ऐसा भी होता है!!

(एक मिनी पोस्ट): केरल का महात्मा गांधी विश्वविद्यालय हर बात में राजनैतिक दखल के कारण हिन्दुस्तान के सबसे ढीले ढाले विश्वविद्यालयों में से एक है. कल (जून 6) उन्होंने अखबार में निम्न खबर दी:

“एम एससी की परीक्षा जून 10 को होगी. सामान्य परीक्षा फारम 10 जून तक, और लेट फीस के साथ 11 जून तक जमा की जा सकती है”

यहां शायद “भूत” परीक्षा लिखते हैं. गैरजिम्मेदार अफसरशाही को नियंत्रण में लाना ही होगा नहीं तो इस लोक में रिजल्ट लो, परलोक पहुंचने पर फारम भरो वाला हिसाब होने लगेगा!!

इस आलेख पर अभी अभी मिली एक खास टिप्पणी: शास्त्री जी. कमाल की सूचना है…लगता है परिक्षा देने के बाद भी उसका फॉर्म भरा जा सकता है…गलत है ..इससे बेहतर तो ये होता की पहले रिजल्ट निकालते फिर परिक्षा लेते और अंत में टाईम बचता तो फॉर्म भी भरवा लेते..बच्चे कहाँ भागे जा रहे हैं…सचमुच पढाई कितनी अलग हो गई है….अजय कुमार झा

 

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Author: Super_Admin

16 thoughts on “ऐसा भी होता है!!

  1. शास्त्री जी. कमाल की सूचना है…लगता है परिक्षा देने के बाद भी उसका फॉर्म भरा जा सकता है…गलत है ..इससे बेहतर तो ये होता की पहले रिजल्ट निकालते फिर परिक्षा लेते और अंत में टाईम बचता तो फॉर्म भी भरवा लेते..बच्चे कहाँ भागे जा रहे हैं…सचमुच पढाई कितनी अलग हो गई है….

  2. शिक्षा के व्यवसायीकरण ने सभी स्थानों पर यही हालत कर दी है। समझ नहीं आता इस पर सुरेश जी की तरह हँसा जाए या अपनी हालत पर रोया जाए।

  3. बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों का यह हाल है तो गांवों में टूटे-फूटे भवनों में लगनेवाले प्राइमरी स्कूलों की क्या हाल होगी, इसके बारे में सोचकर भी दिल रो उठता है।

    इसीलिए शायद लोग देश छोड़कर आस्ट्रेलिया जा रहे हैं स्कूल की पढ़ाई तक करने और जानवरों की तरह पीटे जाने पर भी चूं नहीं बोल रहेे, क्योंकि उनके अपने ही देश में हालत इससे कहीं बुरा है।

  4. अजी इस से अच्छा यह दुकान ही खोल ले,यह कोई छोटी मोटी गलती नही, इस विश्वविद्यालया की असली पहचान है, इस के प्रबंधक जरुर किसी नेता के जानपहचान के होगे, जिन्होने कभी कालेज, स्कूल देखा नही बस नेता जी की कृप्या से बेठ गये उस कुर्सी पर जहां किसी शिक्षत व्यक्ति को बेठना चाहिये था

  5. भाई ताऊ विश्वविद्यालय मे तो पहले रिजल्ट फ़िर परीक्षा और उसके बाद फ़ार्म भरवाये जाते हैं ये लगता है कोई नकली है.:)

    रामराम.

  6. What a blatant example of third rate mishandling of our education system.There are only 2 types of universities in India: deemed and doomed. Nothing else, student politics or university official has submerged them in corruption.Nodays, traditional universities didn’t create public confidence and private institutes have become commercial entities of low quality.And don’t pinch me to start discussion over bribes taken in tender process.Money is one of the problems but not major problem in university.People do not want to take initiative to decision on many matters. These lack of decision at crucial junctures and times has harmed institutes more than anything. The main point to note is:All Universities are much more stronger legally(even on applying RTI) than us because of rigrous paper work. Only paper work is done on the name of work to cover disperencies. The true advantage of a real university lies in the tremendous scope for inter-disciplinary activities.A need of decentralization is needed to stop mis governance of university officials.

  7. ये किस वर्ष की बात हो रही है?

  8. I DO NOT THINK ” KOI AJUBA HO GAYA ” . WE CAN NOT CHANGE THE SYSYTEM. TO BLAME WE CAN, BUT RESPONSIBILITY WILL DEFINITELY COME ON THE POOREST ONE. OFFICER WILL RUN THROUGH ” PATLI GALI ” I FULLY AGREE WITH THE VIEWS OF YAYAVER JI.I FEEL ASHAMED BECAUSE NOW ” TIR BAN SE CHHUT CHUKA HA ” NO REMEDY… DONT MIND SIR.

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