखार जकड़ने की कोशिश कर रहा है, 😉
    २-३ साल में हम भी शादी शुदा हो जायेंगे.
    फ़िर मेरे जीवन का लक्ष्य……
    अरे यार जिंदगी तो चलती ही रहेगी
    और जैसे लक्ष्य मैंने गिनाये हैं ये तो बनते बिगड़ते रहेंगे, पर इनमें से कोई भी जीवन का लक्ष्य नहीं है.

    जीवन का एक ही लक्ष्य है वह है कि हम इंसान बनें,

    मैंने इसे ही जीवन का लक्ष्य माना है.
    शास्त्री जी जो प्रवचन देते रहते हैं उन पर हम सदैव खरे उतरें यही हमारे जीवन का लक्ष्य होना चाहिए.

    जब मैं हाई स्कूल पास करना चाहता था तो मन में एक इच्छा थी कि मैं ही आने वाले कल में देश का लायक सपूत बनूँगा और जब कि मेरे मन में देश सेवा जज्बा कूट कूट कर भरा है तो मेरा लक्ष्य है कि मैं अपने कर्तव्य को ईमानदारी से पूरा करुँ यानी अच्छे नंबरों से पास होऊं.
    मुझे खुशी है कि मैंने मेरा लक्ष्य पाया और अच्छे नंबर लाकर देश सेवा की अब एक अच्छा और जिम्मेदार नागरिक बनने का सपना आंखों में पल रहा है. ( और एक अच्छा पति भी :))

    एक वाक्य में यदि कहूं तो जीवन का लक्ष्य ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करना है.

    यदि कुछ ग़लत लिखा हो शास्त्री जी, मैं आप डिलीट करने का अधिकार देता हूँ. 🙂

  2. ईतना सरल विज्ञान नही है यह। जब मै छोटा था तो मै पायलट बनना चाहता था। मेरा बेटा पुलिसमैन बनना चाहता है। आप किस काम मे अच्छे है और कौन सा काम आपको लुभाता है, यह दोनो बाते जुदा हो सकती है। मुझे आपका फोर्मुला सही नही लगा भैय्या।

  3. नमस्कार जी,
    निराश्रित बच्चों के पालन-पोषण/शिक्षा-दीक्षा/संस्कार/आवासीय सुविधा उपलब्ध करने के लिए “माँ सेवा संस्थान” द्वारा जन सहयोग से उत्तर प्रदेश राज्य के गाजीपुर जिले के भदौरा में अनाथ-आश्रम निर्माणाधीन है! इस पुनीत कार्य में आपका सहयोग/मार्गदर्शन अपेक्षित है!
    “अमित सिंह” (सचिव)”
    माँ सेवा संस्थान, लखनऊ
    मोबाईल : 09580327780
    e-mail : maasewasansthan@gmail.com

  4. Sarthi k is prashn se mai bhi khush hu kyoki ye prashn har ek insan ki zindagi me aata hai. to mera manana hai k sarhi k is jawab se doobte ko sahara to milega par kinara nahi mil payega.
    Agar doobte insan me jeene ki chah hai to wah tinka-tinka chun kar ek aisi naav tyar kar lega jis se usko kinare tak pahuch pane me koi nahi rok payega.
    (in my opinion:- kinare par pahuchne ke baad wo doosro ko doobne se bachane wala ek achha navik ban sakta hai. ) YASH

  5. jiwan hi sagharsh hai,sangharsh hi to jiwan hai.bas jarurat hai atam gyaan ki,samay ke sath chalna aur samay ki pabandi hi saflata ki kunjee hai.mai pure bharat warsh ke dil(man)se dar gareebi ko nikal kar bahar karne ki puri koshis kar raha hu,lekin jab tak har ek byakti nahi chahega tab tak bhagwan bhi uske jeewan ki buri sthitiyon ko chah kar bhi nahi door kar sakta.paresaniya hame batati hai ki ham abhi jinda hai warna murdon ko koi dikkat nahi hoti,jarurat hai karm karne ki,karm ke aadhar per bhag bhi badalte hai,jaisa karm waisa fal par gareebi ek bimari hai iska turant ilaj karna chahiye warna ye badati jayegi.garibee se mukti hard work karke nahi network karke ho saki hai.
    “veerendra tyagi”(ebizer)
    http://www.ebizel.com,
    mob-09919790641
    email:veerendratyagi1103@gmail.com

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