नंगे होने पर ही ये लिख पाते हैं!!

मैं ने अपने पिछले आलेख कौन हैं ये अज्ञात टिप्पणीकार!!  में कहा था कि जब तक बेनामियों को टिप्पणी की सुविधा दी जायगी तब तक चिट्ठाजगत में बुराई होती रहेगी. आज अजय के आलेख वे हिंदी में ब्लॉग्गिंग करते हैं..और हिंदी ब्लॉग्गिंग को गरियाते हैं  में यह बात पुन: स्पष्ट हो गई.

इस चिट्ठे पर बिना नाम टिप्पणी करने की सुविधा थी और बेनामी जी ने जम कर मेरे और ताऊ जी के विरुद्ध भडास निकाली. लेकिन इसे देख जैसे ही अजय ने बेनाम टिप्पणी करने की सुविधा हटा ली वैसे ही बेनामी द्वारा फैलाई जाने वाली गंदगी अजय के चिट्ठे पर बंद हो गई.

वैसे पिछले कुछ महीनों से “बेनामी” एवं उनके चेलेचपाटों की रचनाधर्मिता पर कई  लोग (आपसी सहमति से या अपने आप) नजर रख रहे थे क्योंकि इनकी कलम तभी चलती है जब ये नंगा होकर लिख पाते हैं. (इज्जतदार व्यक्ति के समान कपडे पहने पर इनकी जुबान को काठ मार जाता है). इस तरह नजर रखने के कारण अब लगभग हरेक को अनुमान हो गया है कि कौन लोग इसे कर रहे हैं, एवं इनके गेंगलीडरान कौन कौन हैं.

एकदम स्वतंत्र तरीके से नजर रखने वाले तकनीकप्रेमी की रपट जरा पढिये:

हाल ही की चर्चित अनाम टिप्पणियों को जब ट्रैक किया गया तो बड़ी चौंकाने वाली जानकारियाँ मिलीं। अब इसे ब्लॉग जाहिर इसलिये नहीं किया जा रहा कि बात कुछ हजम न होने जैसी है। लेकिन है तो यह एक सच्चाई कि ‘वह’ तमाम टिप्पणियाँ उत्तर भारत के दो खास, आपस में सटे स्थानों के कार्यालय व निवास से की गईं। (बी एस पाबला)

इसका एक अच्छा सा अर्धतकनीकी हल निम्न है:

शास्त्री जी बात तो आप ने उचित कही है, बाकी हमे पता भी होता है कि हम ने किस से पंगा लिया, या किस ने हम से पिछली बार पंगा लिया था, या फ़िर हमारे लेख से किसे बुरा लग, यानि हम ९०% तो जानते है कि यह बेहुदा टिपण्णी किस ने की है, वो चाहे आप के ब्लांग पर हो या फ़िर किसी दुसरे के ब्लांग पर, लेकिन हमारे पास सवूत नही होता, ओर सबूत लेना थोडा महंगा है, लेकिन पता लग सकता है, आप ने देखा होगा कि जब किसी भी नेता को फ़ोन मेल या फ़िर ऎसी कोई टिपण्णी दी जाती है तो वो पकडा जाता है, लेकिन ऎसी कोई सुबिधा मुफ़्त मै मिले ? बस यही खोज बीन चल रही है, लेकिन फ़िर भी आप Live Traffic Feed मै जा कर ओर टिपण्णी कर समय देख कर इतना तो पता लगा सकते है कि यह टिपण्णी किस शहर से हुयी, अगर थोडी ज्यादा महनत करे तो आप को उस का IP पता भी मिल सकता है Live Traffic Feed से ही, यह Live Traffic Feed बहुत काम की चीज है, बस एक बार समय निकाल कर इसे ध्यान से देखे. (राज भाटिया)

भाटिया जी ने मुझे पहली बार यह सुझाव दिया था तब से यह मेरे चिट्ठे पर लगा दिया है. यह बहुत काम की चीज है. तकनीक के जानकार लोगों के लिये जालगगत में एक से एक औजार और उपकरण मौजूद हैं जिस की मदद से आप किसी व्यक्ति के संगणक तक जाकर संगणक का (एब्सोल्यूट) आई पी एड्रेस तक निकाल ला सकते हैं. लेकिन चिट्ठाकारों से मेरा अनुरोध है कि ऐसे काम दोचार तकनीकविदों पर डाल कर वे अपना समय सक्रिय रूप से चिट्ठाकारी में लगा दें.

