शास्त्रार्थ तो मूर्खों के लिये है ??

image सारथी पर प्रश्न पूछने के लिये जो सुविधा है उसका प्रयोग कई लोग कई तरीके से करते हैं. अकसर मेरे रचनात्मक-आंदोलन के बारे में प्रश्न पूछने या बेनामी आलोचना करने के लिये भी लोग उसका उपयोग करते हैं. इन में से सब को मैं लेख का विषय नहीं बनाता, लेकिन सब का उपयोग नई नई दिशओं में सोचने के लिये जरूर करता हूँ. इसका एक उदाहरण है आज का प्रश्न!

छयाचित्र: अकेला चना भाड नहीं फोड सकता, लेकिन हम सब मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं

आज एक बेनाम व्यक्ति ने एक प्रश्न पूछा कि सारथी अंग्रेजी भाषा की गुंडागर्दी, पाश्चात्य सामाजिक गंदगी के आयात का विरोध, भारतीय आदर्शों का प्रचार आदि से क्या फायदा होने वाला है. समाज जैसा था वैसा ही रहेगा, एक व्यक्ति के कहने-लिखने  आ आंदोलन करने से क्या फरक पडता है.

प्रश्न बहुत अच्छा है. जीवन में हम क्या सीखते हैं, क्या करते हैं, क्या कर पाते हैं, कहां पहुंच पाते हैं यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि हम प्रश्नों को, उपेक्षा को, कठिनाईयों को, वास्तविकता को, किस नजरिये से देखते हैं. जो व्यक्ति हर चीज को निराशा के नजरिये से और नकारात्मक कोण से देखता है उसके लिये किसी भी विषय की चर्चा मूर्खता है. हर कार्य मूर्खता है, किसी भी अभियान से उसको कोई फायदा नहीं दिखता है. लेकिन सच्चाई कुछ और है.

अनादि काल से भले एवं बुरे सोच मानव समाज को प्रभावित करने की कोशिश करते रहे हैं. इस संघर्ष को कोई भी न तो रोक सका है न रोक सकेगा. लेकिन यदि किसी भी समाज में पर्याप्त लोग भलाई, सत्य, न्याय, दया अदि के लिये कार्य करें तो उन सब के कार्य का मिलाजुला असर यह होगा कि भलाई बुराई पर भारी पड जायगी. आज भी यही हो रहा है.

चाहे हम को कितना भी लगे कि बुराई समाज में बढ रही है, फिर भी यह नहीं भूलना चाहिये कि इस बुराई ने अभी तक समाज को पूरी तरह ग्रस नहीं लिया है. कारण यह है कि इन बढती बुराईयों के बावजूद समाज में भले लोगों की कमी नहीं है. “सारथी” चिट्ठे के रोल को इस संदर्भ में देखा जाना चाहिये. यहां जो शास्त्रार्थ किया जाता है वह एक दिन में समाज को नहीं बदलेगा, लेकिन कम से कम कुछ लोगों को सही दिशा में सोचने के लिये प्रोत्साहित करेगा. इतना बहुत है.  अकेला चना भाड नहीं फोड सकता, लेकिन हम सब मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं.

हर पाठक को अपना जीवन, अपना लक्ष्य इस संदर्भ में देखना चाहिये. क्या आप उस समूह के साथ हैं जो बुराई फैला रहे हैं, या उसके साथ हैं जो समाजनिर्माण की कोशिश में लगे हैं. अकेला चना भाड नहीं फोड सकता, लेकिन हम सब मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं. हां यदि आप से भला नहीं हो पाता तो कम से कम चुप रहने के बदले उन लोगों को प्रोत्साहित करें जो समाज-निर्माण में लगे हुए हैं.

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Author: Super_Admin

16 thoughts on “शास्त्रार्थ तो मूर्खों के लिये है ??

  1. अब शास्त्री जी शाश्त्रार्थ नहीं करेंगें तो करेगा ही कौन -यथा नामों तथा गुणः ! बाकी अबोध हैं -वे भी धीरे धीरे इस कला में पारंगत हो जायेंगें !