नंगा तो नंगा ही रहेगा. उस के चक्कर में पड कर अपनी चिट्ठाकारी जाया करने के बदले उसे उसके कुतंत्रों पर छोड दें. यदि बहुत अधिक उछलकूद करने लगेगा/लगेगी तो उसका आईपी एड्रेस, कालोनी का पता आदि छाप दिया जायगा.

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Author: Super_Admin

15 thoughts on “नंगे होने पर ही ये लिख पाते हैं!!

  1. सार यही है कि हल तो हर चीज का है। बस हम किसे जोतना चाहते हैं और किसे नहीं। वैसे भी सबै भूमि गोपाल की। निष्‍कर्षत: ब्‍लॉग पर बेनामी टिप्‍पणियों की सुविधा नहीं दी जानी चाहिए। उससे यह गंदगी काफी हद तक रूकती है तो यही किया जाना चाहिए और जैसा कि शास्‍त्रीजी ने सुझाव दिया है कि ”चिट्ठाकारों से मेरा अनुरोध है कि ऐसे काम दोचार तकनीकविदों पर डाल कर वे अपना समय सक्रिय रूप से चिट्ठाकारी में लगा दें.” पर अमल करते हुए ” नंगा तो नंगा ही रहेगा. उस के चक्कर में पड कर अपनी चिट्ठाकारी जाया करने के बदले उसे उसके कुतंत्रों पर छोड दें. यदि बहुत अधिक उछलकूद करने लगेगा/लगेगी तो उसका आईपी एड्रेस, कालोनी का पता आदि छाप दिया जायगा ” इस कार्यवाही को सरअजाम दिया करें। तो इस तरह हो गया समझ लीजिए 100 प्रतिशत समाधान।

  2. सुब कुछ तो आप ने कह ही दिया है ,सुना दिया है ! ऐसी कलुषित आत्माओं के विरूद्ध निरंतर अभियान चलाये रखना अब जरूरी हो गया है !

  3. चिट्ठा जगत के इन कायर लिक्खड़ों को नजरंदाज कर देने और उनकी टिप्पणियों को तुरंत हटा देने की नीति भी कारगर साबित हो सकती है।

  4. सबसे पहले तो ईश्वर से इन राहुकेतु/राहुकेतुआणियों उर्फ़ बेनामी/बेनामिनों की आत्मा की शांति के लिये प्रार्थना करता हूं. ईश्वर उन्हे उनकी करणी अनुसार जन्नत /दोजख बख्से. और ब्लागरों को उनकी काली नजरों से बचायें.

    आपके सुझाव माने जाने चाहिये. राहुकेतुओं की टिपणीयों का प्रकाशन ना किया जाये तो उनको खुराक मिलना बंद हो जायेगी तो खुश होकर रसीली (माकटेल) का आनंद नही ऊठा पायेंगे. और गर्मी मे झुलसते रहेंगे तो उनकी आत्मा को अति प्रशन्नता होगी.

    रामराम.

  5. हर चहरे में छिपे होते है कई चहरे

    जिसको भी देखिये कई बार देखिये..

  6. नंगों को और क्या नंगा करेंगे शास्त्री जी।मेरे हिसाब से तो उन्हे उन्के हाल पर छोड़ देना चाहिये।

  7. अपनी तरफ़ से सावधानी बरतना ही एकमात्र उपाय है । अनाम टिप्पणियां स्वीकार ही नहीं की जानी चाहिये | अन्ततः Comment moderator तो है ही