  2. असली बात यही है-‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता,लेकिन हम सब मिल कर काफी कुछ कर सकते हैं।’

  3. अकेला चना भाड नहीं फोड सकता, लेकिन हम सब मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं
    ” golden words well said..”

    Regards

  4. हम आप की बात से पूर्णतः सहमत हैं. शीर्षक से एकबारगी लगा अरे! शास्त्रीजी को बुद्धत्व प्राप्त हो गया.

  5. 🙂 😀 Dr.Arvind Mishra -:यथा नामों तथा गुणः-
    :)Gyan Dutt Pandey-:मीक शैल इनहेरिट द:-
    :):D amar jyoti -:मिल कर काफी कुछ कर सकते :-
    :):D समीर लाल -:फोड़ ही रहा है:-
    :):D दिनेशराय द्विवेदी -:चनों को तो इकट्ठा होना ही होगा:-
    :):D PN Subramanian-:शास्त्रीजी को बुद्धत्व प्राप्त;
    :):D ताऊ रामपुरिया-:हां पते की बात:-
    :):D प्रवीण त्रिवेदी-:सहमत!!!

  6. Dr.Arvind Mishra -:Gyan Dutt Pandey-:amar jyoti -:समीर लालजी-: दिनेशराय द्विवेदी -:D PN Subramanian-:
    ताऊ रामपुरिया-:प्रवीण त्रिवेदी-:seema gupta जी के साथ
    “हे प्रभु यह तेरा-पथ और मुम्बई टाइगर, हमसभी अग्यारह लोग है जो आपकि सेना के फाईटर बनकर ऐसे लोगो से लडेगे।

  7. ये बेनामी जो होते है वो हमेशा पाकिस्थान कि बोली क्यो बोलते है ? समझ के बहार है।

    ये बेनामी नामक वायरस शास्त्रीजी को शास्त्रार्थ करने से रोक सकता है क्या ?

    जो व्यक्ति सामाज,राष्ट्र के खिलाफ, भारतीय आदर्शों के विरोघ, शास्त्रीजी के रचनात्मक-आंदोलन से नाक भोह चढाएगा, ऐसे व्यक्ति का भारतीय होने पर सन्देह है। शदीयो पुरानी भारतिय सस्कृति, विरासत और भारतीय आदर्शों को आज दुनिया अपनाने को लालायत है और कुछ लोग विरोध करके क्या जताना चाहते है। मेरे हिसाब से वैसे अज्ञात “बिनलादेनो” को तो “टोराबोरा” कि पहाडीयो मे भेज देना चाहिऐ। तभी भारतिय एवम भारतीयता का महत्व मालुम पडॅगा।
    प्रभु यह तेरा-पथ
    मुम्बई टाइगर

  8. अकेला चना भाड नहीं फोड सकता परन्तु वह भाड से निकल कर जमीं पर आ जाये और समय के साथ वह लड़ कर जीवित रह सके तो एक दिन वह एक पेड़ होगा , जिससे वह कई चनो को जन्म देगा और शायद वो मिल कर भाड को तोड़ दे .

  9. माननीय महोदय
    सादर अभिवादन
    आज मैंने आपके ब्लाग पर भ्रमण किया। आपकी रचनाशीलता के लिए
    बधाई स्वीकारें। रचनाओं के प्रकशन के लिए साहित्यिक पत्रिकाओं के पते चाहते हों तो मेरे ब्लाग पर अवश्य ही पधारें।
    अखिलेश शुक्ल
    संपादक कथा चक्र
    http://katha-chakra.blogspot.com

  10. शास्त्री जी की बात से पूर्णतः सहमत हूँ.
    “मैं अकेला ही चला था जानिब -ए- मंजिल,
    लोग आते गए कारवां बनता गया”

    शास्त्री जी, जुटे रहिये हम आपके साथ हैं.

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