  8. शास्त्री जी, मुझे खुद बहुत दुःख हुआ था…वो तिप्प्न्नियाँ पढ़ कर भी और ब्लॉग जगत में जो भी जिस तरह का चल रहा है वो देख कर भी…अफ़सोस की लोग…जो कम से कम इतना मष्तिष्क तो रखते हैं की कुछ रच्नात्क्मक लिख रहे हैं…इस तरह के कृत्या भी करते हैं…मुझे संतोष है की …समय पर मैंने वो व्यवस्ता लागू कर दी..रही बात स्टेट काउंटर की..कल से कई बार कोशिश कर चुका हूँ मगर हो नहीं पा रहा है..पाबला जी की मदद से कर लूँगा…मगर यहाँ कुछ न कुछ तो गलत पनप ही रहा है….मैं खुद अनुभव कर रहा हूँ…अफ़सोस की अग्ग्रेगेतोर्स इन मामले में कुछ भी नहीं कर रहे हैं ..या शायद कर पा रहे हैं…मुझे विश्वास है की मेरा चरित्र..(जो मेरी लेखनी और टिप्पणी से अंदाजा लगाया जा सकता है ) को देखते हुए आपका स्नेह और विश्वास मुझ पर बना रहेगा…मगर मन क्षुब्ध और व्यथित तो जरूर है…..

  9. StatCounter जैसी मुफ्त में मिल रही सेवा की अपनी सीमायें हैं। इससे कुछ हद तक आइडिया तो लग सकता है, किन्तु सटीक निशाना नहीं लगाया जा सकता। भारी भुगतान लेकर अत्याधुनिक तकनीकी सेवायें देने वाले तो आपकी इच्छा को पूरा करते हुये बाकायदा उस व्यक्ति की, उसके कम्प्यूटर सहित बखिया उधेड़ कर हाथ में रख देते हैं और देते हैं ऐसे वैज्ञानिक सबूत जिन्हें दुनिया की कोई अदालत झुठला नहीं सकती।

    शास्त्री जी से एक निवेदन भी: ‘तकनीकविशारद’ शब्द हटा दें, असहजता महसूस हो रही या फिर ‘तकनीकनौसिखिया’ से बदल दें।

  10. शास्त्री जी, इन अनाम/अनामिका को हम सब ने पहचान तो लिया ही है, लेकिन पक्का सबूत ना होने से अभी उसे नंगा नही कर सके,(वेसे तो इज्जत से वो नंगा ही है)मुझे जब भी कोई टिपण्णी आती है बेनाम से तो मे उसे मिटाता नही, बल्कि उस का एक एक शव्द ध्यान से पढता हुं, फ़िर उस टिपण्णी का लहजा (आंदाजा ) क्योकि हम सब एक ही ढंग से नही लिखते, अब का तरीका अलग अलग अंदाज है, ओर बहुत से लोगो के लेख नाम के बिना भी हम पहचाने है कि इस आंदाज से तो फ़ंला फ़लां ही लिखते है, फ़िर शव्दो की गल्तिया, बस ऎसी छोटी छोटी बातो पर गोर करे तो… चोर तो पकडा गया, लेकिन इन सब के लिये बहुत समय चाहिये,

  11. मुझे लगता है कि बेनामी टिप्पणियों को एक एकेडेमिक इंटरेस्ट से पढ़ना चाहिए। बल्कि उनका अध्ययन करना चाहिए। बेनामी टिप्पणी का एक निष्कर्ष तो यही है कि स्वयं लिखने वाला भी उसे दिन के उजाले में सबके सामने लिखी जाने वाली बात नहीं मानता। यानि वह स्वयं उसके विरुद्ध खड़ा है।

    यह मनोवैज्ञानिक शोध का विषय होना चाहिए कि यदि व्यक्ति को पहचाने जाने का डर न हो तो वह क्या-क्या कर सकता है। सामाजिक प्रास्थिति हमारे ऊपर कौन से जरूरी बन्धन लगाती है यह भी इन बेनामी कुंठासुरों से जाना जा सकता है। नितान्त निजी तौर पर एक व्यक्ति जो सोचता है वह एक सामाजिक प्राणी की सोच से कितनी भिन्न है, यदि यह सब जानना है तो इस बेनामी नामक प्राणी को खूब फलने-फूलने दीजिए। बस, इसकी कही बातों को दिल से न लगाइए।:)

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